पड़ोसी देश पाकिस्तान में एक बार फिर बड़ा आर्थिक और ऊर्जा संकट गहरा गया है. पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो गई है. हालात इतने बिगड़ने लगे हैं कि शहबाज शरीफ सरकार पूरे देश में पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन लगाने की तैयारी में है.
अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो पूरे पाकिस्तान में शाम 8 बजे के बाद बाजार बंद हो जाएंगे और सन्नाटा पसर जाएगा. आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में यह नौबत क्यों आई है और वहां क्या-क्या पाबंदियां लगाई जा सकती हैं.
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प्रस्तावित स्मार्ट लॉकडाउन में क्या-क्या पाबंदियां लगेंगी?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उच्च स्तरीय बैठक में तैयार की गई आपातकालीन योजना के तहत कई कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया गया है. सरकारी व प्राइवेट दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों को हफ्ते में केवल 4 दिन खोलने का प्रस्ताव है. शुक्रवार, शनिवार और रविवार को छुट्टी का ऐलान किया जा सकता है.
स्कूल बंद रहेंगे और कॉलेज-यूनिवर्सिटीज की पढ़ाई तुरंत ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट होगी. कॉर्पोरेट/IT सेक्टर के कर्मचारियों को हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम (WFH) मिलेगा.
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बिजली और ईंधन बचाने के लिए शॉपिंग मॉल व कमर्शियल मार्केट को शाम 8 बजे तक ही खोलने की अनुमति होगी. रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल रात 10 बजे बंद करने होंगे. केवल मेडिकल स्टोर जैसी आपातकालीन सेवाएं खुली रहेंगी. सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों को मिलने वाले फ्यूल अलाउंस में 50% तक की भारी कटौती की जाएगी.
आखिर क्यों आई पाकिस्तान में ऐसी नौबत?
पाकिस्तान के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं, तेल का घटता स्टॉक और खाली होता विदेशी मुद्रा भंडार. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) से सप्लाई बाधित होने के कारण पाकिस्तान के पास अब सिर्फ 28 दिनों का पेट्रोल-डीजल स्टॉक बचा है. पाकिस्तान अपनी जरूरत का 70% कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से मंगाता है. दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पाकिस्तान के बचे-कुचे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ रहा है.
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स्थिति काबू करने का एकमात्र रास्ता
ईंधन की खपत घटाने और देश को पूरी तरह से फ्यूल-ब्लैकआउट से बचाने के लिए पाकिस्तान सरकार के पास इस तरह के सख्त पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन लागू करने के अलावा फिलहाल कोई और विकल्प नहीं बचा है.
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