LSE 24 Trading Platform: लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए 'LSE 24' नामक एक नए प्लेटफॉर्म का ऐलान किया है. यह प्लेटफॉर्म सोमवार से शुक्रवार तक हफ्ते में 5 दिन लगभग 24 घंटे (24/5) ट्रेडिंग की निर्बाध सुविधा प्रदान करेगा. नियामक मंजूरी मिलने के बाद 2027 की पहली छमाही (H1 2027) में एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट्स (ETPs) के साथ इसकी आधिकारिक शुरुआत होगी.
इस पहल का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के निवेशकों को अलग-अलग टाइम जोन में लिक्विडिटी उपलब्ध कराना, बाजार में आने वाले अचानक झटकों का तत्काल प्रबंधन करना और अगली पीढ़ी के एल्गोरिद्मिक तथा AI-एजेंटिक सिस्टम को सुरक्षित कनेक्टिविटी देना है.
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एजेंट आधारित AI सिस्टम के लिए डिज़ाइन
LSE 24 केवल मानव ट्रेडर्स के लिए नहीं, बल्कि एजेंट आधारित AI सिस्टम के लिए डिज़ाइन किया गया है. यह प्लेटफॉर्म ऑटोमेटेड निष्पादन, रीयल-टाइम रिस्क मैनेजमेंट और सेंट्रलाइज्ड लिमिट ऑर्डर बुक (CLOB) को रिक्वेस्ट-फॉर-कोट (RFQ) तंत्र से जोड़ता है. यह नया बाजार लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के डिजिटल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी के साथ एकीकृत होगा. इससे डिजिटल परिसंपत्तियों का सेटलमेंट और कस्टडी अधिक तेज और सुरक्षित होगी.
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वैश्विक बाजारों के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत और एशियाई देशों के निवेशकों के लिए टाइम ज़ोन का अंतर हमेशा एक चुनौती रहा है. LSE 24 के शुरू होने से एशियाई और भारतीय कारोबारी घंटों के दौरान भी लंदन में सूचीबद्ध ईटीएफ और संपत्तियों में ट्रेडिंग संभव हो सकेगी. जब यूरोपीय या अमेरिकी बाजार बंद होते हैं, तब भी ट्रेडर्स अपने पोर्टफोलियो को हेज कर सकेंगे. NYSE (न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज) और नास्डैक (Nasdaq) पहले से ही extended hours ट्रेडिंग पर विचार कर रहे हैं. LSE 24 की शुरुआत से NSE और BSE जैसे एशियाई एक्सचेंजों पर भी ट्रेडिंग के घंटे बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है.
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