आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत सरकार ने बैंकिंग और वित्तीय सुरक्षा को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर और प्रमुख सरकारी व निजी बैंकों के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र Anthropic के नए और शक्तिशाली Mythos AI मॉडल से जुड़े संभावित जोखिमों और बैंकिंग सेक्टर पर इसके असर की समीक्षा करना था।

बैंकिंग सुरक्षा पर Mythos AI का साया

हाल ही में Anthropic द्वारा पेश किए गए Mythos AI ने अपनी असाधारण क्षमताओं से दुनिया को चौंकाया है। लेकिन, इसकी यही ताकत अब वित्तीय संस्थानों के लिए चिंता का सबब बन गई है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बैठक में इन बिंदुओं पर विशेष चर्चा हुई:

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  1. डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग: Mythos AI के जरिए बैंक अधिकारियों या ग्राहकों की आवाज और वीडियो की हूबहू नकल तैयार की जा सकती है, जिससे बैंकिंग धोखाधड़ी का खतरा बढ़ गया है।
  2. साइबर अटैक का नया हथियार: यह AI मॉडल जटिल कोडिंग और फिशिंग हमलों को और अधिक सटीक बनाने में सक्षम है, जो बैंकों के फायरवॉल के लिए चुनौती बन सकता है।

वित्त मंत्री के कड़े निर्देश: सतर्क रहें बैंक
बैठक के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को आगाह करते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति का लाभ उठाने के साथ-साथ सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने बैंकों को कई कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्‍होंने कहा क‍ि बैंकों को अपनी सुरक्षा प्रणालियों को अपग्रेड करना होगा ताकि वे AI द्वारा किए गए हमलों की पहचान कर सकें। पारंपरिक वीडियो केवाईसी और वॉयस ऑथेंटिकेशन को Mythos AI' जैसे मॉडलों से सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा लेयर्स जोड़ने की जरूरत है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वे जल्द ही बैंकों के लिए नए AI रिस्क मैनेजमेंट दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी करेंगे।

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धोखाधड़ी से ग्राहकों को बचाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि Anthropic जैसे शक्तिशाली एआई मॉडलों का उपयोग अगर गलत हाथों में गया, तो यह आम जनता की मेहनत की कमाई को खतरे में डाल सकता है। बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने ग्राहकों को AI स्कैम्स के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाएं।

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