पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की अटकलें तेज थीं। सोशल मीडिया से लेकर कई प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा किया जा रहा था कि सरकार जल्द ही ईंधन की कीमतों में भारी इजाफा कर सकती है। हालांकि, अब खुद सरकार ने इन तमाम खबरों पर पूर्णविराम लगा दिया है।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।
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अफवाहों पर फुल स्टॉप
मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ईंधन की कीमतों में संभावित वृद्धि को लेकर चल रही खबरें पूरी तरह से आधारहीन और भ्रामक हैं। सरकार फिलहाल ऐसी किसी भी योजना पर काम नहीं कर रही है जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़े। यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल युद्ध) में जारी तनाव के कारण तेल कंपनियां कीमतें बढ़ाने का दबाव बना रही हैं।
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वैश्विक तनाव के बावजूद स्थिरता की कोशिश
भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड के दाम $100 प्रति बैरल के आसपास झूल रहे हों, लेकिन सरकार का रुख साफ है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को फिलहाल खुद एब्जॉर्ब करने का संकेत दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में महंगाई (Inflation) को नियंत्रित रखना है। भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार (Strategic Reserves) है, जिससे तात्कालिक सप्लाई की कोई कमी नहीं होगी।
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आम आदमी के लिए बड़ी राहत
ईंधन की कीमतों में स्थिरता रहने का सीधा मतलब है कि माल ढुलाई, बस किराया और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों (सब्जी, फल, राशन) के दाम स्थिर रहेंगे। अगर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते, तो इसका असर सीधे तौर पर देश की पूरी सप्लाई चैन पर पड़ता, जिससे महंगाई बेकाबू हो सकती थी।
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