मुंबई: सप्ताह का आखिरी दिन और दलाल स्ट्रीट पर मातम पसर गया है. शुक्रवार की शाम जब बाजार बंद हुआ, तो निवेशकों के पोर्टफोलियो से लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके थे. सेंसेक्स का 1470 अंकों का गोता और निफ्टी का 23200 के स्तर से नीचे गिरना, यह महज एक गिरावट नहीं, बल्कि एक ब्लैक फ्राइडे था. मिडिल ईस्ट की आग ने बाजार में जो धुआं उठाया है, उससे निवेशकों की सांसें फूल रही हैं. आखिर यह गिरावट कहां जाकर थमेगी और क्या आपका निवेश अभी सुरक्षित है? आइए, समझते हैं बाजार के इस सुनामी वाले दिन का पूरा गणित.
बाजार का खूनी क्लोजिंग
दिन भर की भारी उठापटक के बाद बाजार इन स्तरों पर बंद हुआ. सेंसेक्स (Sensex) 1470.50 अंक (1.93%) की भारी गिरावट के साथ 74563.92 पर बंद हुआ. निफ्टी (Nifty) 488.05 अंक (2.06%) लुढ़ककर 23,151.10 के स्तर पर सिमट गया.
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बाजार की यह गिरावट इतनी व्यापक थी कि निफ्टी के सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए. यह पिछले 15 महीनों में सेंसेक्स और निफ्टी की सबसे खराब साप्ताहिक परफॉरमेंस में से एक मानी जा रही है.
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गिरावट के पीछे के विलेन
मिडिल ईस्ट का ज्वालामुखी: ईरान-इजरायल तनाव के बीच कच्चे तेल (Brent Crude) का $100 के पार पहुंचना निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है. इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों की इकोनॉमी पर सीधा प्रहार हो रहा है.
विदेशी निवेशकों (FIIs) की धुंआधार बिकवाली: आज भी एफआईआई ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालने की होड़ लगा दी, जिससे लार्ज-कैप और ब्लू-चिप शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई.
रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपया 92.37 के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर है. डॉलर की मजबूती ने विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए भारत में निवेश को महंगा बना दिया है.
महंगाई का डर: कच्चे तेल में उछाल का असर आने वाले समय में महंगाई (Inflation) बढ़ने के रूप में दिखेगा, जिससे रिजर्व बैंक और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले प्रभावित हो सकते हैं.
निवेशकों के लिए महा-संकट
आज के सत्र में ऑटो, बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों की बुरी तरह पिटाई हुई. बाजार में डर का माहौल इतना गहरा है कि निवेशक हर उछाल पर मुनाफावसूली (Profit Booking) कर रहे हैं. बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक बाजार में वोलेटिलिटी (अस्थिरता) बनी रहेगी. निफ्टी के लिए अब 23000 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट की तरह काम करेगा. अगर यह स्तर टूटा, तो बाजार और नीचे जा सकता है.
शुक्रवार की यह क्लोजिंग निवेशको के लिए एक बड़ा सबक है. ग्लोबल अनिश्चितता के दौर में एग्रेसिव होने के बजाय कॉशस (सतर्क) रहना ही समझदारी है. सोमवार को बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेतों और ग्लोबल सेंटीमेंट्स पर टिकी होगी.