नई दिल्ली: अगर आपका कोई आइडिया एक बार फेल हो जाए, तो आप क्या करेंगे? शायद दोबारा कोशिश करेंगे। अगर 100 बार फेल हो जाए? तो शायद आप उस काम को हमेशा के लिए छोड़ देंगे। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि कोई इंसान एक ही प्रोजेक्ट में 5,000 से ज्यादा बार फेल होने के बाद भी लगा रहे?
यह अविश्वसनीय कहानी है ब्रिटेन के सबसे अमीर बिजनेसमैन और मशहूर आविष्कारक सर जेम्स डायसन (Sir James Dyson) की। आज डायसन (Dyson) ब्रांड के प्रीमियम और स्टाइलिश गैजेट्स पूरी दुनिया में धूम मचा रहे हैं, लेकिन इस कामयाबी के पीछे लगातार 5126 विफलताओं और कभी हार न मानने वाले हौसले का एक लंबा सफर है। जैसा कि डायसन खुद कहते हैं कि असफलता का मजा लो और उससे सीखो। आप सफलता से कभी कुछ नहीं सीखते।
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बचपन के संघर्ष ने सिखाया टिके रहना
2 मई 1947 को इंग्लैंड के नॉरफॉक में जन्मे जेम्स डायसन के सिर से महज 9 साल की उम्र में पिता का साया उठ गया था। इस बड़े झटके ने उन्हें बचपन में ही मानसिक रूप से बेहद मजबूत बना दिया। स्कूल के दिनों में वे लंबी दूरी की दौड़ (Long-Distance Running) के बेहतरीन खिलाड़ी थे। बाद में उन्होंने बताया कि इस खेल ने उन्हें सिखाया कि जब थकावट चरम पर हो, तब भी कैसे आगे बढ़ते रहना है।
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शुरुआत में कला (Art) की पढ़ाई करने वाले डायसन ने जब रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट में इंडस्ट्रियल डिजाइन को जाना, तो उन्हें अपनी जिंदगी का मकसद मिल गया। वे ऐसी चीजें बनाना चाहते थे जो दिखने में ही सुंदर न हों, बल्कि काम भी बेहतर करें।
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एक आम परेशानी से आया वो जादुई आइडिया
1970 के दशक के आखिरी सालों में जेम्स डायसन अपने घर के वैक्यूम क्लीनर से बेहद परेशान थे। जैसे ही वैक्यूम क्लीनर के अंदर का डस्ट बैग थोड़ा सा भरता, उसकी खींचने की ताकत (Suction Power) कम हो जाती थी। आम लोग इसे सामान्य बात मानकर छोड़ देते, लेकिन डायसन सोचने लगे कि क्या इसका कोई बेहतर विकल्प हो सकता है?
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लकड़ी की मिलों में धूल को हवा से अलग करने वाली इंडस्ट्रियल साइक्लोन टेक्नोलॉजी से प्रेरणा लेकर उन्होंने दुनिया का पहला बिना बैग वाला (Bagless) वैक्यूम क्लीनर बनाने की ठानी, जो कभी अपनी सक्शन पावर न खोए।
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5127वां प्रोटोटाइप और वो ऐतिहासिक पल
यह सफर किसी बुरे सपने जैसा था। डायसन को अपना पहला सफल मॉडल बनाने में 5 साल का लंबा वक्त लगा। इस दौरान उन्होंने एक दो नहीं, बल्कि पूरे 5127 प्रोटोटाइप (नमूने) बनाए। यानी वे 5126 बार फेल हुए!
डायसन अपनी इन नाकामियों पर कहते हैं कि मैंने सही डिजाइन पाने से पहले 5127 प्रोटोटाइप बनाए। उनमें से 5126 विफलताएं थीं, लेकिन मैंने हर एक गलती से कुछ न कुछ नया सीखा। इसी तरह मुझे आखिरी समाधान मिला। इसलिए मुझे फेल होने से डर नहीं लगता।
बड़ी कंपनियों ने दुत्कार दिया, पर खुद के दम पर रचा इतिहास
जब डायसन ने अपनी तकनीक को पूरी तरह तैयार कर लिया, तो असली चुनौती सामने आई। दुनिया की बड़ी वैक्यूम क्लीनर निर्माता कंपनियों ने उनके इस अनोखे आइडिया को ठुकरा दिया। कंपनियों को डर था कि अगर बिना बैग वाला वैक्यूम क्लीनर आ गया, तो रिप्लेसमेंट डस्ट बैग बेचने का उनका करोड़ों का मुनाफा बंद हो जाएगा।
लेकिन डायसन ने हार नहीं मानी। उन्होंने पहले अपनी तकनीक का लाइसेंस विदेशों में दिया और बाद में 1993 में खुद की कंपनी शुरू करके DC01 नाम से पहला कमर्शियल बैगलेस वैक्यूम क्लीनर बाजार में उतारा। यह देखते ही देखते ब्रिटेन में सबसे तेजी से बिकने वाला वैक्यूम क्लीनर बन गया।
2.4 लाख करोड़ रुपये का साम्राज्य और असफलता का जश्न
आज डायसन कंपनी सिर्फ वैक्यूम क्लीनर ही नहीं, बल्कि बिना पंख वाले अनोखे फैन (Bladeless Fans), एयर प्यूरीफायर, हैंड ड्रायर, प्रीमियम हेयर ड्रायर और रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर जैसे गैजेट्स बनाती है। 2025 की संडे टाइम्स रिच लिस्ट के अनुसार, सर जेम्स डायसन की कुल संपत्ति 20.8 अरब पाउंड (यानी करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये) है, जो उन्हें ब्रिटेन के सबसे अमीर लोगों में शुमार करती है।
इस मुकाम पर पहुंचने के बाद भी डायसन अपने वाशिंग मशीन और इलेक्ट्रिक कार जैसे फ्लॉप प्रोजेक्ट्स को हार नहीं, बल्कि सीखने का एक बेहतरीन जरिया मानते हैं। वे अपनी जेम्स डायसन फाउंडेशन के जरिए आज की युवा पीढ़ी को बिना डरे नए प्रयोग करने और इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।