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जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट बैन से छोटे कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें, जानिए विरोध प्रदर्शन से उनका क्या फायदा?

Jantar Mantar: दिल्ली पुलिस ने सोमवार को जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया. इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन स्थल घोषित किया गया है.

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जंतर-मंतर के आसपास खाने-पीने की कई छोटी-छोटी दुकानें हैं. (Photo: PTI)

दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए पाबंदियां लगाए जाने का असर अब आसपास कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों पर भी दिखाई देने लगा है. प्रदर्शनकारियों की आवाजाही कम होने, सुरक्षा व्यवस्था सख्त होने और सड़क पर सन्नाटा पसरे रहने से दुकानदारों को अपनी कमाई घटने की चिंता सता रही है. उनका कहना है कि जंतर-मंतर पर नियमित रूप से होने वाले प्रदर्शनों के कारण यहां लोगों की आवाजाही बनी रहती थी, जिससे खाने-पीने की दुकानों और पान की गुमटियों का कारोबार भी चलता था.

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने सोमवार को जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया. इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन स्थल घोषित किया गया है. इस फैसले के बाद जंतर-मंतर के आसपास कारोबार करने वाले दुकानदारों को आशंका है कि ग्राहकों की संख्या में गिरावट लंबे समय तक जारी रह सकती है.

यह भी पढ़ें: दिल्ली पुलिस ने धरना-प्रदर्शन की लिस्ट से क्यों हटाया जंतर-मंतर का नाम? अब इन 3 जगहों पर ही प्रोटेस्ट की मंजूरी

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प्रदर्शनकारियों से बढ़ती थी दुकानदारों की कमाई

पीटीआई के अनुसार, जंतर-मंतर के पास पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से छोले-भटूरे, राजमा-चावल, मटर-कुलचा और पुलाव बेचने वाले विजय गुप्ता का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनकी दुकान पर ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती थी. अब उन्हें एक महीने में कारोबार 40 प्रतिशत तक प्रभावित होने का डर है. प्रदर्शन के लिए लोगों के जुटने से इलाके में लगातार आवाजाही बनी रहती थी. प्रदर्शनकारी खाने-पीने की चीजें खरीदते थे और आसपास के छोटे कारोबारियों को इसका सीधा फायदा मिलता था.

कारोबारी ने आगे कहा कि मौजूदा स्थिति में प्रदर्शनकारियों की गैरमौजूदगी के साथ दफ्तर जाने वाले लोगों की आवाजाही भी कम हुई है. उनके अनुभव में पहली बार प्रदर्शन स्थल के ठीक बाहर खाने-पीने की कई दुकानें बंद देखी गई हैं.

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26 साल से दुकान चला रहे कारोबारी भी परेशान

जंतर-मंतर के आसपास 26 वर्षों से पान की दुकान चला रहे अजय कुमार ने भी आर्थिक नुकसान पर चिंता जताई. उनका कहना है कि प्रदर्शन स्थल में बदलाव का असर कारोबार के साथ विरोध करने के लिए जुटने वाले लोगों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है. उन्होंने मांग की कि कम से कम सड़क और मेट्रो स्टेशन खोल दिए जाने चाहिए, जिससे ऑफिस जाने वाले लोग आसानी से आ-जा सकें. यह सड़क सामान्य दिनों में काफी व्यस्त रहती है, लेकिन मौजूदा हालात में आसपास लोगों की संख्या बेहद कम दिखाई दे रही है. इससे दुकानदारों की रोजाना की कमाई प्रभावित हो रही है.

यह भी पढ़ें: जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन बैन, फिर भी CJP ने मांगी इजाजत, क्या दिल्ली पुलिस देगी परमिशन?

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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