डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही अपनी व्यापारिक नीतियों से दुनिया को हिला कर रख दिया है. अप्रैल 2025 में उनके द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ के रद्द होने के बाद, ट्रंप ने धारा 122 के तहत 15% का नया ग्लोबल टैरिफ लागू करने का ऐलान किया है. मूडीज एनालिटिक्स की रिपोर्ट इस पर एक अलग ही रोशनी डालती है. मूडीज के अनुसार, ट्रंप के इस फैसले से चीन को शायद राहत मिल जाए, लेकिन भारत के लिए समीकरण उलझ सकते हैं. आइए समझते हैं इस पूरी रिपोर्ट का सार क्या है:
चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए छिपी हुई राहत?
मूडीज का कहना है कि 15% का एकसमान टैरिफ (Uniform Tariff) चीन और वियतनाम जैसे देशों के लिए एक तरह की राहत हो सकता है. इन देशों पर पहले से ही अमेरिका ने बहुत ऊंचे और टारगेटेड टैरिफ लगा रखे थे. अब जब 15% का एकसमान टैरिफ लगेगा, तो इनके लिए प्रभावी टैरिफ दर पहले के मुकाबले कम हो सकती है. यानी, जो इनके लिए पहले सजा थी, वह अब अन्य देशों के बराबर आने से इन्हें प्रतिस्पर्धी लाभ दे सकती है.
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भारत और इंडोनेशिया के लिए अनिश्चितता का दौर
मूडीज की रिपोर्ट में भारत को लेकर चिंता जताई गई है. भारत और इंडोनेशिया के साथ अमेरिका के जो व्यापार समझौते पिछले कुछ समय में हुए थे, उन पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों ने वॉशिंगटन की व्यापारिक रणनीति को हिला दिया है. इससे भारत के साथ हुए पुराने व्यापारिक वादों और समझौतों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
धारा 122 और ट्रंप का गुस्सा
जब सुप्रीम कोर्ट और कानूनी अड़चनों के कारण ट्रंप के पुराने टैरिफ रद्द हुए, तो उन्होंने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के बजाय धारा 122 का इस्तेमाल किया. यह ट्रंप की उस आक्रामकता को दर्शाता है कि वे किसी भी कीमत पर अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना चाहते हैं. मूडीज का मानना है कि ट्रंप टैरिफ बढ़ाने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखेंगे, चाहे कानूनी चुनौतियां कितनी भी हों.
ग्लोबल मार्केट पर क्या होगा असर?
मूडीज एनालिटिक्स के अनुसार, इन घटनाक्रमों ने व्यापारिक रणनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है. निवेशक अब डरे हुए हैं कि कौन सा देश ट्रंप की अगली लिस्ट में होगा. सप्लाई चेन फिर से प्रभावित हो सकती है. भारत जैसे देश, जो अमेरिका को अपना बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन मानते हैं, उन्हें अपनी रणनीतियां फिर से बनानी होंगी.
आगे की राह
मूडीज की रिपोर्ट साफ करती है कि ट्रंप का 15% टैरिफ केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल ट्रेड की बिसात को पूरी तरह से पलटने वाला कदम है. जहां चीन जैसे देश इस एकसमान टैरिफ के पीछे छिपकर राहत पा सकते हैं, वहीं भारत को अपनी ट्रेड डिप्लोमेसी को और मजबूत करना होगा.