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GST 2.0 में कारोबारियों को बड़ी राहत की तैयारी, अब सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगे टैक्स अफसर, कोर्ट की मंजूरी होगी जरूरी

GST Law Changes: जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में कारोबारियों को बड़ी राहत मिल सकती है. अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार वापस लेने और कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य करने पर विचार चल रहा है. साथ ही आपराधिक मुकदमे की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की जा सकती है.

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जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक टली: अब 12 सितंबर नहीं, 7 अक्तूबर को होगी मीटिंग; जानिए वजह (फोटो क्रेड‍िट- एआई)

GST Law Changes: देश के कारोबारियों और करदाताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है. सरकार GST 2.0 ढांचे में एक बड़ा और ऐतिहासिक सुधार करने की तैयारी में है. इसके तहत GST अधिकारियों से सीधे गिरफ्तारी करने की ताकत वापस लेने और आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. आगामी 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक में इन बड़े प्रस्तावों पर चर्चा की जा सकती है. अगर इस प्रस्ताव पर मुहर लगती है, तो टैक्स अफसर कमिश्नर की मंजूरी लेकर सीधे किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे; इसके लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य होगी.

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सीधे जेल नहीं, वसूली और जुर्माने पर जोर

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान नियमों के तहत फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), टैक्स चोरी या गलत रिफंड के गंभीर मामलों में कमिश्नर की अनुमति से गिरफ्तारी का प्रावधान है. नए प्रस्ताव के मुताबिक अधिकारियों की यह सीधी शक्ति खत्म करने की तैयारी है. हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं होगा कि टैक्स चोरी करने वालों को छूट मिल जाएगी. बकाया टैक्स, ब्याज और जुर्माने की पूरी वसूली पहले की तरह जारी रहेगी. इसका मुख्य उद्देश्य छोटे और तकनीकी विवादों में व्यापारियों पर सीधे आपराधिक कार्रवाई करने के बजाय आर्थिक दंड के जरिए समाधान निकालना है.

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सीधे किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे अफसर

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह बदलाव लागू होता है तो टैक्स अफसर कमिश्नर के आदेश पर सीधे किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे, बल्कि इसके लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य होगी. फिलहाल केंद्रीय CGST कानून की धारा 69 के तहत तय शर्तों और गंभीर मामलों में टैक्स कमिश्नर की मंजूरी लेकर सीधे गिरफ्तारी की जा सकती है. काउंसिल अब इस पूरी प्रक्रिया को अदालत के अधीन लाने पर विचार कर रही है.

आपराधिक मुकदमे की सीमा अब ₹5 करोड़

काउंसिल के सामने दूसरा सबसे बड़ा प्रस्ताव आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा को बढ़ाने का है. अब तक 1 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी पर आपराधिक केस दर्ज किया जा सकता था, जिसे बढ़ाकर अब 5 करोड़ रुपये करने की तैयारी है. यानी 5 करोड़ रुपये से कम के मामलों में आपराधिक कार्रवाई के बजाय सिविल पेनाल्टी और टैक्स रिकवरी के जरिए ही मामले सुलझाए जाएंगे.

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सामान्य विवादों में जेल नहीं, केवल जुर्माना

इस नए कदम से रोजमर्रा के सामान्य टैक्स विवादों को आपराधिक श्रेणी से बाहर रखा जा सकेगा. अक्सर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), वैल्यूएशन या नियमों की अलग-अलग व्याख्या को लेकर व्यापारी और टैक्स विभाग के बीच मतभेद हो जाते हैं. नए सुधारों का मकसद ऐसे तकनीकी विवादों को कोर्ट-कचहरी और जेल से दूर रखकर आर्थिक जुर्माने व रिकवरी तक सीमित रखना है, ताकि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिल सके.

24 अपराधों की समीक्षा और तकनीक से निगरानी

प्रस्ताव में कुल 24 अपराधों की समीक्षा शामिल है, जिनमें से 9 अपराधों को नियमों से पूरी तरह हटाने और मध्यम श्रेणी के अपराधों में सजा को 3 साल से घटाकर 2 साल करने का विचार है. इसके अलावा, छोटे व्यापारियों की लेट फीस माफ करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट व रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा होगी. सरकार का मानना है कि अब जीएसटी का डिजिटल सिस्टम इतना मजबूत हो चुका है कि खरीद-बिक्री के डेटा मिलान से फर्जी बिल पहले ही पकड़े जा सकते हैं. ऐसे में अधिकारियों के मनमाने एक्शन के बजाय तकनीक के दम पर पारदर्शिता लाने की तैयारी है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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