केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) इस समय सबसे बड़ा और चर्चा का विषय बना हुआ है. भले ही आयोग की सिफारिशों को लागू होने में थोड़ा समय लग रहा हो, लेकिन कर्मचारियों के बीच वेतन, भत्तों और पेंशन को लेकर जबरदस्त उत्साह है. सबसे राहत की बात यह है कि लागू होने में चाहे जितनी भी देरी हो, कर्मचारियों को बड़ा एरियर (Arrears) मिलने वाला है. आइये जानते है क‍ि 8वें वेतन आयोग को लेकर क्या अपडेट्स हैं और कर्मचारियों की 5 सबसे बड़ी मांगें कौन-कौन सी हैं.

---विज्ञापन---

EPFO Alert: EPFO ने मेंबर्स के ल‍िए जारी क‍िया अलर्ट, पीएफ खाते से उड़ सकते हैं आपके पैसे!

---विज्ञापन---

कब से लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कितना मिलेगा एरियर?

8वें वेतन आयोग का गठन और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएंगी. अगर सरकार सिफारिशों को 2027 के अंत तक भी पूरी तरह लागू करती है, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को जनवरी 2026 से लेकर लागू होने की तारीख तक का पूरा 2 साल का एरियर (Arrears) एकमुश्त या किस्तों में मिलेगा.

---विज्ञापन---

Upcoming IPOs This Week: इस हफ्ते खुलेंगे 9 नए IPO, 7681 करोड़ रुपये जुटाएंगी कंपनियां! देखिए GMP और लिस्ट

---विज्ञापन---

8वें वेतन आयोग के तहत 5 सबसे बड़ी मांगें
केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और यूनियनों ने सरकार और आयोग के सामने अपनी 5 प्रमुख मांगें रखी हैं:

---विज्ञापन---

  1. मिनिमम बेसिक सैलरी (Minimum Basic Pay) में बढ़ोतरी
    कर्मचारियों की मांग है कि मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी (जो फिलहाल ₹18,000 है) को बढ़ाकर कम से कम ₹26,000 से ₹34,000 के बीच तय किया जाए, ताकि महंगाई के दौर में राहत मिल सके.
  2. फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) बढ़ाना
    सैलरी बढ़ाने में फिटमेंट फैक्टर की भूमिका सबसे अहम होती है. कर्मचारी चाहते हैं कि इसे 2.57 से बढ़ाकर 3.00 या 3.68 किया जाए. अगर ऐसा होता है तो बेसिक पे में बंपर उछाल आएगा.
  3. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
    एनपीएस (NPS) और यूपीएस (UPS) के विकल्पों के बीच कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) को फिर से लागू करने की है, ताकि रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित और निश्चित पेंशन मिल सके.
  4. हर साल 6 फीसदी की सैलरी बढ़ोतरी (Annual Increment)
    फिलहाल सालाना इंक्रीमेंट 3% की दर से मिलता है. कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई और काम के बोझ को देखते हुए हर साल बेसिक सैलरी में कम से कम 6% की बढ़ोतरी का प्रावधान किया जाए.
  5. एचआरए (HRA) और अन्य भत्तों में इजाफा
    हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और मेडिकल भत्तों की समीक्षा करके उन्हें आज के शहर-दर-शहर रहने के खर्च के हिसाब से काफी बढ़ाया जाए.