---विज्ञापन---

बिजनेस

जेट एयरवेज की बर्बादी की कहानी… जिसने संवारा, वही बर्बाद कर बैठा

जेट एयरवेज जब स्टॉक मार्केट में लिस्ट हुई, तो माना जा रहा था कि कंपनी आईपीओ से मिला पैसा कर्ज का बोझ कम करने पर खर्च करेगी। लेकिन नरेश गोयल के कुछ और ही प्लान थे। उन्होंने 2012 में बंद हुई किंगफिशर से भी कोई सबक नहीं लिया। वह लगातार गलतियां करते रहे और जेट एयरवेज और अपनी बर्बादी की कहानी लिख डाली।

Author Edited By : Neeraj Updated: Mar 31, 2025 16:54

सफलता की कहानी लिखने वाले कभी-कभी खुद ही अपनी बर्बादी की कहानी लिख देते हैं। जेट एयरवेज और उसके मालिक रहे नरेश गोयल के साथ भी यही हुआ। कभी आसमान पर राज करने वाली जेट एयरवेज अब दम तोड़ चुकी है और नरेश गोयल अपने जीवन के आखिरी पड़ाव में अनगिनत परेशानियों का सामना कर रहे हैं। फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं। हाल ही में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर देश भर में यात्रा की अनुमति मांगी है।

249 दिनों तक जेल में रहे

दरअसल, नरेश गोयल न्यूरो-एंडोक्राइन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से परामर्श लेना चाहते हैं। गोयल की बहन भी कैंसर से पीड़ित हैं, ऐसे में वह उनसे भी मिलना चाहते हैं। इस महीने की शुरुआत में उनके याचिका दायर करने की खबर सामने आई थी। 249 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद गोयल को 6 मई, 2024 को अंतरिम जमानत दी गई थी। गोयल ने 1 अप्रैल, 1992 को जेट एयरवेज की स्थापना की थी और 1993 में इसने अपना परिचालन शुरू किया।

---विज्ञापन---

वक्त ने ली करवट, जमीं पर जेट

गोयल ने दो बोइंग 737 के साथ जेट एयरवेज की शुरुआत की। महज थोड़े से समय में इस एयरलाइन ने भारतीय आसमान पर अपनी सफलता की कहानी लिखना शुरू कर दी थी। गोयल सफलता के आसमान पर थे, और इस ऊंचाई से उन्होंने कंपनी को लेकर सामने आ रहीं चिंताओं और आशंकाओं को महसूस करना और सुझावों पर गौर करना बंद कर दिया। फिर वक्त ने करवट ली और हवा से बातें करने वाली जेट एयरलाइन जमीन पर ऐसी आई कि वापस नहीं उड़ सकी। गोयल ने कड़ी मेहनत से जेट को आसमान में उड़ाया और वही इसे जमीं पर लाने की वजह भी बने।

टाटा ने दिखाई थी दिलचस्पी

जेट एयरवेज का कामकाज आर्थिक संकट के चलते 17 अप्रैल 2019 को बंद हो गया, लेकिन इसकी आहट बहुत पहले से सुनाई देने लगी थी। नरेश गोयल को भी इल्म था कि कुछ बहुत बुरा हो सकता है, मगर इसके बावजूद वह एक के बाद एक गलत फैसले लेते चले गए। संकट में घिरी जेट एयरवेज को बचाने के लिए फाइनेंशियल एडवाइजर्स ने गोयल को अपने कदम पीछे खींचने का सुझाव दिया था। उस दौर में टाटा ग्रुप ने भी जेट में निवेश को लेकर दिलचस्पी दिखाई, मगर गोयल नहीं मानें। मान जाते तो शायद हालात कुछ और होते।

---विज्ञापन---

डेल्टा का ऑफर भी ठुकराया

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कारोबार बंद करने से कुछ दिन पहले तक जेट एयरवेज को हर दिन करीब 21 करोड़ का नुकसान हो रहा था। 2017 में डेल्टा एयरलाइन ने भी जेट में कुछ हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। अबू धाबी की सरकारी एयरलाइन कंपनी एतिहाद पहले से ही जेट की पार्टनर थी, लेकिन अपनी स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद नरेश गोयल सौदेबाजी में उलझे रहे। डेल्टा ने गोयल को हिस्सेदारी खरीदने के लिए 300 रुपये प्रति शेयर का ऑफर दिया पर गोयल 400 रुपये प्रति शेयर से नीचे आने को तैयार नहीं थे। जबकि उस समय कंपनी के शेयर का भाव 400 रुपये से नीचे ही चल रहा था। जानकार मानते हैं कि यदि उस वक्त गोयल ने सही फैसला लिया होता, तो शायद जेट को बचाया जा सकता था।

