आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में सुबह 9 से शाम 5 की कॉरपोरेट नौकरी (9-to-5 Corporate Job) से हर कोई कभी न कभी परेशान हो ही जाता है। लेकिन बॉस की डांट और सैलरी कटने के डर से लोग इस चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाते। इसी बीच सोशल मीडिया पर दिल्ली की एक लड़की की कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसने न सिर्फ अपनी कॉरपोरेट नौकरी को लात मारी, बल्कि एक नई भाषा सीखकर अपनी किस्मत ऐसी बदली कि आज वह दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक, स्विट्जरलैंड में बिना किसी पारंपरिक नौकरी के मजे से रह रही है। आइए जानते हैं दिल्ली की रहने वाली स्नेहा गौर की यह मजेदार और प्रेरणा देने वाली कहानी।
45000 रुपये की नौकरी और आजादी की चाहत
स्नेहा गौर दिल्ली में एक कॉरपोरेट जॉब करती थीं, जहां उन्हें महीने के 45000 रुपये मिलते थे। नौकरी तो ठीक ठाक थी, लेकिन स्नेहा अपनी शर्तों पर जीना चाहती थीं। वह अपने काम के घंटे खुद तय करना चाहती थीं, खुलकर घूमना चाहती थीं और कुछ ऐसा करना चाहती थीं जो उनके दिल के करीब हो। बस फिर क्या था, उन्होंने बड़ा रिस्क लिया और अपनी चलती नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
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एक भाषा ने बदली परिभाषा: स्पेनिश सीखने का फैसला
नौकरी छोड़ने के बाद स्नेहा ने किसी दूसरी कंपनी में इंटरव्यू देने के बजाय कुछ अलग करने की सोची। उन्होंने स्पेनिश भाषा (Spanish Language) सीखने का फैसला किया। उनका मानना था कि एक नई भाषा सीखने से उनके लिए पारंपरिक नौकरी से हटकर ग्लोबल लेवल पर नए रास्ते खुलेंगे। और उनका यह अंदाजा 100% सही साबित हुआ।
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बिना टीचिंग एक्सपीरियंस के पहुंच गईं स्पेन
स्पेनिश सीखने के फैसले ने स्नेहा के लिए सीधे यूरोप के दरवाजे खोल दिए। उन्हें स्पेन सरकार के एक खास प्रोग्राम Auxiliar de Conversacion के बारे में पता चला। इस प्रोग्राम के तहत स्कूलों में लैंग्वेज असिस्टेंट (Language Assistant) रखे जाते हैं। खास बात ये है कि स्नेहा के पास पहले से पढ़ाने का कोई अनुभव (Teaching Experience) नहीं था, फिर भी इस सरकारी प्रोग्राम के जरिए वह स्पेन पहुंच गईं। स्नेहा करीब 3 साल तक स्पेन में रहीं। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ अपनी स्पेनिश को मजबूत किया, बल्कि इंटरनेशनल एक्सपीरियंस भी हासिल किया।
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एक नौकरी के भरोसे नहीं बैठीं, खड़े किए कमाई के कई जरिए
स्पेन में रहते हुए स्नेहा ने समझ लिया था कि जिंदगी में अगर खुलकर जीना है, तो किसी एक बॉस या एक सैलरी के भरोसे नहीं रहा जा सकता। उन्होंने धीरे-धीरे मल्टीपल इनकम सोर्स बनाने पर काम शुरू किया। उन्होंने खुद का एक ऑनलाइन बिजनेस शुरू किया। डिजिटल प्रोडक्ट्स बनाए और बेचे। सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाई और उन लोगों को मेंटरशिप देना शुरू किया जो ऑनलाइन बिजनेस खड़ा करना चाहते थे। सोशल मीडिया पर उनकी पॉपुलैरिटी देखकर बड़े-बड़े ब्रांड्स ने उनके साथ पार्टनरशिप की, जिससे उनकी कमाई और बढ़ गई।
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स्विट्जरलैंड का सफर: बिना जॉब के 6 महीने!
स्पेन में अपना सॉलिड बेस बनाने के बाद स्नेहा दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक स्विट्जरलैंड (Switzerland) शिफ्ट हो गईं। ताज्जुब की बात यह है कि वह वहां पूरे 6 महीने रहीं, वो भी बिना किसी नौकरी के। है न हैरान करने वाली बात।
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स्नेहा ने अपनी एक इंस्टाग्राम रील में बताया कि जब वह स्विट्जरलैंड गईं, तो वह पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन चुकी थीं। उनका बिजनेस ऑटो-पायलट मोड पर था। स्नेहा कहती हैं कि मेरा लैपटॉप और मेरी रिमोट टीम ही मेरे लिए काफी थी। कई बार आपकी जिंदगी को बदलने के लिए किसी प्रमोशन की जरूरत नहीं होती, बल्कि सिर्फ एक सही स्किल ही काफी होती है।
स्नेहा की यह कहानी साबित करती है कि अगर आपके पास कोई एक बेहतरीन स्किल है और आप रिस्क लेने से नहीं डरते, तो दुनिया का कोई भी कोना आपके लिए छोटा नहीं है।