HDFC Latest Update : बैंकिंग सेक्टर के पोस्टर बॉय माने जाने वाले HDFC Bank के लिए पिछला क्वार्टर (जनवरी-मार्च 2026) किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। जहां एक तरफ शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बैंक से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने मार्च तिमाही में HDFC Bank में अपनी 35,000 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी बेच दी है। आइए समझते हैं कि इस भारी बिकवाली के पीछे की असली वजह क्या है और क्या आपको अब भी इस स्टॉक पर भरोसा करना चाहिए।
आंकड़ों की जुबानी: भारी बिकवाली का खेल
विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा डिगना इस बार साफ नजर आ रहा है। FIIs की हिस्सेदारी 47.67% से घटकर 44.05% रह गई है। यानी करीब 47.95 करोड़ शेयर बेचे गए हैं। दिसंबर 2025 में जहां 2757 FIIs बैंक में निवेशित थे, वहीं मार्च के अंत तक यह संख्या घटकर 2528 रह गई। इस तिमाही में बैंक के शेयर की कीमत में 26.2% की भारी गिरावट आई है, जो मार्च 2020 (लॉकडाउन) के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है।
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क्यों डरे हुए हैं निवेशक?
चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का अचानक इस्तीफा देना सबसे बड़ा झटका रहा। उन्होंने अपने इस्तीफे में पिछले दो वर्षों की कुछ घटनाओं और प्रथाओं का जिक्र किया जो उनके मूल्यों के अनुरूप नहीं थीं। इसने बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस (आंतरिक शासन) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं दूसरी ओर सेबी (SEBI) अब चेयरमैन के इस्तीफे वाले पत्र की समीक्षा कर रहा है। इसके अलावा, पहले भी RBI द्वारा क्रेडिट कार्ड बिजनेस पर रोक और HDFC Ltd के साथ विलय (Merger) के बाद मार्जिन पर पड़ रहे दबाव ने निवेशकों को चिंतित कर रखा है। बॉन्ड सेल्स में कर्मचारियों के दुर्व्यवहार और Additional Tier 1 (AT1) बॉन्ड की गलत तरीके से बिक्री (Mis-selling) के आरोपों ने भी बैंक की छवि को नुकसान पहुंचाया है।
घरेलू निवेशकों का फेविकोल जैसा भरोसा
जहां विदेशी भाग रहे हैं, वहीं भारतीय निवेशकों ने मोर्चा संभाल रखा है। इन्होंने लगातार 5वीं तिमाही में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है और 28293 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। प्रोविडेंट फंड और इंश्योरेंस में भी क्रमश: ₹2239 करोड़ और ₹256 करोड़ का निवेश हुआ है। हालांकि, LIC ने इस दौरान ₹969 करोड़ के शेयर बेचे हैं।
क्या अब खरीदने का मौका है?
जानकारों को भरोसा है कि यह केवल एक अस्थायी दौर है और जल्द ही रिकवरी होगी। लेकिन, रिटेल निवेशकों के लिए सलाह यही है कि जब तक गवर्नेंस (Governance) से जुड़े विवाद पूरी तरह साफ नहीं हो जाते, तब तक इस स्टॉक में बड़ी खरीदारी करने से पहले सावधानी बरतें।