अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में पिछले 5 दिनों से चली आ रही बढ़त पर आखिरकार ब्रेक लग गया है. 13 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों की कीमतों में 1% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है. तेल की कीमतों में यह नरमी अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते (US-Iran Agreement) की उम्मीदों के चलते आई है.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होने से भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम घटेंगे?

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आज कितना सस्ता हुआ कच्चा तेल?

सुबह के कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के भाव में मंदी देखी गई. ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 1.01% की गिरावट के साथ 88.080 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं WTI क्रूड ऑयल 1.15% फिसलकर 82.301 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है.

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क्यों गिर रहे हैं कच्चे तेल के दाम?
कच्चे तेल में आई इस गिरावट की सबसे मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित डील की उम्मीदें हैं. निवेशक उम्मीद जता रहे हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत से तेल सप्‍लाई का यह सबसे जरूरी समुद्री रास्ता होर्मुज स्‍ट्रीट (Strait of Hormuz) सुरक्षित रहेगा. दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से भी ये संकेत मिले हैं कि तेहरान (ईरान) और वाशिंगटन (अमेरिका) के बीच बैक-चैनल बातचीत चल रही है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि महत्वपूर्ण जलमार्गों पर उनका नियंत्रण है, हालांकि वे ईरान पर आर्थिक दबाव भी बनाए हुए हैं. वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी ये स्पष्ट कर द‍िया है क‍ि फिलहाल किसी अंतरिम समझौते को लेकर कोई बहुत बड़ा डेवलपमेंट नहीं है.

भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों पर क्या असर पड़ा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद आज भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. भारतीय तेल व‍िपणन कंपनियों ने हाल के दिनों में क्रूड महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए थे. इसलिए, अब जब क्रूड में हल्की गिरावट आ रही है, तो तुरंत कीमतें घटने की संभावना भी कम ही जताई जा रही है.

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भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाता है और ग्लोबल ऑयल सप्लाई सामान्य होती है, तो लंबी अवधि में इसका फायदा भारतीय ग्राहकों को जरूर मिल सकता है.

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