मिडिल ईस्ट के समंदर से उठी आग की लपटों ने आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. जहां एक तरफ दुनिया शांति की उम्मीद कर रही थी, वहीं ईरान और इराक के बीच के ताजा टकराव ने तेल के बाजार में ब्लैक थर्सडे जैसी स्थिति पैदा कर दी है. गुरुवार की सुबह जब दुनिया की आंख खुली, तो अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल की दीवार को लांघ चुका था.

विस्फोटकों से लदी नावों, जलते हुए टैंकरों और इराक के ठप्प होते तेल बंदरगाहों ने यह साफ कर दिया है कि अब जंग सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि एनर्जी सप्लाई चेन पर लड़ी जा रही है. ईरान ने साफ कह दिया है कि अगर उसे छेड़ा गया, तो तेल की कीमतें 200 डॉलर के पार होंगी, एक ऐसा आंकड़ा जो दुनिया भर में महंगाई की सुनामी ला सकता है. आइए, इस रिपोर्ट में समझते हैं कि आखिर ईरान ने इराक के टैंकरों को निशाना क्यों बनाया और इस ऑयल वॉर का सीधा असर आपके बजट और भारतीय शेयर बाजार पर कैसे पड़ने वाला है.

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इराक के टैंकरों पर हमला

ताजा संकट तब शुरू हुआ जब इराक के जल क्षेत्र में विस्फोटकों से लदी ईरानी नावों ने दो बड़े तेल टैंकरों, Safesea Vishnu और Zefyros को निशाना बनाया है. इसका नतीजा ये हुआ क‍ि हमले के तुरंत बाद इराक ने सुरक्षा कारणों से अपने सभी तेल टर्मिनलों (Ports) पर काम पूरी तरह बंद कर दिया है. सप्लाई रुकने की खबर फैलते ही बाजार में हाहाकार मच गया.

क्यों भड़का ईरान?
दरअसल, यह हमला अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के एक फैसले का जवाब माना जा रहा है. दुनिया भर में तेल की कीमतें कम करने के लिए IEA ने अपने इमरजेंसी स्टॉक से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारने का फैसला लिया. अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे देश भी अपना रिजर्व तेल निकाल रहे हैं. ईरान नहीं चाहता कि कीमतें गिरें. वह महंगे तेल के जरिए अमेरिका और यूरोप पर दबाव बनाना चाहता है. ईरान का संदेश साफ है क‍ि तुम जितना तेल बाजार में डालोगे, हम उतने टैंकर तबाह कर देंगे.

200 डॉलर की डरावनी चेतावनी
ईरान ने सिर्फ हमला ही नहीं किया, बल्कि दुनिया को खुली धमकी भी दी है. ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल ने उसकी रिफाइनरियों पर हमला किया, तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएंगी. साथ ही, उसने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है.

भारत के लिए खतरे की घंटी?
भारत के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 20% कच्चा तेल अकेले इराक से मंगाता है. इराक के पोर्ट्स बंद होने का मतलब है सप्लाई में बड़ी रुकावट. कच्चा तेल महंगा होने का सीधा मतलब है महंगा पेट्रोल-डीजल और बढ़ती महंगाई. इसी तेल संकट के डर से आज भारतीय शेयर बाजार में सुनामी आ गई है. सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूट चुका है और निफ्टी भी गहरे लाल निशान में है.

ईरान और इराक के बीच की यह तनातनी अब ग्लोबल इकोनॉमी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है. अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में भारत समेत पूरी दुनिया को महंगे ईंधन की मार झेलनी पड़ सकती है.