वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही शांति वार्ता (US-Iran Peace Talks) के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक नई चेतावनी ने कच्चे तेल के बाजार में अचानक भारी हलचल पैदा कर दी है। सोमवार को बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा का तगड़ा उछाल देखने को मिला है और ब्रेंट क्रूड एक बार फिर $82.30 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।
इस अचानक आई तेजी के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल और ईंधन की कीमतों में बड़ी कटौती की उम्मीद कर रहे उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका लगा है।
क्यों अचानक बढ़ने लगे कच्चे तेल के दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस ताजा उछाल के पीछे मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान और मिडिल ईस्ट का नया राजनीतिक घटनाक्रम है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर हिजबुल्लाह ने इजरायल पर अपने हमले जारी रखे, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप के इस बयान से वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है।
रविवार को ईरानी मीडिया ने खबर दी कि तेहरान ने स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक (Bürgenstock) रिसॉर्ट में चल रही बातचीत को सस्पेंड कर दिया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक बातचीत जारी है, लेकिन इस अनिश्चितता ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड जहां $82.30 पर पहुंच गया, वहीं अमेरिकी क्रूड वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी सोमवार को उछलकर $78 प्रति बैरल के पार निकल गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ट्रंप का रुख
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव चरम पर है। ईरान ने एक बार फिर दावा किया था कि उसने इस समुद्री रास्ते को बंद कर दिया है, हालांकि सप्ताहांत (Weekend) में तेल जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रही। इस पर ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में ईरानी नेताओं को दो टूक कहा कि अगर उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की जरा भी कोशिश की, तो इसके बेहद गंभीर परिणाम होंगे।
मार्केट एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
कमोडिटी और एनर्जी मार्केट के दिग्गजों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में शांति समझौते की उम्मीद के चलते कच्चे तेल के दाम $120 के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर $73 से $81 के दायरे में आ गए थे। लेकिन इस नई बयानबाजी ने बाजार को फिर से अस्थिर कर दिया है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक अब स्विट्जरलैंड से आने वाली हर छोटी-बड़ी हेडलाइन पर नजर रख रहे हैं। अगर बातचीत में सुधार होता है तो कीमतें दोबारा गिरेंगी, अन्यथा आने वाले दिनों में ईंधन और गैस की कीमतें वैश्विक स्तर पर फिर से बढ़ सकती हैं।
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