आज 2 मार्च की सुबह भारतीय निवेशकों के लिए कुछ ऐसी रही, जिसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी. भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 91 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़कर नीचे गिर गया है. पिछले एक महीने में यह पहली बार है जब रुपया इस स्तर तक फिसला है. क्या आपको घबराने की जरूरत है? या यह सिर्फ एक अस्थायी झोंका है? आइए, इस वित्तीय उथल-पुथल को आसान भाषा में समझते हैं…

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क्यों फिसला रुपया?

इसका सीधा जवाब है - जियो-पॉलिटिकल टेंशन. मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने पूरी दुनिया के निवेशकों को डरा दिया है. जब दुनिया में अनिश्चितता होती है, तो निवेशक अपना पैसा सुरक्षित ठिकानों जैसे कि US डॉलर और सोना में लगाना शुरू कर देते हैं. इसी वजह से डॉलर की मांग अचानक बढ़ गई है और रुपया कमजोर हुआ है.

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RBI का ब्रह्मास्त्र: विदेशी मुद्रा भंडार
बाजार में खबर है कि रुपया जब 91 रुपये के पास पहुंचा, तो RBI ने अपना खजाना खोल दिया. 20 फरवरी तक के डेटा के अनुसार रिजर्व बैंक के पास $723.60 बिलियन का भारी-भरकम विदेशी मुद्रा भंडार है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI ने पिछले 10-15 दिनों में करीब $2 बिलियन के डॉलर बेचे हैं, ताकि रुपये की गिरावट को रोका जा सके.

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विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
जानकारों का मानना है क‍ि RBI आमतौर पर किसी एक फिक्स लेवल को टारगेट नहीं करता, लेकिन बाजार के सेंटीमेंट्स को सुरक्षित रखने के लिए वे साइकोलॉजिकल लेवल (जैसे 92 रुपये) की रक्षा जरूर करते हैं.

RBI की चतुर चाल
RBI सिर्फ ऑनशोर मार्केट में ही नहीं, बल्कि ऑफशोर (NDF) मार्केट में भी डॉलर बेच रही है. इसका मतलब है कि वे सट्टेबाजों (Speculators) को संदेश दे रहे हैं - ज्यादा चालाकी मत करो! RBI का मुख्य मकसद है रुपये में अचानक होने वाली तेज गिरावट को रोकना और सट्टेबाजी के कारण पैदा होने वाले पैनिक को नियंत्रित करना.

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अब आगे क्या होगा?
अगर रुपया 91 रुपये के नीचे है, तो अब अगला साइकोलॉजिकल सपोर्ट 92 रुपये का है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि RBI इस स्तर की रक्षा के लिए अपनी पूरी ताकत लगाएगा.

आम आदमी/निवेशक के लिए सबक:
अगर आप सोच रहे हैं कि क्या रुपया और गिरेगा? तो यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि मिडिल ईस्ट में ये तनाव कब तक चलता है. RBI के पास अभी फायरपावर (रिजर्व) बहुत है, इसलिए घबराने के बजाय स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी है.

रुपये की यह गिरावट डरावनी जरूर दिख रही है, लेकिन RBI का फॉरेक्स रिजर्व एक मजबूत ढाल की तरह खड़ा है. आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करेगी कि क्या यह तूफान जल्द थमेगा या लंबी पारी खेलेगा.