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Union Budget 2025: क्या वित्त मंत्री बढ़ाएंगी आयकर छूट की सीमा? जानें एक्सपर्ट की राय

बजट 2025 में आयकर छूट सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग उठ रही है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि महंगाई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह बदलाव जरूरी है। सरकार पर दबाव है कि वह करदाताओं को राहत देने के लिए नए कदम उठाए।

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 Budget 2025 Income Tax: 1 फरवरी को केंद्र सरकार फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए अपना बजट पेश करेगी। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए बड़ी चुनौती है कि वे सभी स्टेकहोल्डर्स और टैक्सपेयर्स की बढ़ती अपेक्षाओं को कैसे एड्रेस करें। ऐसे में ऐसा बजट तैयार करना है जो राजकोषीय अनुशासन, मध्यम वर्ग के करदाताओं को राहत देने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हुए बैलेंस बनाए रखे। इसके अलावा, इन अपेक्षाओं को संबोधित करने के लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों लक्ष्यों को पूरा करने के लिए योजना बनाने की आवश्यकता होगी। आइए इसके बारे में जानते हैं।

पुरानी और नई टैक्स रिजीम में फर्क

पुरानी टैक्स रिजीम के तहत 2.5 लाख रुपये तक की सालाना इनकम कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। वहीं जिन लोगों की इनकम 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक है, उन्हें 5% के हिसाब से टैक्स देना होगा। 10 लाख तक की एनुअल इनकम वाले लोगों को 20% और 10 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना इनकम वालों को 30% के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है।

नए टैक्स स्लैब की बात करें, इसके तहत 3 लाख रुपये की सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता है। जबकि 3 लाख से 6 लाख रुपये तक की एनुअल सैलरी पर 5% टैक्स लगता है। अगर आपकी इनकम 6 लाख से 9 लाख रुपये सालाना है, तो आपको 10 फीसदी का टैक्स देना होगा।

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वहीं 9 लाख से 12 लाख रुपये की एनुअल इनकम पर 15 फीसदी और 12 लाख से 15 लाख रुपये तक कमाने वाले व्यक्ति को 20% के हिसाब से टैक्स देना होता है। अगर आपकी इनकम 15 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको 25% के हिसाब से टैक्स देना होता है।

गौरतलब है कि न्यू टैक्स रिजीम को 2020 में इंट्रोड्यूस किया गया था। इसके तहत करदाताओं को ये छूट दी गई थी कि वे ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम में से किसी एक को चुन सकते हैं।

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आयकर छूट की सीमा

जब वित्त मंत्री सीतारमण ने पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने के ऑप्शन के साथ नई टैक्स रिजीम को पेश किया, तो इसने मुश्किलें और बढ़ा दीं। न्यूज24 के साथ बातचीत के दौरान भारत के पूर्व वित्त सचिव, सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि पुरानी कर व्यवस्था के तहत आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 30% अधिकतम कर दर 25 लाख रुपये या उससे अधिक कमाने वालों पर लागू होनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो आपको 5 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।

5 लाख रुपये क्यों होनी चाहिए आयकर छूट सीमा?

गर्ग ने कहा कि अब समय आ गया है कि वित्त मंत्री पुरानी कर योजना की छूट सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने पर विचार करें। उन्होंने अपनी मांग के पीछे कारण बताते हुए कहा कि पिछले एक दशक में महंगाई दर में 100 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही मौजूदा छूट सीमा पुरानी हो गई है, जिससे करदाताओं पर काफी बोझ पड़ रहा है।

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10 करोड़ लोग भरते हैं टैक्स रिटर्न

गर्ग ने कहा कि भारत में करीब 10 करोड़ लोग टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं, लेकिन उनमें से करीब 7 करोड़ लोग सरकार के छूट प्रावधान के कारण वास्तव में कर नहीं देते हैं। इसी तरह, भारत में करीब 3 करोड़ लोग ही वास्तव में आयकर देते हैं और उनमें से ज्यादातर (करीब 95 फीसदी) वेतनभोगी लोग हैं।

ऐसे में गर्ग की मांग है कि टैक्स लिमिट को बढ़ाया जाए। बता दें कि पुरानी कर योजना की छूट सीमा 2.5 लाख रुपये है, जिसे 10 साल से बदला नहीं गया है। इसके अलावा महंगाई दर 100 फीसदी से ज्यादा हो गई है। ऐसे में इस छूट सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करना वित्त मंत्री द्वारा उठाया जाने वाला तार्किक कदम होगा । उन्होंने कहा कि इसके अलावा, 25 लाख रुपये तक की आय पर अधिकतम 30% कर लागू होना चाहिए।

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