आत्ममुग्ध हो गए थे गोयल

नरेश गोयल को करीब से जानने वाले बताते हैं कि सफलता के आसमान पर पहुंचने के बाद गोयल कुछ हद तक अहंकारी हो गए थे। वह अपने अलावा किसी को कुछ नहीं समझते थे। यहां तक कि जिनकी काबिलियत पर उन्हें खुद भरोसा था उनकी बातों को भी अनसुना कर दिया करते थे। वह इस भ्रम में थे कि जेट एयरवेज अकेले वही चला रहे हैं और उनके होते कंपनी को कुछ नहीं हो सकता। नरेश गोयल बातचीत में माहिर थे और इस वजह से कई परेशानियों से कंपनी को बाहर भी निकालकर लाये, लेकिन संकट को नजरंदाज करना और दूसरों की सलाह को अनुसना करना उन्हें बाद में बहुत भारी पड़ा।

40% मार्केट शेयर से 0%

2004 के दौर में भारतीय आकाश के 40% हिस्से पर अकेले जेट एयरवेज का कब्जा था, लेकिन जब नए खिलाड़ी बाजार में आए तो गोयल कंपनी को एक ऐसी डगर पर ले गए, जहां से आगे का रास्ता बेहद खराब था। इंडिगो और स्पाइस जेट को टक्कर देने के लिए नरेश गोयल पहले सस्ते की जंग में उलझे और फिर कर्ज का बोझ बढ़ाते गए। उन्होंने 2007 में 1450 करोड़ रुपये में एयर सहारा को खरीदा। जबकि सलाहकारों ने उन्हें इस डील से दूर रहने की सलाह दी थी। एयर सहारा को अपना बनाने के चलते जेट वितीय और कानूनी परेशानियों में घिर गई।

कर्ज में कंपनी पर नए विमान खरीदे

जेट एयरवेज जब स्टॉक मार्केट में लिस्ट हुई, तो माना जा रहा था कि कंपनी आईपीओ से मिला पैसा कर्ज का बोझ कम करने पर खर्च करेगी। लेकिन नरेश गोयल के कुछ और ही प्लान थे। 2012 में जब किंगफिशर बंद हुई, तो नरेश गोयल के पास विजय माल्या की गलतियों से सीखने का मौका था, मगर शायद उन्हें इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई। जेट के कर्ज में दबे होने के बावजूद उन्होंने 10 एयरबस A330 और बोइंग 777 प्लेन का ऑर्डर दे दिया। इतना ही नहीं, इन जहाजों में सीट भी कम रखीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्लोबल प्रैक्टिस में जहां ऐसे विमान में 400 सीटें होती हैं, वहीं जेट को मिले विमान में सिर्फ 308 सीटें थीं। इस वजह से कंपनी उम्मीद अनुरूप कमाई नहीं कर पाई और घाटे का बोझ बढ़ता गया।

8 सीटों ने बिगाड़ा कमाई का गणित

बताया जाता है कि जेट एयरवेज के विमानों में फर्स्टक्लास की 8 सीटें थीं, जिनसे कमाई बेहद कम होती जा रही थी। लिहाजा अधिकारियों ने उन्हें इन सीट्स को सामान्य सीट्स में बदलने की सलाह दी थी, मगर गोयल ने हमेशा की तरह इस सुझाव को भी अनसुना कर दिया। वह बार-बार सलाह और सुझावों पर नकारते रहे, फिर एक दिन ऐसा आया कि आसमान में उड़ान भरने वाले जेट के विमान जमीं पर खड़े रह गए। 17 अप्रैल 2019 जेट के लिए आसमान से बातें करने का आखिरी दिन था। इसके बाद कंपनी को फिर से जीवित करने की कोशिशें हुईं, लेकिन परवान नहीं चढ़ सकीं।

जांच, शिकंजा और जेल

जेट एयरवेज से जुड़े मामलों की जांच जब बढ़ी तो नरेश गोयल पर शिकंजा कसता गया। ED, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियां इस जांच में शामिल रहीं। CBI ने अपनी नरेश गोयल, उनकी पत्नी अनीता गोयल और जेट एयरवेज एयरलाइन के डायरेक्टर रहे गौरंग आनंद शेट्टी को आरोपी बनाया। गोयल को सितंबर 2023 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया। उन पर केनरा बैंक द्वारा जेट एयरवेज को दिए गए 538.62 करोड़ रुपये के लोन में हेराफेरी का आरोप लगा। गोयल को चिकित्सा आधार पर 6 मई, 2024 को अंतरिम जमानत दी गई। नरेश गोयल की पत्नी का कैंसर से निधन हो गया है और गोयल खुद गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे हैं।

अब कोई उम्मीद नहीं बची

यूएई के बिजनेसमैन मुरारी लाल जालान और लंदन की कंपनी कालरॉक कैपिटल (Kalrock Capital) के कंसोर्टियम ने जून 2021 में दिवालिया प्रक्रिया के तहत इस एयरलाइन को खरीदने पर सहमति जताई थी, तब यह उम्मीद बंधी कि जेट एयरवेज फिर से उड़ान भर सकती है। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं और अब इसकी कोई उम्मीद भी नहीं है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस के ऐसेट्स को बेचने का आदेश दे दिया था। इससे साफ है कि अब जेट एयरलाइन कभी दोबारा उड़ान नहीं भर पाएगी।

HISTORY

Edited By

Neeraj

First published on: Mar 31, 2025 04:54 PM

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

संबंधित खबरें