अंग्रेजों ने भारतीयों पर सैकड़ों साल राज किया और यहां से कई कीमती चीजें ले गए, जो आज भी ब्रिटिश शाही परिवार की शोभा बढा रहे हैं. लेकिन क्या आपके मन में कभी ये ख्याल नहीं आता कि लैविश लाइफस्टाइल जीने वाले बिटिश शाही परिवार की कमाई कहां से होती है? क्या आम लोगों की तरह वो भी टैक्स देते हैं या उन्हें टैक्स देने की आवश्कता नहीं होती? आइये आपको बताते हैं कि ब्रिटिश शाही परिवार की कमाई कहां से होती है:
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कहां से होती है शाही परिवार की कमाई?
- सोवरेन ग्रांट (Sovereign Grant)
यह वह पैसा है जो ब्रिटिश सरकार हर साल राजा (वर्तमान में किंग चार्ल्स III) को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के लिए देती है. यह ‘क्राउन एस्टेट’ (Crown Estate) के मुनाफे से आता है. क्राउन एस्टेट लंदन की महंगी जमीनों, समुद्र तटीय संपत्तियों और खेतों का एक विशाल संग्रह है.
क्राउन एस्टेट का सारा मुनाफा सरकारी खजाने में जाता है और बदले में सरकार उसका एक निश्चित हिस्सा (आमतौर पर 12% से 25%) शाही परिवार को उनके खर्चों, कर्मचारियों की सैलरी और महलों के रख-रखाव के लिए देती है.
- डची ऑफ लैंकेस्टर (Duchy of Lancaster)
इसे राजा का ‘निजी वॉलेट’ (Privy Purse) भी कहा जाता है. यह 13वीं शताब्दी से चली आ रही संपत्तियों का एक पोर्टफोलियो है. इसमें लगभग 18000 हेक्टेयर जमीन, शहरी संपत्तियां और ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं. इस संपत्ति से होने वाली आय का उपयोग राजा अपने परिवार के उन सदस्यों के खर्चों के लिए करते हैं जो आधिकारिक काम तो करते हैं लेकिन जिन्हें सोवरेन ग्रांट से पैसा नहीं मिलता. - डची ऑफ कॉर्नवाल (Duchy of Cornwall)
यह संपत्ति विशेष रूप से प्रिंस ऑफ वेल्स (वर्तमान में प्रिंस विलियम) के लिए है. यह एक विशाल व्यावसायिक साम्राज्य है जिसमें कृषि भूमि, आवासीय घर और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं.प्रिंस विलियम और उनका परिवार अपने निजी और सार्वजनिक खर्चों के लिए इसी से होने वाली आय का उपयोग करते हैं.
क्या शाही परिवार टैक्स देता है?
तकनीकी रूप से, राजा को टैक्स देने की कानूनी बाध्यता नहीं है. लेकिन 1992 से शाही परिवार ने स्वेच्छा से (Voluntarily) अपनी निजी आय और डची से होने वाले मुनाफे पर आयकर (Income Tax) देना शुरू कर दिया है.
निजी संपत्ति और निवेश:
इन आधिकारिक स्रोतों के अलावा, शाही परिवार के पास अपनी निजी संपत्ति भी है. जैसे कि सैंड्रिंघम हाउस और बालमोरल कैसल. ये राजा की निजी संपत्तियां हैं. इन्हें सरकार से नहीं मिला.इसके अलावा कलाकृतियां और निवेश भी हैं. उनके पास बेशकीमती कलाकृतियों, डाक टिकटों के संग्रह और शेयर बाजार में निवेश का एक बड़ा हिस्सा है.
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