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जमके बनाओ और टूटकर खाओ! महंगाई ने छोड़ दिया किचन का रास्‍ता, सस्‍ती हो गई घर की थाली

भारत में घर पर पकाई जाने वाली थाली की कीमतों में अक्टूबर में भारी गिरावट देखी गई. शाकाहारी थाली में 17% और नॉन-वेज ऑप्‍शन में साल-दर-साल 12% की गिरावट आई. यह गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों और दालों की कीमतों में भारी गिरावट के कारण हुई.

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फोटो क्रेड‍िट- AI Gemini

Homecooked Food Get Cheaper : क्रिसिल इंटेलिजेंस ने हाल ही में अपनी लेटेस्‍ट रोटी राइस रेट (RRR) जारी की है. इस र‍िपोर्ट में ये कहा गया है क‍ि अक्टूबर में भारत में घर पर बनी थालियों की कीमतों में गिरावट आई है. ये ग‍िरावट न केवल वेज थाली में दर्ज की गई है, बल्‍क‍ि नॉनवेज थालियों की कीमतों में भी कमी देखी गई है. घर में बनी वेज थाली की कीमत में 17% और नॉनवेज थालियों की कीमतों में साल-दर-साल 12% की गिरावट आई है.

क्‍यों घट गई कीमत?
दरअसल, इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण सब्जियों और दालों की कीमतों में भारी गिरावट है. सब्जियों में आलू, टमाटर और प्याज में सबसे अधिक गिरावट देखी गई. आलू की कीमतों में 31% की गिरावट आई, जिसे 2024-2025 के लिए रबी सीजन के उत्पादन में 3-4% की वृद्धि का समर्थन प्राप्त है.

पश्चिमी और दक्षिणी बाजारों से अधिक आपूर्ति के कारण टमाटर की कीमतों में 40% की गिरावट आई, जबकि प्याज की कीमतों में 51% की गिरावट आई, जो पिछले रबी सीजन के पर्याप्त स्टॉक और कम निर्यात को द‍िखाता है.

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एएनआई के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है क‍ि नवंबर में खरीफ की नई आवक की उम्मीद में व्यापारी रबी सीजन का स्टॉक बेच रहे हैं. दालों की कीमतों में भी नरमी आई, आयात बढ़ने से 17% की गिरावट आई. पिछले वित्त वर्ष में बंगाल चना का आयात नौ गुना, पीली मटर का 85% और काले चने का 31% बढ़ा, जिससे थाली की लागत पर दबाव कम हुआ.

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हालांकि, सभी सामग्रियां सस्ती नहीं हुईं. त्योहारी सीज़न की मांग के कारण वनस्पति तेल की कीमतों में 11% की वृद्धि हुई और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमतों में साल-दर-साल 6% की वृद्धि हुई, जिससे थाली की कुल लागत में और कमी नहीं आई.

मांसाहारी थालियों में मामूली गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि ब्रॉयलर की कीमतों में साल-दर-साल केवल 6% की गिरावट आई. रिपोर्ट में कहा गया है क‍ि ब्रॉयलर थाली की लागत का लगभग आधा हिस्सा होते हैं. हालांकि, सब्जियों और दालों की कम कीमतों ने कुल लागत को कम करने में मदद की.

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मासिक आधार पर, थाली की लागत में मामूली कमी आई, शाकाहारी थालियों के लिए 1% और मांसाहारी थालियों के लिए 3%, जबकि प्याज और टमाटर की कीमतों में क्रमशः 3% और 8% की गिरावट आई. अधिक आपूर्ति के बीच ब्रॉयलर की कीमतों में भी महीने-दर-महीने 4% की गिरावट आई, जिससे मांसाहारी थाली की लागत में मामूली कमी आई.

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भारत की खुदरा मुद्रास्फीति स्थिर रही, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) ने सितंबर 2025 में 1.54% की मुख्य दर दिखाई, जो जून 2017 के बाद सबसे कम है. यह मंदी मुख्यतः अनुकूल आधार प्रभावों और सब्जियों, तेल और वसा, फलों, दालों, अनाज और उत्पादों, अंडों, और ईंधन एवं प्रकाश की कीमतों में कमी के कारण हुई.

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अक्टूबर के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े इस सप्ताह के अंत में आने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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