दुनिया भर में जारी युद्ध और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बीच भारत में ईंधन संकट (Fuel Crisis) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पीएम मोदी की किफायती उपयोग वाली अपील के बाद अब हर कोई यह जानना चाहता है कि हमारे देश में तेल का कितना भंडार है और कौन से राज्य सबसे ज्यादा पेट्रोल-डीजल डकार रहे हैं। आइए, समझते हैं भारत की एनर्जी कुंडली।
भारत का तेल भंडार: कितनी लंबी है लाइफलाइन?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) में करीब 9-12 दिनों का कच्चा तेल सुरक्षित है। इसके अलावा, तेल कंपनियों के पास करीब 60-65 दिनों का स्टॉक होता है। सरकार अब इस भंडार को बढ़ाने के लिए नए भूमिगत टैंकों पर काम कर रही है।
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किस राज्य में है सबसे ज्यादा तेल की खपत
औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों की भारी संख्या के कारण महाराष्ट्र देश में पेट्रोल-डीजल की खपत में नंबर-1 पर बना हुआ है। वहीं विशाल आबादी और कृषि क्षेत्र में डीजल की भारी मांग के कारण यूपी दूसरे स्थान पर है।
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किन राज्यों में है सबसे ज्यादा डीजल की डिमांड
हरियाणा, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में डीजल की खपत सबसे अधिक है। पंजाब-हरियाणा में खेती (टैक्टर/पंप) और गुजरात में औद्योगिक ट्रक परिवहन इसकी मुख्य वजह है। यहां तेल की छोटी सी भी कमी अर्थव्यवस्था की रफ्तार रोक सकती है।
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पीएम मोदी की पहल: कम खर्च, ज्यादा बचत
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से गैर-जरूरी यात्राओं से बचने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का आग्रह किया है। आयात पर निर्भरता कम करना और कीमती विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) को बचाना, ताकि युद्ध जैसी स्थिति में देश आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे।
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एथेनॉल और इलेक्ट्रिक: भारत का प्लान B
सरकार पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है ताकि कच्चे तेल का आयात कम हो सके। संकट के इस दौर में इलेक्ट्रिक वाहनों और सीएनजी (CNG) की मांग में 30% तक का उछाल देखा गया है।
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पैनिक बाइंग से बचें
पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल देश में ड्राई-आउट (तेल खत्म होना) जैसी स्थिति नहीं है। लोग पैनिक होकर ड्रमों में तेल न भरें, क्योंकि इससे सप्लाई चेन बिगड़ सकती है। सभी पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सुचारू रखने के निर्देश दिए गए हैं।