पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल युद्ध) में छिड़े संघर्ष की तपिश अब यूरोपीय आसमान तक पहुँच गई है। जर्मनी की दिग्गज विमानन कंपनी Lufthansa ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अक्टूबर 2026 तक अपनी 20000 छोटी दूरी की उड़ानों (Short-haul flights) को रद्द करने का ऐलान किया है। तेल की आसमान छूती कीमतों और जेट ईंधन की भारी किल्लत ने पूरी दुनिया के एविएशन सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है।
ईंधन के दाम हुए दोगुने: $197 प्रति बैरल का शॉक
लुफ्थांसा, जो Austrian Airlines, Swiss International Air Lines और Brussels Airlines जैसी प्रमुख यूरोपीय एयरलाइनों की पैरेंट कंपनी है, ने बताया कि जेट ईंधन की कीमतें $197 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं। यह सामान्य कीमतों से लगभग दोगुनी बढ़त है। ईंधन के इस बढ़ते बोझ के कारण कंपनी के लिए उड़ानों का संचालन करना आर्थिक रूप से असंभव होता जा रहा है।
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Cityline पर गिली गाज: 27 विमानों को हटाने का फैसला
संकट इतना गहरा है कि लुफ्थांसा ने अपनी सहायक कंपनी Cityline को स्थायी रूप से बंद करने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही कंपनी अपने बेड़े से 27 विमानों को भी हटाने जा रही है। यह कदम लागत में कटौती और संसाधन बचाने के लिए उठाया गया है, जिससे हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित होने वाली हैं।
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IAEA की डरावनी चेतावनी: सिर्फ 6 हफ्ते का ईंधन बचा
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख ने इस संकट को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, यूरोप के पास अब केवल 6 सप्ताह का जेट ईंधन शेष बचा है। यदि सप्लाई चैन में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यूरोप में बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन और 'एविएशन ब्लैकआउट' जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
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यात्रियों के लिए क्या है विकल्प?
Lufthansa और इसकी सहायक एयरलाइनों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी बुकिंग का स्टेटस चेक करते रहें। रद्द की गई उड़ानों के लिए रिफंड या वैकल्पिक रूट की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन लंबी दूरी की यात्राओं और कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर इसका व्यापक असर दिखना तय है।
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