Plastic Banknotes: क्या प्लास्टिक के नोटों की नकल बनाना है नामुमकिन? जानें प्लास्टिक करेंसी के फायदे और नुकसान

सोशल मीड‍िया से लेकर मीड‍िया र‍िपोर्ट्स तक में इस बात की चर्चा है क‍ि RBI अगले साल तक प्‍लास्‍ट‍िक करेंसी जारी कर सकता है. ऐसे में पाठकों के मन में ये सवाल उठता है क‍ि क्‍या इन नोटों की नकल करना संभव नहीं है? दुन‍िया के कई देश प्‍लास्‍ट‍िक करेंसी को इस्‍तेमाल कर रहे हैं. जान‍िये इसके फायदे और नुकसान क्‍या है?

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भारत में प्‍लास्‍ट‍िक नोट लाने पर व‍िचार चल रहा है. जान‍िये प्‍लास्‍ट‍िक नोट के फायदे और नुकसान क्‍या हैं.

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नई दिल्ली: कागज के फटे-पुराने और भीगे हुए नोटों से तो हम सब कभी न कभी परेशान हुए ही हैं. जेब में पड़ा नोट अगर गलती से कपड़े धोने के साथ पानी में चला जाए, तो उसका क्या हाल होता है, यह किसी से छिपा नहीं है. इसी समस्या का हल निकालने के लिए दुनिया के कई देशों में प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोटों (Polymer Banknotes) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

अक्सर कहा जाता है कि प्लास्टिक के नोटों की नकल (नकली नोट या Counterfeiting) बनाना लगभग नामुमकिन होता है. लेकिन क्या यह बात पूरी तरह सच है? आइए, समझते हैं कि क्या सच में प्लास्टिक नोटों की कॉपी नहीं हो सकती और इसके क्या-क्या फायदे व नुकसान हैं.

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क्या सच में प्लास्टिक नोट की कॉपी नहीं हो सकती?

इसका सीधा जवाब है, प्लास्टिक के नोटों की हूबहू नकल बनाना बेहद मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं. प्लास्टिक नोट किसी आम प्लास्टिक से नहीं, बल्कि एक खास तरह की पॉलिमर फिल्म (BOPP) से बनते हैं. इनमें पारदर्शी खिड़की (Transparent Window), रंग बदलने वाली स्याही और खास तरह की 3D आकृतियां होती हैं. कागज के नोटों की फोटोकॉपी या प्रिंटिंग आसानी से की जा सकती है, लेकिन प्लास्टिक नोटों के सुरक्षा फीचर्स को कॉपी करने के लिए करोड़ों रुपये की हाई-टेक मशीनों और खास मटीरियल की जरूरत होती है. इसलिए जालसाज (Counterfeiters) इनकी जल्दी नकल नहीं बना पाते.

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प्लास्टिक नोटों के 5 बड़े फायदे (Benefits of plastic currency)
फटने और गलने का झंझट खत्म: ये नोट पानी में नहीं गलते और न ही आसानी से फटते हैं. चाय या पानी गिर जाने पर भी इन्हें बस कपड़े से पोंछकर साफ किया जा सकता है.

लंबी उम्र (High Durability): कागज के नोट जहां 1 से 2 साल में खराब हो जाते हैं, वहीं प्लास्टिक के नोट कागज के मुकाबले लगभग 2.5 से 4 गुना ज्यादा समय तक चलते हैं.

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बैक्टीरिया और गंदगी से बचाव: कागज के नोट में पसीना, धूल और रोगाणु जमा हो जाते हैं, जबकि प्लास्टिक नोट की सतह ऐसी होती है कि उस पर गंदगी और नमी जल्दी नहीं चिपकती.

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नकली नोटों पर लगाम: इनके जटिल डिजाइन और ट्रांसपेरेंट फीचर्स की वजह से जाली नोटों के काले कारोबार पर रोक लगाने में मदद मिलती है.

पर्यावरण के लिए रिसाइक्लेबल: जब ये नोट पुराने या घिस जाते हैं, तो इन्हें गलाकर रीसायकल (Recycle) किया जा सकता है और उनसे दूसरी प्लास्टिक की चीजें बनाई जा सकती हैं.

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प्लास्टिक नोटों के नुकसान (Drawbacks)
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, इसलिए प्लास्टिक नोटों की भी कुछ कमियां हैं:

शुरुआती छपाई बहुत महंगी: कागज के मुकाबले पहली बार प्लास्टिक के नोट छापने की लागत (Printing Cost) काफी ज्यादा आती है. हालांकि, लंबी उम्र के कारण धीरे-धीरे इसकी भरपाई हो जाती है.

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मोड़ने में परेशानी (Folding Problem): प्लास्टिक के नोटों को अगर एक बार कसकर मोड़ (Fold) दिया जाए, तो उन पर पड़ा मोड़ने का निशान पूरी तरह से खत्म नहीं होता.

एटीएम और मशीनों में दिक्कत: अगर देश में अचानक प्लास्टिक नोट लाए जाएं, तो सभी बैंक एटीएम (ATM) और नोट गिनने वाली मशीनों को री-कैलिब्रेट (बदलना) करना पड़ता है, जिसमें भारी खर्च आता है.

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गर्मी से नुकसान: अत्यधिक गर्मी या सीधी आग के संपर्क में आने पर ये नोट पिघल सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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