8th Pay Commission: सैलरी और DA एक जनवरी से क्यों नहीं बढ़ा? 8वें वेतन आयोग में देरी के 3 मुख्य कारण

8th pay commission latest update: 8वें वेतन आयोग के एक जनवरी 2026 से लागू होने की चर्चा के बीच केंद्रीय कर्मचारियों को बड़े वेतन संशोधन की उम्मीद थी. अब तक वेतन या महंगाई भत्ते (DA) में कोई बदलाव नहीं हुआ है. सवाल उठा है कि देरी क्यों हुई और कितना इंतजार करना पड़ेगा?

8th pay commission latest update
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8th pay commission latest update: 8वें वेतन आयोग का इंतजार क्यों लंबा हो गया? 1 जनवरी से कर्मचारियों का वेतन और डीए क्यों नहीं बढ़ा? 2016 में लागू हुए सातवें वेतन आयोग के दिसंबर 2025 के खत्म होते ही 10 साल पूरे होने पर यह अंदाजा लगाया जाने लगा था कि जनवरी 2026 से सैलरी में संशोधन हो जाएगा और वेतन बढ़कर आएगा, लेकिन अब सरकार ने अपडेट दिया है कि जब तक वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप नहीं देता और उन्हें मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक नया वेतनमान लागू नहीं किया जा सकता. नया वेतनमान भले ही बाद में लागू हो, लेकिन बकाया राशि की गणना 1 जनवरी 2026 से की जाएगी.

1 जनवरी से वेतन क्यों नहीं बढ़ा?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तैयार नहीं हुई हैं. रिपोर्ट पेश और स्वीकृत होने के बाद ही नया वेतन लागू होगा. इसी कारण 1 जनवरी 2026 से कोई स्वतः वृद्धि नहीं हो सकी. सरकारी नियमों के मुताबिक, हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है. सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप नहीं देता और उन्हें मंज़ूरी नहीं मिल जाती, तब तक नया वेतनमान लागू नहीं किया जा सकता.

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8वें वेतन आयोग में देरी की एक वजह यह भी

8वें वेतन आयोग को जनवरी 2026 तक लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन देरी के पीछे पहले ये 3 मुख्य कारण बताए जा रहे थे. वित्त मंत्रालय ने पहले कहा था कि वर्तमान में 8वें वेतन आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. सरकार का ध्यान ‘परफॉरमेंस बेस्ड’ वेतन वृद्धि पर हो सकता है. चर्चा है कि सरकार 10 साल के अंतराल को खत्म कर हर साल सैलरी बढ़ाने का कोई नया फॉर्मूला (जैसे Aykroyd Formula) ला सकती है. नए वेतन आयोग को लागू करने से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है, जिसकी समीक्षा जारी है.

कितनी बढ़ सकती है आपकी सैलरी?

अगर 8वां वेतन आयोग लागू होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में भारी उछाल आने की उम्मीद है. विशेषज्ञों के अनुसार फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor): इसे 2.57 से बढ़ाकर 3.68 किया जा सकता है. फिटमेंट फैक्टर बढ़ने पर न्यूनतम मूल वेतन (Basic Salary) 18,000 रुपये से बढ़कर 26,000 रुपये तक हो सकती है. इससे पेंशनभोगियों की पेंशन में भी लगभग 25-30% की वृद्धि होने का अनुमान है. अर्थशास्त्री प्रोफेसर रजनीश क्लार का कहना है कि सरकार न्यूनतम वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 40–50 हजार रुपये प्रति माह कर सकती है.

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8वें केंद्रीय वेतन आयोग की मौजूदा स्थिति क्या

सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को मंज़ूरी दे दी है. इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर सकती हैं. हालांकि, आयोग के काम में समय लगता है डेटा संग्रह, विभिन्न विभागों से बातचीत और आर्थिक असर का आकलन शामिल होता है. आयोग की रिपोर्ट आने तक इंतज़ार करना होगा. वेतन वृद्धि में देरी ज़रूर है, लेकिन नुकसान नहीं, क्योंकि एरियर मिलेगा. 2026–27 के दौरान सिफारिशें लागू होने की संभावना मानी जा रही है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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