कभी भारत के बड़े हिस्से पर राज करने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी एक बार फिर बंद हो गई है. मूल ईस्ट इंडिया कंपनी करीब 152 साल पहले 1874 में बंद कर दी गई थी. साल 2010 में भारतीय मूल के एक ब्रिटिश बिजनेसमैन ने इसके नाम का अधिकार खरीदकर पुनर्जीवित किया था. तब से यह लंदन में एक लग्जरी रिटेलर के रूप में काम कर रही थी. लेकिन वह ईस्ट इंडिया कंपनी प्रोजेक्ट अब दिवालिया होने के बाद खत्म हो गया.

जब बिजनेसमैन संजीव मेहता ने साल 2010 में ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम के अधिकार खरीदे, तो भारत पर राज करने वाली कंपनी अब एक भारतीय के हाथ में होना दुनिया भर की सुर्खियों में छाया रहा.

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'द संडे टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, ईस्ट इंडिया कंपनी लिमिटेड ने अक्टूबर 2025 में परिसमापक नियुक्त किए. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड अपने पेरेंट ग्रुप का करीब 7 करोड़ रुपये से ज्यादा, 2.03 करोड़ रुपये टैक्स और करीब 2 करोड़ रुपये कर्मचारियों का बकाया था. इसके साथ ही संजीव मेहता से जुड़ी 'ईस्ट इंडिया' नाम वाली कई दूसरी कंपनियां भी बंद कर दी गईं.

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कंपनी की वेबसाइट बंद है. लंदन के मेफेयर में 97 न्यू बॉन्ड स्ट्रीट पर स्थित इसकी दुकान खाली है और किराए के लिए वह जगह खाली है.

संजीव मेहता ने 2000 के दशक की शुरुआत में उन शेयरधारकों से ईस्ट इंडिया कंपनी का नाम हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिन्होंने इसे थोक व्यापार के रूप में फिर से शुरू करने की कोशिश की थी. साल 2010 में, उन्होंने मेफेयर में 2,000 वर्ग फुट का एक लग्जरी स्टोर खोला. इसमें हाई क्वालिटी की चाय, चॉकलेट, कन्फेक्शनरी, मसाले और अन्य सामान बेचे जाते थे.