इनकम टैक्स विभाग ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए नए ITR फॉर्म जारी कर दिए हैं। इस बार के बदलावों में जहाँ एक तरफ आम आदमी और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ डेटा के मिलान (Data Triangulation) को लेकर नियम और भी सख्त कर दिए गए हैं। अगर आप भी इस साल रिटर्न भरने जा रहे हैं, तो इन रोचक और महत्वपूर्ण बदलावों को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।
ITR-1 में बड़ी राहत: अब 2 घरों के मालिक भी भर सकेंगे आसान फॉर्म
अब तक के नियमों के अनुसार, यदि आपके पास एक से अधिक घर (House Property) होते थे, तो आपको जटिल ITR-2 फॉर्म भरना पड़ता था। लेकिन नए नियमों ने इस झंझट को खत्म कर दिया है । अब दो घर के मालिक भी सरल ITR-1 फॉर्म का उपयोग कर सकेंगे। हालांकि, अब Schedule House Property सेक्शन में आपको को-ओनरशिप (सह-स्वामित्व) का प्रतिशत और किराएदारों की पूरी जानकारी देनी होगी।
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राजनीतिक चंदा और चुनावी ट्रस्ट: अब पाई-पाई का देना होगा हिसाब
राजनीतिक दलों को चंदा देकर टैक्स छूट (Section 137, पुराना 80GGC) का दावा करने वालों के लिए अब पारदर्शिता और बढ़ गई है। आपको राजनीतिक दल का नाम, उनका PAN और दान की तारीख बतानी होगी। अब केवल नाम से काम नहीं चलेगा, आपको UPI रेफरेंस नंबर, बैंक ट्रांसफर विवरण (NEFT/RTGS) और IFSC कोड जैसे ट्रांजेक्शन लेवल के सबूत भी देने होंगे।
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F&O और इंट्राडे ट्रेडिंग: मुनाफे और टर्नओवर पर कड़ी निगरानी
शेयर बाजार के खिलाड़ियों, खासकर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) और इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए ITR-3 फॉर्म में नए फील्ड जोड़े गए हैं। पार्ट A-ट्रेडिंग अकाउंट में अब F&O और इंट्राडे ट्रेड से होने वाले टर्नओवर को अलग-अलग दिखाना होगा। ध्यान रहे, F&O इनकम को गैर-सट्टा व्यापारिक आय माना जाता है। आप इसके घाटे को सैलरी के अलावा किसी भी अन्य आय से एडजस्ट कर सकते हैं और समय पर रिटर्न भरने पर इसे अगले 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड भी कर सकते हैं。
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प्रोफेशनल और बिजनेस क्लास के लिए नया क्या?
ITR-4 (प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन): डॉक्टर, वकील और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स जैसे प्रोफेशनल्स को अब अपने इन्वेस्टमेंट (निवेश) का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। यह फॉर्म उन प्रोफेशनल्स के लिए है जिनकी सकल प्राप्तियां ₹75 लाख तक हैं और उन व्यापारियों के लिए जिनका टर्नओवर 2 करोड़ तक है।
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