नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्रांति में जियो को केंद्र में रखते हुए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया. मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो मिलकर अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे. यह निवेश एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर्स और घरेलू एआई मॉडल विकसित करने में खर्च किया जाएगा. यह निवेश भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी तस्वीर बदल देगा.यह सट्टेबाजी वाला निवेश नहीं है, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के लिए अनुशासित पूंजी है, जो दशकों तक स्थायी आर्थिक मूल्य और रणनीतिक मजबूती पैदा करेगी.
एआई का सर्वश्रेष्ठ दौर अभी आना बाकी
अंबानी ने समिट में संबोधन के दौरान एआई के भविष्य पर जोर देते हुए कहा कि एआई का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है. यह तकनीक भारत में अत्यधिक समृद्धि और अवसरों का नया युग ला सकती है. उन्होंने दुनिया में चल रही बहस का जिक्र किया कि क्या एआई से ताकत कुछ लोगों के हाथों में सिमट जाएगी या यह सभी के लिए अवसरों का माध्यम बनेगा. मुकेश अंबानी ने भारत को 21वीं सदी की एआई महाशक्ति बनाने का संकल्प दोहराते हुए इसे रिलायंस का अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक दांव बताया है.
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एआई से नहीं जाएंगी नौकरियां
मार्केट में एआई के कारण होने वाली छंटनी के डर पर बात करते हुए अंबानी ने कहा कि एआई काम को खत्म नहीं करेगा, बल्कि यह उच्च-कौशल वाले रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा. उन्होंने विश्वास जताया कि एआई भारत के युवा टैलेंट को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा.
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मुकेश अंबानी ने दिया संदेश
मुकेश अंबानी ने कहा कि आज दुनिया एआई को लेकर दोराहे पर खड़ी है. एक रास्ता महंगे और नियंत्रित डेटा वाले एआई की ओर जाता है, जबकि दूसरी तरफ रिलायंस का विजन है, किफायती और सुलभ एआई, जो हर भारतीय को सशक्त बनाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि रिलायंस का लक्ष्य एआई को केवल अमीरों की तकनीक न रखकर, इसे भारत के हर नागरिक तक पहुंचाना है. जिस तरह कंपनी ने मोबाइल डेटा की लागत को काफी कम किया था, उसी तरह अब 'एआई इंफरेंसिंग' की लागत भी कम की जाएगी. अंबानी ने जोर दिया कि भारत एआई को किराए पर नहीं ले सकता. उनका लक्ष्य है कि इंटेलिजेंस को कनेक्टिविटी जितना सर्वव्यापी और किफायती बनाया जाए.