1 April Airport New Rule: भारतीय हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या में 15% की भारी बढ़ोतरी के बाद लाउंज में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने सख्त कदम उठाए हैं। 1 अप्रैल 2026 से 'फ्री लाउंज एक्सेस' अब पूरी तरह से 'स्पेंड-बेस्ड' (Spend-based) यानी आपके खर्चों पर आधारित हो जाएगा।
क्या हैं नए नियम?
अब तक कई कार्ड्स पर एक्टिवेशन के साथ ही लाउंज एक्सेस मिल जाता था, लेकिन अब गणित बदल गया है:
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खर्च की शर्त: अगले तिमाही (Quarter) में लाउंज एक्सेस पाने के लिए आपको पिछली तिमाही में एक निश्चित राशि (जैसे 10,000 से 50,000 रुपये) खर्च करनी होगी।
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केवल प्राइमरी कार्डधारक: अब तक मुख्य कार्ड के साथ एड-ऑन (Supplementary) कार्ड्स पर भी फ्री एक्सेस मिल जाता था, लेकिन अब यह सुविधा केवल मुख्य कार्डधारक तक सीमित हो सकती है।
डिजिटल वाउचर: फिजिकल कार्ड स्वाइप करने की जगह अब बैंक के ऐप से जेनरेटेड QR कोड या डिजिटल वाउचर दिखाना अनिवार्य होगा।
ट्रैवल इंश्योरेंस: लाउंज एक्सेस का नया रास्ता
अगर आप कार्ड की खर्च सीमा पूरी नहीं कर पाते हैं, तो आधुनिक ट्रैवल इंश्योरेंस (Travel Insurance) आपकी मदद कर सकता है।
फ्लाइट डिले कवर: यदि आपकी फ्लाइट 3-4 घंटे लेट होती है, तो कई प्रीमियम इंश्योरेंस पॉलिसियां आपको मुफ्त लाउंज वाउचर प्रदान करती हैं, चाहे आपके पास क्रेडिट कार्ड की पात्रता हो या नहीं।
खर्च की वापसी: तकनीकी कारणों से देरी होने पर लाउंज में किए गए खर्च का पुनर्भुगतान (Reimbursement) भी इंश्योरेंस कंपनी से लिया जा सकता है।
खर्च की गणना कैसे होगी?
यदि आप जुलाई में यात्रा करने वाले हैं, तो आपको अप्रैल, मई और जून के दौरान अपने कार्ड से निर्धारित लक्ष्य (Target) पूरा करना होगा। इसमें ऑनलाइन शॉपिंग, बिल पेमेंट और ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन गिने जाएंगे। हालांकि ATM से कैश निकालना और डिजिटल वॉलेट (Wallet Loading) में पैसे डालना इसमें शामिल नहीं होंगे।