देश की राजधानी दिल्ली में सालों से आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों की पहचान रहे जंतर-मंतर को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है. अब राजधानी में किसी भी तरह के धरने या प्रदर्शन के लिए आयोजकों को अन्य तय जगहों का रुख करना होगा. दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा जारी स्टैंडिंग ऑर्डर के मुताबिक, अब राजधानी में धरने और विरोध प्रदर्शनों के लिए तीन नई जगहें तय की गई हैं, रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड.
जंतर-मंतर को हटाने की क्या रही वजह?
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद चर्चा में आया. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन को लेकर सुरक्षा और पाबंदियों से जुड़ी याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की थी.
सुनवाई के दौरान यह बात भी प्रमुखता से सामने आई कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए जरूरी नागरिक सुविधाएं नहीं हैं. आसपास सांसदों और सरकारी अधिकारियों के आवास हैं, जिससे वहां शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं सीमित हैं. कई दिनों तक चलने वाले आंदोलनों में प्रदर्शनकारियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था.
जंतर-मंतर को हटाने के पीछे सबसे अहम कारण
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी थी कि जंतर-मंतर संसद भवन के बेहद करीब है, जो देश की संप्रभुता का प्रतीक है. पूर्व में एक दिन की अनुमति लेकर 17 दिनों तक प्रदर्शन चलने और संसद की ओर कूच करने की घटनाएं सामने आई थीं. ऐसे में यहां लगातार जुटने वाली भीड़, लंबे समय तक चलने वाले धरने और कई मौकों पर संसद की तरफ बढ़ने की कोशिशों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी. सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने और वीवीआईपी इलाके में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए इसे धरना स्थल की लिस्ट से अलग करना जरूरी समझा गया.
इमरजेंसी सेवाओं में रुकावट
संकरे रास्ते और लगातार भीड़ के कारण यहां एंबुलेंस जैसी आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को पहुंचने में भी दिक्कतें आ रही थीं. अगर किसी प्रदर्शनकारी या स्थानीय नागरिक की तबीयत अचानक बिगड़ती, तो जाम के चलते समय पर मदद पहुंचाना मुश्किल हो जाता था. अदालत ने भी माना कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार जरूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसी जगह होनी चाहिए जहां लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें और आम जनजीवन या सुरक्षा प्रभावित न हो. इन्ही वजहों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने यह निर्णय लिया.
अब कहां हो सकेंगे प्रदर्शन?
नए आदेश के तहत तय किए गए तीन स्थलों में रामलीला मैदान संसद के सबसे नजदीक है, जबकि बुराड़ी ग्राउंड सबसे दूर स्थित है. वहीं पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को भी एक विकल्प के रूप में शामिल किया गया है ताकि व्यवस्था भी न बिगड़े और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार भी सुरक्षित रहें.