अगर आप अक्सर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे या यमुना एक्सप्रेसवे जैसे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी जेब पर बोझ कम होने वाला है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने टोल वसूलने के पुराने फॉर्मूले को बदलते हुए “Pay as per Road Quality” (सड़क की गुणवत्ता के आधार पर भुगतान) का नया नियम पेश किया है.
15 फरवरी से एक्सप्रेसवे पर सफर करना न केवल तेज होगा, बल्कि कई रूटों पर यह सामान्य नेशनल हाईवे से भी सस्ता पड़ेगा. आइए जानते हैं क्या है पूरा माजरा:
क्या है नया नियम? (The New Toll Policy)
अब तक नियम यह था कि एक्सप्रेसवे होने के नाते यात्रियों को सामान्य हाईवे की तुलना में 1.25 गुना से 1.5 गुना तक ज्यादा टोल देना पड़ता था. लेकिन नई नीति के तहत:
किलोमीटर आधारित कटौती: अगर एक्सप्रेसवे के किसी हिस्से में मरम्मत का काम चल रहा है या वहां सर्विस रोड की सुविधा नहीं है, तो उस हिस्से का टोल 50% तक कम कर दिया जाएगा.
GPS आधारित टोलिंग (GNSS): 15 फरवरी से कई एक्सप्रेसवे पर सैटेलाइट आधारित टोलिंग शुरू हो रही है. अब आपको पूरे स्ट्रेच का पैसा नहीं देना होगा; आप जितनी दूरी तय करेंगे, सिर्फ उतने का ही पैसा आपके अकाउंट से कटेगा.
कमर्शियल वाहनों को बड़ी राहत: ट्रकों और लॉजिस्टिक वाहनों के लिए टोल दरों में 10-15% की फ्लैट कटौती की गई है ताकि महंगाई को कम किया जा सके.
15 फरवरी से क्या बदल जाएगा?
हाईवे से सस्ता एक्सप्रेसवे: सरकार का तर्क है कि यदि एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक ज्यादा है और वहां ईंधन की बचत हो रही है, तो जनता को दोहरा बोझ नहीं दिया जाएगा. कई राज्यों में अब एक्सप्रेसवे का ‘पर किलोमीटर’ रेट नेशनल हाईवे के बराबर या उससे कम कर दिया गया है.
कोई टोल प्लाजा वेटिंग नहीं: नए नियमों के साथ फिजिकल टोल प्लाजा को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है. अब आपके वाहन की गति के आधार पर पैसा सीधे डिजिटल वॉलेट से कटेगा.
लोकल यात्रियों को छूट: एक्सप्रेसवे के आसपास रहने वाले लोगों (20 किमी के दायरे में) के लिए मंथली पास की दरों में भारी कटौती की गई है.
किन एक्सप्रेसवे पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
इस नियम का सबसे बड़ा फायदा इन रूट्स पर मिलेगा:
- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे
- लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे
- मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे
- बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
सरकार का यह कदम ‘ईज ऑफ ट्रैवलिंग’ को बढ़ावा देने के लिए है. टोल की दरें कम होने से न केवल आम आदमी की बचत होगी, बल्कि सामानों की ढुलाई सस्ती होने से बाजार में जरूरी चीजों के दाम भी घट सकते हैं. तो बस, 15 फरवरी का इंतजार कीजिए और अपनी अगली ट्रिप प्लान कीजिए!