ग्लोबल ट्रेड की बिसात पर इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची है। एक तरफ अमेरिका की कड़े टैरिफ वाली नीतियां दुनिया भर के एक्सपोर्ट बास्केट को प्रभावित कर रही हैं, तो दूसरी तरफ भारत शांति से अपने लिए नए और सुरक्षित बाजार तैयार कर रहा है। यूके, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के साथ हालिया डील्स के बाद, भारत ने मिडिल ईस्ट में एक और बड़ा दांव खेला है। आज यानी 1 जून, 2026 से भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पूरी तरह प्रभावी हो गया है। पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित इस ऐतिहासिक डील को लेकर वित्त मंत्रालय ने रविवार को ड्यूटी रियायतों का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।
लेकिन यह सिर्फ एक और सरकारी समझौता नहीं है। यह भारत के छोटे उद्योगों (MSMEs), कपड़ा व्यापारियों, इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए सीधे मुनाफे का नया रूट है। आइए आसान भाषा में डिकोड करते हैं कि इस भव्य डील से किसकी किस्मत चमकने वाली है।
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99.38% भारतीय एक्सपोर्ट पर शून्य टैक्स: ओमान का मास्टरस्ट्रोक
इस समझौते की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि ओमान ने अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों पर जीरो-ड्यूटी एक्सेस देने का फैसला किया है। वैल्यू के लिहाज से देखें तो ओमान जाने वाले भारत के 99.38% निर्यात को इसका सीधा फायदा मिलेगा। यानी भारतीय सामान अब ओमान के बाजार में बिना किसी सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) के प्रवेश करेगा, जिससे हमारी निर्यात प्रतिस्पर्धा (Export Competitiveness) में भारी उछाल आएगा।
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इन भारतीय सेक्टर्स की लगेगी लॉटरी:
रत्न और आभूषण (सूरत, गुजरात): सीधे ओमान के अमीर खरीदारों तक बिना टैक्स की पहुंच।
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रेडीमेड कपड़े और टेक्सटाइल (तिरुपुर, तमिलनाडु और भदोही, यूपी): लेबर-फोकस्ड टेक्सटाइल सेक्टर के लिए यह संजीवनी की तरह है।
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इंजीनियरिंग उत्पाद (पुणे, महाराष्ट्र): भारतीय हैवी और लाइट इंजीनियरिंग गुड्स को बड़ा बाजार मिलेगा。
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फुटवियर और चमड़ा (कानपुर-आगरा, यूपी और वेल्लोर, तमिलनाडु): छोटे और मध्यम उद्योग अब ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनेंगे।
फार्मा और मेडिकल उपकरण: भारतीय दवाइयों के लिए ओमान के नियम अब बेहद सुलभ होंगे।
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए खुशखबरी: कोटा और वीजा अवधि दोनों बढ़े
यह डील सिर्फ सामान के लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के सर्विस सेक्टर और स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए भी एक बड़ा जैकपॉट है। ओमान ने भारतीय टैलेंट को अपने यहां बुलाने के लिए नियमों को बेहद आसान कर दिया है:
इन्फ्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरी कोटा: ओमान ने इसे 20% से बढ़ाकर सीधे 50% कर दिया है। यानी भारतीय कंपनियां अब अपनी ओमान शाखाओं में ज्यादा भारतीय कर्मचारियों को आसानी से ट्रांसफर कर सकेंगी।
कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस प्रोवाइडर्स: काम के सिलसिले में ओमान जाने वाले प्रोफेशनल्स के लिए रुकने की अवधि को 90 दिनों से बढ़ाकर सीधे 2 साल कर दिया गया है, जिसे अगले 2 साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है।
आईटी और अन्य सर्विसेज: कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना के आईटी प्रोफेशनल्स के अलावा अकाउंटेंसी, टैक्सेशन, आर्किटेक्चर और मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए ओमान में एंट्री और रेजिडेंस की शर्तें बेहद आसान हो गई हैं।
किसानों और लघु उद्योगों को क्या मिला?
कृषि क्षेत्र में इस समझौते से निर्यात को जबरदस्त बूस्ट मिलने की उम्मीद है। भारत के ग्रामीण इलाकों और कृषि प्रधान राज्यों के लिए रास्ते खुले हैं:
मीट और लाइवस्टॉक: यूपी, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र के पशुपालकों को नया बाजार मिलेगा।
शहद और कन्फेक्शनरी: पंजाब, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तर-पूर्व के शहद उत्पादकों के साथ-साथ कर्नाटक और यूपी के लघु उद्योगों (चीनी कन्फेक्शनरी और बिस्कुट) का एक्सपोर्ट बढ़ेगा।
भारत का क्या है फायदा? एनर्जी सिक्योरिटी और सतर्कता
भारत ने भी ओमान को अपनी 77.79% टैरिफ लाइनों पर शुल्क छूट दी है, जो ओमान से होने वाले 94.81% आयात को कवर करती है。 बैंक ऑफ बड़ौदा की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील से भारत के तेल आयात का बिल कम करने और देश की एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) को मजबूत करने में मदद मिलेगी。
सख्त पहरेदारी: हालांकि, सरकार पूरी तरह सतर्क है। वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि किसी तीसरे देश का सामान ओमान के रास्ते भारत में ड्यूटी-फ्री न आ सके, इसके लिए आयातकों को सख्त रूप से 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' (यह साबित करना कि सामान ओमान में ही बना है) का पालन करना होगा। साथ ही सोना-चांदी, आभूषण, डेयरी उत्पाद, चाय, कॉफी और रबर जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को भारत ने इस छूट से पूरी तरह बाहर रखा है ताकि घरेलू उत्पादकों को कोई नुकसान न हो।