अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की खबरों ने भारतीय नागरिकों के लिए राहत के रास्ते खोल दिए हैं. इस कूटनीतिक प्रगति से खाड़ी देशों से आयात होने वाली कई आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की लागत में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है. रसोई गैस से लेकर हवाई सफर तक, आने वाले दिनों में आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला बोझ काफी हद तक कम हो सकता है. आइए जानते हैं उन जरूरी सामानों के बारे में जो इस समझौते के बाद सस्ती हो सकती हैं.
रसोई गैस की कीमतों में राहत की उम्मीद
भारत अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रोपेन और ब्यूटेन की कीमतें 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के पार पहुंच गई थीं. अब तनाव कम होने से इसके 550-600 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक गिरने का अनुमान है, जिससे घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 70 से 100 रुपये तक की कमी आ सकती है.
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CNG-PNG की कीमतें भी हो सकती हैं कम
भारत अपनी प्राकृतिक गैस (LNG) की आधी जरूरत कतर और UAE से पूरी करता है. आपूर्ति बाधित होने के डर से एलएनजी की हाजिर कीमतें 15-18 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (mmBtu) तक पहुंच गई थीं, जो अब गिरकर 9-10 डॉलर होने की उम्मीद है. इसके चलते देश में सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की कीमतें 4 से 6 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो सकती हैं.
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हवाई सफर और लॉजिस्टिक्स चार्ज
विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में हवाई ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत होती है. कच्चे तेल के 125 डॉलर प्रति बैरल पार करने से एटीएफ के दाम रिकॉर्ड स्तर पर थे. अब कच्चे तेल के 75-80 डॉलर के दायरे में लौटने से एटीएफ की लागत 10-12 प्रतिशत कम हो सकती है, जिससे विमान किराया 8 से 10 प्रतिशत तक घट सकता है.
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ईंधन सस्ता होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर होने से लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में माल ढुलाई दरें 7-10 प्रतिशत तक कम होंगी, जिसके चलते ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों के डिलीवरी चार्ज में 5-8 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है.
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खेती-किसानी और उद्योगों को बड़ी राहत
भारत ओमान और सऊदी अरब से हर साल 70-80 लाख टन यूरिया और फॉस्फेट आधारित उर्वरकों का आयात करता है. समुद्री मार्ग सामान्य होने से उर्वरक कंपनियों की इनपुट लागत 12-15 प्रतिशत तक घट जाएगी, जिससे खुले बाजार में खाद की किल्लत दूर होगी और सरकारी सब्सिडी का बोझ भी कम होगा. प्लास्टिक उद्योग के लिए भी कच्चा माल (पॉलिमर) 15 प्रतिशत तक सस्ता हो सकता है, जिससे पैकेजिंग सामग्री के दाम गिरेंगे.
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ये जरूरी सामान भी हो सकते हैं सस्ते
पेंट निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रेजिन और सॉल्वैंट्स जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतें घटने से पेंट कंपनियों की उत्पादन लागत 6-8 प्रतिशत कम होगी, जिसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा. इसके अलावा, युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम और कूरियर भाड़े में 30 प्रतिशत की कमी आने से यूएई से आने वाला एल्युमीनियम और कॉपर स्क्रैप 8-10 प्रतिशत सस्ता होगा, जो घरेलू रीसाइक्लिंग इकाइयों के लिए बेहद फायदेमंद है.
वहीं, ईरान से आने वाले कीमिया और मजाफती खजूर की थोक और खुदरा कीमतों में भी आपूर्ति बहाल होने से 25-30 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिल सकती है. इसके साथ ही, रबर और केमिकल उद्योगों में इस्तेमाल होने वाला औद्योगिक सल्फर भी 15 प्रतिशत तक सस्ता होने का अनुमान है.