नई द‍िल्‍ली. भारत की अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन एक अलार्म बेल जैसा है. मिडिल ईस्ट के समंदर में मचे कोहराम और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने भारतीय रुपये को न केवल डरा दिया है, बल्कि उसे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उसके अब तक के सबसे निचले (रिकॉर्ड) स्तर पर धकेल दिया है. गुरुवार की सुबह जब बाजार की शुरुआत हुई, तो निवेशकों के चेहरे पर मायूसी साफ थी क्योंकि रुपया 92 के जादुई और नाजुक आंकड़े को पार कर चुका है. एक तरफ तेल की कीमतों में 10% का उछाल है, तो दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने बाजार की कमर तोड़ दी है.

लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि रुपया कितना गिरा है, बल्कि यह है कि इस गिरावट का आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, पेट्रोल के दाम और घर के बजट पर क्या असर पड़ेगा? आइए, इस रिपोर्ट में समझते हैं कि आखिर क्यों रुपया ग‍िर रहा है और इस आर्थिक सुनामी से निपटने की सरकार की क्या तैयारी है.

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रुपया कितना गिरा और क्यों?

आज सुबह जब बाजार खुला, तो रुपया 92.25 के स्तर पर था, लेकिन देखते ही देखते यह 92.36 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया. कल के मुकाबले यह करीब 31 पैसे की भारी गिरावट है.

क्‍यों कमजोर हो रहा है रुपया
ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 10% उछलकर $101 के पार पहुंच गई हैं. भारत अपनी 80% तेल जरूरतें आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ गई है. दूसरी ओर वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक डॉलर को सुरक्षित मान रहे हैं, जिससे दुनिया भर में डॉलर मजबूत और अन्य करेंसी कमजोर हो रही हैं.

वहीं घबराहट में विदेशी निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को ही भारतीय बाजार से 6267 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले. जब बाहर से पैसा निकलता है, तो रुपये पर दबाव और बढ़ जाता है.

इराक संकट और रुपये का कनेक्शन
रुपये के गिरने के पीछे इराक के तेल टैंकर पर हुआ हमला एक बड़ा कारण है. इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई रुकने का डर पैदा हो गया है. जब तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल खरीदती हैं, तो उन्हें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. चूंकि बाजार में डॉलर कम है और मांग ज्यादा, इसलिए रुपया कमजोर होता जा रहा है.

आम आदमी की जेब पर क्या असर होगा?
रुपये के कमजोर होने का मतलब है कि अब हमें विदेश से आने वाली हर चीज के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे. कच्चे तेल का आयात महंगा होने से आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं. इलेक्ट्रॉनिक आइटम, मोबाइल, लैपटॉप और विदेशों से आयात होने वाली अन्य चीजें महंगी हो सकती हैं. वहीं अगर आप विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं या विदेश घूमने का प्लान है, तो अब आपको हर डॉलर के लिए पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे.

क्या यह सिलसिला जारी रहेगा?
जानकारों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा. सरकार और RBI इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, लेकिन फिलहाल बाजार अनिश्चितता की गिरफ्त में है.