भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और आम जनता की जेब से जुड़ी एक बेहद बड़ी खबर सामने आई है. देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल और गैस कंपनी ONGC (Oil and Natural Gas Corporation) को ओडिशा तट के पास महानदी बेसिन (Mahanadi Basin) के गहरे पानी में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का एक नया और विशाल भंडार मिला है.
केंद्र सरकार के समुद्र मंथन अभियान के तहत मिली इस बड़ी कामयाबी के बाद अब हर आम इंसान के मन में एक ही सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या इस नई खोज से भारत में एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर और सीएनजी (CNG) के दाम सस्ते होंगे? आइए समझते हैं कि इस गैस भंडार का आपकी जेब और रसोई गैस के बजट पर क्या असर पड़ सकता है.
क्या सच में सस्ते होंगे LPG और CNG के दाम?
इस सवाल का जवाब समझने के लिए हमें भारत की गैस निर्भरता (Import Dependency) का गणित समझना होगा. भारत अपनी जरूरत की आधी से ज्यादा (50%+) एलपीजी और प्राकृतिक गैस दूसरे देशों से इम्पोर्ट (आयात) करता है. जब अपने ही देश में प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन (Domestic Production) बढ़ेगा, तो हमें विदेशों से महंगी गैस कम खरीदनी पड़ेगी.
दूसरे देशों से जहाजों के जरिए गैस मंगाने में भारी ट्रांसपोर्टेशन चार्ज और टैक्स देना पड़ता है. ओडिशा में मिले इस भंडार से देश के भीतर ही सप्लाई आसान होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स का खर्च घटेगा. जैसे ही इस कुएं (MDW-28) से कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होगा, देश में नेचुरल गैस की सप्लाई बढ़ेगी. सप्लाई बढ़ने और PNG Rules 2025 के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल से उत्पादन लागत कम होगी, जिसका सीधा फायदा आगे चलकर LPG सिलेंडर, पाइप वाली रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों की CNG की कीमतों में राहत के रूप में मिल सकता है.
बता दें कि यह खोज ओएनजीसी के गहरे पानी में एक्सप्लोरेशन ड्राइव के दौरान हुई है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने महानदी बेसिन के MDW-28 कुएं की ड्रिलिंग का शुभारंभ किया था. विस्तृत जांच और डेटा एनालिसिस के बाद जब 18 सितंबर को कुएं की टेस्टिंग की गई, तो वहां से बेहतरीन प्रेशर के साथ नेचुरल गैस का तेज बहाव शुरू हो गया.
इस खोज के आस पास मौजूद अन्य गैस भंडारों को एक साथ मिलाकर सांझा इंफ्रास्ट्रक्चर से गैस निकाली जाएगी, जिससे लागत काफी कम आएगी और गैस तेजी से बाजार तक पहुंचेगी.
आम आदमी के लिए क्या है बॉटम लाइन?
हालांकि समुद्र के गहरे पानी से गैस निकालकर उसे रिफाइनरियों तक पहुंचाने और आपके घर के सिलेंडर तक आने में थोड़ा वक्त लगेगा. लेकिन यह खोज भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और भविष्य में एलपीजी या सीएनजी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की दिशा में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम है.