सोना इस समय रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। बीते कुछ समय से इसके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। सोने की चढ़ती कीमत से जहां उन लोगों के चेहरे खिले हैं, जिन्होंने पहले ही निवेश कर दिया था। वहीं, ऐसे लोगों के चेहरे पर मायूसी है, जो निवेश के लिए इसकी कीमतों के गिरने का इंतजार करते रहे। हालांकि, अगर अमेरिकी एनालिस्ट जॉन मिल्स का अनुमान सही साबित होता है, तो सोना बड़ी डुबकी लगा सकता है।
खत्म हो सकती है 12 महीने की बढ़त
अमेरिकी फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म मॉर्निंगस्टार (Morningstar) के एनालिस्ट जॉन मिल्स (Jon Mills) का कहना है कि सोने की कीमत अगले कुछ सालों में 38% तक गिर सकती हैं। यह गिरावट पिछले 12 महीनों में आई बढ़त को गंवाने जैसी होगी। मिल्स का कहना है कि सोने की कीमत 1,820 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम 3,132.71 प्रति औंस चल रहे हैं, ऐसे में अगर जॉन मिल्स का अनुमान सही साबित होता है, तो इस पीली धातु में निवेश का मौका तलाश रहे लोगों की तलाश खत्म हो सकती है।
इस वजह से चढ़े हैं गोल्ड के दाम
गोल्ड पिछले कुछ वक्त में काफी महंगा हो गया है। इस वजह से सोने के गहने खरीदने वालों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ज्वेलरी की मांग में भी गिरावट आई है। हालांकि, जिन लोगों ने निवेश के लिहाज से पहले ही सोना खरीद लिया था, उनका प्रॉफिट कई गुना बढ़ गया है। इसमें प्रॉफिट बुकिंग भी दिखाई दी है। लेकिन अधिकांश निवेशकों का मानना है कि इसके दाम और चढ़ सकते हैं, इसलिए वह अपने पूरे इन्वेस्टमेंट की बिकवाली नहीं कर रहे। सोने के दाम भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता, महंगाई बढ़ने की आशंका और डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों की वजह से बढ़े हैं।
गोल्ड में गिरावट की आशंका क्यों?
एनालिस्ट जॉन मिल्स ने यह भी बताया ही कि सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना क्यों बन सकती है। उनका कहना है कि डिमांड और सप्लाई के बीच का अंतर अगले कुछ सालों में तेजी से कम हो सकता है। मिल्स के अनुसार, जब सोना महंगा होता है, तो इसकी माइनिंग बढ़ जाती है। 2024 की दूसरी तिमाही में गोल्ड माइनिंग का औसत मुनाफा 950 डॉलर प्रति औंस था, जो 2012 के बाद सबसे ज्यादा है। पिछले साल दुनिया में सोने का कुल भंडार 9% बढ़ा है। कई देश बड़े पैमाने पर सोने का उत्पादन बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, पुराना सोना भी रीसाइकल किया जा रहा है। इससे बाजार में उपलब्ध सोने की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सप्लाई ज्यादा होने से कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और यह सस्ता हो जाएगा।
केंद्रीय बैंक नहीं बढ़ाएंगे डिमांड!
सोने की कीमतों में तेजी की एक वजह दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने गोल्ड भंडार को लगातार बढ़ाना भी है। जॉन मिल्स का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की तरफ से सोने की डिमांड कम होने की संभावना है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सर्वे में 71% केंद्रीय बैंकों ने कहा कि वे अगले साल अपनी गोल्ड होल्डिंग्स घटा सकते हैं या स्थिर रह सकते हैं। इससे सोने की डिमांड कम होगी और उसके दाम भी नीचे आ सकते हैं। हालांकि, कई दूसरे एक्सपर्ट्स मिल्स के अनुमान से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि सोना और महंगा होगा और फिलहाल किसी बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है।
इन्हें उम्मीद, चढ़ती रहेंगी कीमतें
वॉल स्ट्रीट के कई एनालिस्ट को उम्मीद है कि सोने का निखार लगातार बढ़ता रहेगा। बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि अगले दो साल में सोना 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। जबकि गोल्डमैन सैक्स को उम्मीद है कि 2025 के अंत तक सोने की कीमतें 3,300 डॉलर प्रति औंस हो सकती हैं। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सोने की कीमतें कैसी रहेंगी, यह डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर निर्भर करेगा। अगर उनकी नीतियों से ट्रेड वॉर की आशंका को बल मिलता है और हालात बिगड़ते हैं तो फिर सोने के दाम घटने की संभावना मुश्किल होगी।
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