अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने पर भारत ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नया कदम उठाया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से रूस से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) खरीदने के लिए छूट की मांग की है. सूत्रों का कहना है कि भारत और रूस ने यूक्रेन संघर्ष के बाद पहली बार LNG आपूर्ति फिर शुरू करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
भारत और रूस के बीच हो रही डील पर चर्चा!
दो सूत्रों ने बताया कि अगर यह सौदा आगे बढ़ा, तो चर्चाएं कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप ले सकती हैं. हालांकि इस फैसले से पश्चिमी प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है. यह समझौता 19 मार्च को नई दिल्ली में रूसी उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन और भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई बैठक में हुआ. एक सूत्र ने कहा कि घरेलू ऊर्जा आयातकों को रूसी एलएनजी खरीद फिर शुरू करने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है. भारत ने अमेरिका से भी प्रतिबंध छूट की संभावना तलाशी है.
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होर्मुज संकट के बाद सरकार उठाने वाली है कदम
यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति बाधित होने के बाद उठाया गया है. केपलर के अनुमान से, युद्ध शुरू होने के बाद फरवरी अंत से भारत ने रूस से 50-60 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीद चुका है. अमेरिका ने वैश्विक तेल मूल्यों को नियंत्रित रखने के लिए भारत को रूसी कच्चे तेल खरीद पर 30 दिनों की छूट दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत कई देशों से बातचीत कर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है. हालांकि, रसोई गैस के लिए इस्तेमाल होने वाला रूसी एलपीजी पहले से ही प्रतिबंधों से मुक्त है और भारत आयात जारी रखे हुए है.
मध्य पूर्व संघर्ष के बाद दुनिया के सामने 'ईंधन संकट'
मध्य पूर्व संघर्ष ने वैश्विक LNG बाजार को हिला दिया है. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने और कतर की तरलीकरण इकाइयों पर हमलों से आपूर्ति चेन प्रभावित हुई है, जो वैश्विक एलएनजी व्यापार का 20 प्रतिशत संभालता है. प्रभावित सुविधाओं को बहाल होने में 3 से 5 वर्ष लग सकते हैं, जिससे सालाना 12.8 मिलियन टन क्षमता प्रभावित हो रही है. एसएंडपी ग्लोबल, आईसीआईएस, केपलर और राइस्टाड एनर्जी जैसे विश्लेषकों ने वैश्विक आपूर्ति अनुमान 35 मिलियन टन तक घटा दिए हैं. यह कमी 500 एलएनजी कार्गो के बराबर है, जो जापान की सालाना जरूरत का आधा या बांग्लादेश की पांच वर्ष की मांग पूरी कर सकती है.
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