अगर आप सोच रहे थे कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) सस्ता होगा और भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे, तो फिलहाल इस उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है. मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में हुए नए हमलों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल आ गया है. शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड का भाव 84 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है.
आइए, समझते हैं कि मिडिल ईस्ट में अचानक क्या हुआ, ईरान की नई शर्तें क्या हैं और इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है.
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अचानक क्यों भड़का मिडिल ईस्ट में तनाव?
कुछ ही दिनों पहले तक यह उम्मीद जताई जा रही थी कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बन जाएगी और नया समझौता हो सकता है. इस खबर से कच्चे तेल के दाम गिरने भी लगे थे. लेकिन गुरुवार रात केशम द्वीप (Qeshm Island) के पास हुए एक धमाके के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमले शुरू कर दिए और दावा किया कि उसने दुश्मन देशों के ठिकानों को निशाना बनाया है. ईरान अब अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों के इस रास्ते से गुजरने पर पूरी तरह से रोक (Transit Restrictions) लगाना चाहता है.
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ईरान की नई मांग: 20% का भारी जुर्माना!
ईरान काफी समय से इस समुद्री रास्ते पर अपना पूरा नियंत्रण चाहता है. अब तेहरान की तरफ से नई शर्तें सामने आई हैं. ईरान का कहना है कि दुश्मन देशों के जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने से पहले मुआवजा देना होगा. जो जहाज ईरान के बनाए नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके ऊपर लदे कुल सामान की कीमत का 20% जुर्माना वसूला जाएगा.
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ईरान ने साफ कहा है कि जब तक अमेरिका उस पर से पाबंदियां नहीं हटाता, तब तक यह महत्वपूर्ण जलमार्ग पूरी तरह से नहीं खोला जाएगा.
भारत के लिए क्यों बढ़ी सिरदर्दी?
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात (Import) से पूरा करता है और यह समुद्री रास्ता भारत के तेल आयात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अगर कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार 80-85 डॉलर से ऊपर बने रहते हैं, तो देश में पेट्रोल-डीजल सस्ते होने की संभावना खत्म हो जाएगी.
फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरें स्थिर बनी हुई हैं. लेकिन अगर क्रूड ऑयल में यूं ही उबाल जारी रहा, तो आगे चलकर सरकारी तेल कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव बन सकता है. जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई स्थायी समझौता या ठोस नतीजा नहीं निकल आता, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में ऐसी ही उठापटक देखने को मिलती रहेगी. फिलहाल भारत समेत दुनिया भर के तेल आयातक देशों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में होर्मुज जलमार्ग का विवाद कैसे सुलझता है.