भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की करेंसी को लेकर एक बहुत बड़े और ऐतिहासिक बदलाव पर विचार कर रहा है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि केंद्रीय बैंक देश में पारंपरिक कागजी नोटों की जगह पॉलिमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट पेश करने के एक प्रस्ताव पर काम कर रहा है। गवर्नर के मुताबिक, यह प्रस्ताव अभी अपने शुरुआती (प्रारंभिक) चरण में है।
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10 साल बाद फिर फाइलों से बाहर निकला प्रस्ताव
दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय बैंक ने लगभग एक दशक पहले पहली बार देश में प्लास्टिक के नोट छापने का विचार पेश किया था। अब इस योजना को दोबारा शुरू करने के पीछे मुख्य वजह बाजार में कैश (नकदी) के चलन में आया जबरदस्त उछाल है।
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क्यों पड़ी प्लास्टिक नोटों की जरूरत?
बाजार में नकदी की बढ़ती मांग के कारण कागजी नोटों को छापने की लागत लगातार बढ़ रही है। कागजी नोट बहुत जल्दी गंदे हो जाते हैं, फट जाते हैं या सड़-गल जाते हैं, जिसके कारण हर साल भारी मात्रा में नोटों को चलन से बाहर (डिसकार्ड) करना पड़ता है। इससे सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
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साल 2014 में भी हुआ था ट्रायल का ऐलान
इससे पहले फरवरी 2014 में भी सरकार ने संसद को जानकारी दी थी कि देश के 5 चुनिंदा शहरों में 10 रुपये के मूल्यवर्ग वाले 1 अरब प्लास्टिक नोट फील्ड ट्रायल के लिए उतारे जाएंगे। इन शहरों का चयन देश की भौगोलिक और जलवायु विविधता (Geographical and Climatic Diversity) को ध्यान में रखकर किया गया था, ताकि यह देखा जा सके कि अलग-अलग मौसम में ये नोट कितने कामयाब रहते हैं:
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- कोच्चि (Kochi)
- मैसूर (Mysore)
- जयपुर (Jaipur)
- शिमला (Shimla)
- भुवनेश्वर (Bhubaneswar)
क्यों रुक गई थी योजना?
साल 2014 में शुरू हुई इस पहल को बाद में तकनीकी और परिचालन संबंधी (Technological and Operational) दिक्कतों के सामने आने के कारण बीच में ही रोकना पड़ा था। लेकिन अब आरबीआई इन चुनौतियों को दूर कर इसे नए सिरे से लागू करने की तैयारी में है।
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प्लास्टिक नोटों के 3 सबसे बड़े फायदे:
- लंबी उम्र: ये नोट पानी में भीगने या मोड़ने से फटते नहीं हैं और कागजी नोटों के मुकाबले कई गुना ज्यादा चलते हैं।
- नकल करना नामुमकिन: पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोट (Fake Currency) बनाना लगभग असंभव हो जाता है।
- साफ-सुथरे और रीसाइकिल योग्य: इन नोटों पर गंदगी या बैक्टीरिया आसानी से नहीं चिपकते और खराब होने के बाद इन्हें पूरी तरह रीसाइकिल किया जा सकता है।