पासपोर्ट स्टेटस से जुड़ी मुख्य जानकारी:
- ECR का पूरा नाम इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड और ECNR का नाम इमिग्रेशन चेक नॉट रिक्वायर्ड होता है.
- 10वीं क्लास से कम पढ़े-लिखे भारतीय नागरिकों को मुख्य रूप से ECR कैटेगरी का पासपोर्ट जारी किया जाता है.
- 10वीं पास लोग, टैक्सपेयर्स, सरकारी नौकर और 50 साल से ऊपर के नागरिक सीधे तौर पर ECNR श्रेणी में आते हैं.
- नए भारतीय पासपोर्ट के सबसे आखिरी पन्ने पर ECR स्टेटस होने की स्थिति में साफ शब्दों में जानकारी प्रिंट होती है.
- अगर आपके पासपोर्ट पर कोई विशेष नोट नहीं लिखा है, तो उसे पूरी तरह से नॉन-ECR यानी ECNR माना जाता है.
ECR-ECNR Passport: भारतीय पासपोर्ट रखने वाले बहुत से लोगों के मन में अक्सर यह उलझन रहती है कि उनके पासपोर्ट पर लिखे ECR और ECNR शब्दों का असली मतलब क्या है. दरअसल, ECR का पूरा मतलब 'इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड' यानी आव्रजन जांच की जरूरत होता है, जबकि ECNR का मतलब 'इमिग्रेशन चेक नॉट रिक्वायर्ड' होता है, जिसे नॉन-ECR भी कहा जाता है. भारत सरकार ने इस पूरी व्यवस्था की शुरुआत विदेश जाने वाले भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा करने के लिए की थी. इसका मुख्य उद्देश्य कम पढ़े-लिखे या सीधे-साधे भारतीय मजदूरों को विदेशों के लेबर मार्केट में होने वाले शोषण, धोखाधड़ी, मानव तस्करी, फर्जी नियुक्तियों और खराब कामकाजी हालातों से बचाना है.
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किन लोगों को रखा गया है ECR और ECNR कैटेगरी में?
आमतौर पर जिन भारतीय नागरिकों ने 10वीं कक्षा यानी मैट्रिक की परीक्षा पास नहीं की है और वे किसी अन्य छूट वाली श्रेणी में भी नहीं आते हैं, उन्हें ECR स्टेटस वाला पासपोर्ट दिया जाता है. यह नियम मुख्य रूप से उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करता है जो कम शैक्षणिक योग्यता के कारण विदेशों में नौकरी ढूंढते समय आसानी से ठगी का शिकार हो सकते हैं. दूसरी तरफ, जिन लोगों ने 10वीं या उससे आगे की पढ़ाई पूरी कर ली है, उन्हें अपने आप नॉन-ECR या ECNR कैटेगरी में रखा जाता है. इसके अलावा आयकर दाता, सरकारी कर्मचारी, 50 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और 18 साल से कम उम्र के बच्चे भी ECNR यानी इस जांच के दायरे से बाहर की श्रेणी में आते हैं.
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क्या टूरिस्ट वीजा और घूमने फिरने पर भी पड़ता है इसका असर?
पासपोर्ट के इस स्टेटस को लेकर लोगों के बीच सबसे बड़ा भ्रम यह है कि क्या ECR पासपोर्ट होने पर विदेश घूमने जाने या पर्यटन पर कोई रोक होती है. आपको बता दें कि ECR पासपोर्ट होने से किसी भी व्यक्ति के विदेश घूमने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है. अगर आप किसी दूसरे देश में छुट्टियों पर जा रहे हैं, पढ़ाई करने जा रहे हैं, इलाज कराने जा रहे हैं या अपने परिवार से मिलने जा रहे हैं, तो आपको किसी भी तरह के इमिग्रेशन क्लीयरेंस यानी सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होती है. यह नियम केवल और केवल तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति काम या नौकरी करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा तय किए गए विशिष्ट ECR देशों की यात्रा करता है.
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कैसे चेक करें अपने पासपोर्ट का स्टेटस?
अपने पासपोर्ट का स्टेटस जानने का तरीका बेहद आसान है. पुराने पासपोर्ट बुकलेट में इसके बारे में पासपोर्ट के ऑब्जर्वेशन पेज पर अलग से लिखा जाता था. लेकिन सरकार द्वारा जारी किए जा रहे नए आधुनिक पासपोर्ट में यदि आपका स्टेटस ECR है, तो पासपोर्ट के सबसे आखिरी पेज पर साफ शब्दों में "Emigration Check Required" लिखा होता है. अगर आपके पासपोर्ट के आखिरी पन्ने पर ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपका पासपोर्ट नॉन-ECR यानी ECNR कैटेगरी का है. ऐसे पासपोर्ट धारकों को दुनिया के किसी भी देश में नौकरी करने जाने के लिए भारत सरकार के इमिग्रेशन विभाग से कोई अतिरिक्त मंजूरी या क्लीयरेंस लेने की जरूरत नहीं होती है.
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पासपोर्ट नियमों के बड़े फायदे और जरूरी बातें:
- शोषण से सुरक्षा: यह सिस्टम विदेशों में काम करने जाने वाले गरीब और कम पढ़े-लिखे कामगारों को फर्जी कॉन्ट्रैक्ट और वेतन न मिलने जैसी धोखाधड़ी से बचाता है.
- टूरिज्म पर कोई पाबंदी नहीं: ECR पासपोर्ट धारक बिना किसी सरकारी क्लीयरेंस के दुनिया के किसी भी देश में पर्यटन, इलाज या पढ़ाई के लिए आसानी से जा सकते हैं.
- काम के लिए क्लीयरेंस जरूरी: ECR पासपोर्ट वाले लोगों को तयशुदा देशों में सिर्फ नौकरी के वीजा पर जाने से पहले भारत सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है.
- स्टैम्प की जरूरत खत्म: अब आधुनिक भारतीय पासपोर्ट पर अलग से ECNR का स्टैम्प नहीं लगाया जाता है, बल्कि आखिरी पन्ने को देखकर ही स्टेटस पता चलता है.
- कागजी कार्रवाई से मुक्ति: ECNR या नॉन-ECR पासपोर्ट धारकों को विदेश में रोजगार के लिए जाते समय किसी भी अतिरिक्त आव्रजन जांच की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता है.