शेयर बाजार और कीमती धातुओं में मची उथल-पुथल के बीच बेस मेटल्स (Base Metals), खासकर कॉपर में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है. कॉपर को डॉक्टर कॉपर (Dr. Copper) भी कहा जाता है क्योंकि इसकी कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था की सेहत का सटीक पैमाना मानी जाती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि साल 2026 का साल कॉपर के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है. जहां सोना-चांदी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) पर चलते हैं, वहीं कॉपर भविष्य की तकनीक (Future Tech) पर टिका है. अगर आप लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं, तो पोर्टफोलियो में थोड़ा लाल सोना शामिल करना बुरा ख्याल नहीं होगा. आइये आज 25 फरवरी 2026 को कॉपर के ताजा भाव और इसमें निवेश के फायदे-नुकसान को समझते हैं:
आज का ताजा भाव (MCX Copper Rate)
आज सुबह के सत्र में कॉपर की कीमतों में मजबूती बनी हुई है.
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MCX कॉपर (27 Feb Expiry): ₹1,178.00 प्रति किलो (लगभग 0.82% की बढ़त).
पिछले बंद का भाव: 1,168.45 रुपये
आज का हाई (High): 1,185.00 रुपये के करीब
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क्यों बढ़ रही है कॉपर की रफ्तार?
सोने और चांदी जहां सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में देखे जाते हैं, वहीं कॉपर की मांग औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी है.
EV और रिन्यूएबल एनर्जी: एक इलेक्ट्रिक कार में सामान्य कार के मुकाबले 3-4 गुना ज्यादा कॉपर इस्तेमाल होता है. सोलर पैनल और विंड टर्बाइन में भी इसकी भारी खपत है.
AI और डेटा सेंटर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए बनने वाले विशाल डेटा सेंटर्स में बिजली की आपूर्ति के लिए कॉपर का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है.
सप्लाई में कमी: चिली और पेरू जैसे बड़े उत्पादक देशों में माइनिंग बाधाओं और नई खदानों की कमी के कारण ग्लोबल मार्केट में कॉपर की किल्लत (Supply Deficit) बढ़ रही है.
चीन की वापसी: चीनी बाजारों के फिर से खुलने और वहां इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से मांग में उछाल आया है.
US टैरिफ का असर: ट्रंप द्वारा रिफाइंड कॉपर पर प्रस्तावित टैरिफ ने अमेरिकी बाजारों में स्टॉकपिलिंग (जमाखोरी) शुरू कर दी है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं.
निवेश के विकल्प: आप कैसे जुड़ सकते हैं?
अगर आप भी कॉपर की इस तेजी का फायदा उठाना चाहते हैं, तो भारत में ये विकल्प मौजूद हैं:
MCX फ्यूचर्स (Futures): यहां आप कमोडिटी ट्रेडिंग के जरिए सीधे कॉपर के लॉट खरीद सकते हैं.
कॉपर स्टॉक्स (Stocks): हिंदुस्तान कॉपर (HCL), वेदांता (Vedanta) और हिंडाल्को (Hindalco) जैसी कंपनियों के शेयर सीधे कॉपर की कीमतों से प्रभावित होते हैं.
ETF और फंड्स: ग्लोबल मार्केट्स में कॉपर आधारित ईटीएफ भी एक सुरक्षित विकल्प हैं.
निवेश से पहले सावधानी
कॉपर जितना आकर्षक लग रहा है, इसमें जोखिम भी कम नहीं हैं. कमोडिटी बाजार में कीमतें बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं. अगर दुनिया भर में मंदी आती है, तो इंडस्ट्रियल एक्टिविटी कम होगी और कॉपर के दाम गिर सकते हैं. अगर कॉपर बहुत महंगा हो जाता है, तो इंडस्ट्री एल्युमीनियम जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकती है.
2026 का साल कॉपर के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है. जहां सोना-चांदी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) पर चलते हैं, वहीं कॉपर भविष्य की तकनीक (Future Tech) पर टिका है. अगर आप लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं, तो पोर्टफोलियो में थोड़ा 'लाल सोना' शामिल करना बुरा विचार नहीं होगा.