नई दिल्ली: फिनलैंड की कंपनी नोकिया अपने भारतीय और वैश्विक परिचालन को सुव्यवस्थित (Streamline) करने के लिए एक बार फिर छंटनी का सहारा ले रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने 74,100 के वैश्विक कार्यबल में से 20% तक की कमी करने का अनुमान लगा रही है। भारत, जहां नोकिया के करीब 17,700 से अधिक कर्मचारी हैं, इस कटौती से अछूता नहीं रहेगा।

पुराने मॉडल की ओर वापसी

नोकिया अपने 2023 से पहले वाले हॉरिजॉन्टल स्ट्रक्चर (Horizontal Structure) पर वापस लौट रही है। 2023 में कंपनी ने वर्टिकल मॉडल अपनाया था, लेकिन उसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। अब कंपनी को दो मुख्य हिस्सों में बांटा जा रहा है:

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  1. नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर (Network Infrastructure)
  2. मोबाइल इंफ्रास्ट्रक्चर (Mobile Infrastructure)

क्यों हो रही है छंटनी?
सूत्रों के अनुसार, कंपनी के क्लाउड एंड नेटवर्क सर्विसेज (CNS) और मोबाइल नेटवर्क्स (MN) विभागों का विलय किया जा रहा है। इस विलय के कारण कई पदों पर 'काम का दोहराव' (Duplication of work) हो रहा है। इसके अलावा, जो बिजनेस कंपनी की मुख्य प्राथमिकताओं (Core Priorities) से बाहर हैं, उनमें काम करने वाले कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।

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नेतृत्व में बड़ा बदलाव (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी)
भारत में कंपनी ने अपनी लीडरशिप टीम में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। समर मित्तल, इंडिया कंट्री बिजनेस लीडर के रूप में प्रमोट किए गए हैं। वहीं विभा मेहरा को इंडिया कंट्री मैनेजर की जिम्मेदारी दी गई है। तरुण छाबड़ा इंडिया कंट्री हेड के पद से हट गए हैं।

नोकिया का वर्कफोर्स डेटा
पिछले कुछ वर्षों में नोकिया ने अपने कर्मचारियों की संख्या में लगातार कटौती की है:

2018: 1,03,000 कर्मचारी (अल्काटेल-ल्यूसेंट के अधिग्रहण के बाद)

2024: 75,600 कर्मचारी

2025 (अंत): 74,100 कर्मचारी