भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक शर्तों को अंतिम रूप देने में हो रही देरी की वजहें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। हाल ही में अमेरिकी सीनेटर और नीति निर्माताओं की ओर से आए बयानों ने साफ कर दिया है कि एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी यह डील अभी तक क्यों अधर में लटकी हुई है।
साल 2025 में शुरू हुई थी औपचारिक बातचीत
याद दिला दें कि भारत और अमेरिका ने पिछले साल 13 फरवरी 2025 को औपचारिक रूप से इस व्यापार समझौते के लिए बातचीत का आगाज किया था। दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए इस डील को बेहद अहम माना जा रहा था।
इसके बाद रफ्तार दिखाते हुए 7 फरवरी 2026 को दोनों पक्षों ने एक अंतरिम समझौते (Interim Deal) के लिए ढांचा तैयार करने की आधिकारिक घोषणा भी कर दी थी। लेकिन, इस ढांचे के एलान के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच अंतिम शर्तें तय नहीं हो पाई हैं, जिसके चलते यह समझौता फाइलों में ही दबा हुआ है।
यह भी पढ़ें : 24 June Gold Rate: 1.44 लाख के भाव पर पहुंचा सोना, सुबह-सुबह 2000 से ज्यादा गिरे दाम; चांदी और सस्ती हुई
आखिर कहां फंसा है पेंच? (Key Sticking Points)
अमेरिकी सीनेटरों और व्यापार प्रतिनिधियों (जैसे जेमिसन ग्रीर) के हवाले से सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत के आगे न बढ़ पाने के पीछे कई कड़े नीतिगत मुद्दे हैं, जिन पर दोनों देश झुकने को तैयार नहीं हैं।
एग्रीकल्चर मार्केट (कृषि क्षेत्र): अमेरिका लगातार भारत से मांग कर रहा है कि वह अपने डेयरी प्रोडक्ट्स और चुनिंदा कृषि उत्पादों के बाजार को अमेरिकी आयात के लिए खोले। वहीं, भारत अपने स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस पर बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है।
यह भी पढ़ें : LPG Gas New Rules: एलपीजी-पीएनजी कनेक्शन के लिए लागू हुए नए 30 और 90 दिनों के नियम! जानें नए बदलाव
टैरिफ और इम्पोर्ट ड्यूटी: अमेरिका भारत द्वारा कुछ खास सामानों पर लगाए जाने वाले उच्च आयात शुल्क (High Tariffs) को कम कराना चाहता है, जबकि भारत अपनी मेक इन इंडिया नीति के तहत घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना चाहता है।
डिजिटल ट्रेड और डेटा लोकलाइजेशन: ई-कॉमर्स नियमों और भारतीय नागरिकों के डेटा को देश के भीतर ही स्टोर करने (Data Localization) के नियमों को लेकर भी अमेरिकी टेक कंपनियों और भारत सरकार के बीच मतभेद बरकरार हैं।
भारतीय पक्ष का क्या है रुख?
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले भी कई मौकों पर स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत किसी भी देश के साथ व्यापार समझौता करते समय अपने राष्ट्रीय हितों, छोटे व्यापारियों और किसानों के लाभ से समझौता नहीं करेगा। भारत एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभप्रद (Win-Win) सौदा चाहता है, न कि ऐसा समझौता जो केवल एक पक्ष के हितों की पूर्ति करे।
विशेषज्ञों का मानना है कि 7 फरवरी 2026 को तैयार हुए अंतरिम ढांचे के बाद कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देशों के घरेलू राजनीतिक और आर्थिक दबावों के कारण गति काफी धीमी है। जब तक दोनों पक्ष कुछ संवेदनशील मुद्दों पर बीच का रास्ता नहीं निकालते, तब तक इस समझौते पर अंतिम मुहर लगना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
संबंधित खबरें
क्या बंद हो जाएंगे 10, 20 और 50 के नोट? सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सर्कुलर
1 hr agoट्रंप की हार का भारत पर क्या होगा असर? ट्रेड डील से वीजा तक जानें सबकुछ
2 hrs agoमोदी सरकार दे रही है UPI लिंक्ड 30,000 रुपये का क्रेडिट कार्ड, ऐसे उठाएं ला
2 hrs agoसुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा राज्यों को अतिरिक्त सेल्स टैक्स लगाने का अधिकार
2 hrs agoRBI ने एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट के फॉरेक्स नियमों में दी छूट, जानें नए नियम
3 hrs ago8वां वेतन आयोग लागू होने पर कितना मिलेगा एरियर? समझें पूरा कैलकुलेशन
3 hrs agoअमूल घी और मक्खन के बढ़े दाम, जानें 1KG घी का नया रेट
3 hrs agoधनतेरस से 2 दिन पहले सोना 1.40 लाख के पार, चांदी 2 लाख पर; जानें आज का भाव
5 hrs agoपाकिस्तान में 7000 रुपये का हुआ 12KG गैस सिलेंडर! खाने के लाले पड़े
5 hrs agoनवंबर में जरूर निपटा लें यह 1 काम, वरना दिसंबर से रोक दी जाएगी पेंशन
6 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines