आज की तारीख में देश के ज्यादातर परिवारों की चिंता यही है कि बच्चे का दाखिला किस तरह के कोर्स में कराया जाए, कहां कराया जाए. जिससे करियर बेहतर हो…भविष्य सुरक्षित बने. मेडिकल में दाखिले के लिए NEET परीक्षा में क्या हुआ ? किसी से छिपा नहीं है . इंजीनियरिंग में दाखिले की दौड़ का रिजल्ट बहुत हद तक क्लियर हो चुका है … जिनकी सीट कन्फर्म हो चुकी है – वो दूसरी तरह की टेंशन में हैं . टेंशन ये कि इंजीनियरिंग की जिस Stream में दाखिला मिल रहा है – क्या अगले चार साल बाद उस डिग्री के दम पर नौकरी मिल पाएगी ? सवाल ये कि जिन बच्चों ने Humanities में ग्रेजुएशन का फैसला लिया है – उनका क्या होगा? क्या इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र, दर्शनशास्त्र जैसे विषयों की पढ़ाई नौकरी दिलाने में मददगार साबित होगी? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में दुनिया में बदलाव की रफ्तार गुना तेज है … Job Market बहुत तेजी से बदल रहा है … कंपनियों को नए तरह की Skill वाली Workforce की जरूरत है . ऐसे में स्कूल और कॉलेजों की जिम्मेदारी ऐसी Workforce तैयार करने की है – जिसे पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिल सके … कारोबार कर सके . दुनिया की सबसे बड़ी AI चिप कंपनी एनवीडिया के CEO जेसन हुआंग का कहना है कि AI के दौर में क्या पढ़ना है से ज्यादा जरूरी है AI के इस्तेमाल से कितना बेहतर सीखना है…हमारे देश में अभी AI शुरुआती दौर में है . लेकिन, दो-तीन वर्षों में ये देश की बड़ी आबादी की रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन जाएगा… ऐसे में स्कूल से कॉलेज तक पढ़ाई में हर स्तर पर AI को Basic Skill के तौर पर शामिल करना जरूरी हो गया है . जिस तरह कभी अंग्रेजी और कंप्यूटर की समझ बुनियादी मानी जाती थी…ठीक उसी तरह स्कूल से कॉलेज तक बच्चों को इस तरह तैयार करना होगा – जिससे AI का इस्तेमाल और समझ Basic Skill के तौर पर विकसित हो सके . ऐसे में आज मैं आपको बताऊंगी कि AI के तेजी से विस्तार के साथ किस तरह की पढ़ाई की जरूरत है? किस तरह के शिक्षकों की जरूरत है? कॉलेज में छात्रों को मशीन से आगे की सोच के लिए किस तरह तैयार किया जाना चाहिए? किस तरह के इंजीनियर और डॉक्टर सफल होंगे ? किस तरह के युवा प्रोफेशनल डिग्री के बाद भी नौकरी की रेस में पिछड़ जाएंगे और किस तरह के धुरंधर साबित होंगे ? आज कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे.
AI का जमाना… बच्चों को कैसे है पढ़ाना?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हर आदमी अपने-अपने चश्मे से देखने और समझने की कोशिश करता है . भारतीय परंपरा में ज्ञान यानी Knowledge को किसी भी इंसान की तरक्की या कहें कल्याण का गेटवे माना गया है . हमारे देश में ज्ञान हासिल करने की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरते हुए…आज के डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम तक पहुंची है . प्राचीन काल में श्रुति परंपरा यानी सुन कर ज्ञान हासिल करना…मतलब, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ज्ञान ट्रांसफर का तरीका सुन कर रहा . जब लिखने की परंपरा ने आकार लिया…तो अक्षरों को पढ़कर समझने और ज्ञान हासिल करने की परंपरा बढ़ी…अब श्रृति और स्मृति यानी गुरु और शिष्य के बीच किताब आ गयी . छात्र किताब पढ़कर ज्ञान हासिल करने लगा … चिंतन-मनन के जरिए ज्ञान की धारा को आगे बढ़ाने लगा . आधुनिक क्लासरूम में किताबों के जरिए ज्ञान हासिल करना भी है और टीचर से अपने Doubt यानी संदेह दूर करना भी . मुश्किल विषयों को टीचर ब्लैक बोर्ड पर टेबल या चित्र के जरिए समझाने की कोशिश करते हैं . लेकिन, AI हर छात्र को उसकी दिमागी क्षमता के हिसाब से पढ़ने और समझने की सुविधा देता है…जो छात्र सुनकर किसी मुश्किल विषय को समझ पाता है – तो उसे Audio के रूप में ज्ञान हासिल करने की सुविधा उपलब्ध है…जो पढ़कर आसानी से समझ सकता है – उसे Text Form में ज्ञान मिलता है..जो वीडियो के जरिए आसानी से समझ सकता है – उसे एक आसान वीडियो के जरिए फिजिक्स या केमेस्ट्री के सूत्र समझा सकता है . ज्ञान को बेहतर और आसान तरीके से बच्चों के दिमाग में बैठाने में AI Smart Guru की भूमिका में आता जा रहा है . ऐसे में स्कूल से ही छात्रों को AI का सही इस्तेमाल सिखना जरूरी है .
---विज्ञापन---
दुनिया जिस रफ्तार से बदल रही है उसमें बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की बेहतर ट्रेनिंग के छात्रों का भविष्य नहीं बन सकता है. बहुत तेजी से बदलती तकनीक के दौर में पढ़ाई के पुराने तौर-तरीके बच्चों के बेहतर करियर की गारंटी नहीं हैं . इसलिए…AI की बुनियादी शिक्षा स्कूल से देने के प्लान को तेजी से जमीन पर उतारा जा रहा है . हमारे देश में खड़े स्कूलों के क्लासरूम में AI तेजी से अपनी जगह बनाता जा रहा है .
---विज्ञापन---
इंटरनेट की ताकत से लैस स्मार्टफोन ने जनरेटिव AI को लोगों के हाथों में ला दिया है … ऐसे में स्टूडेंट AI को गुरु, गाइड या दोस्त बनाकर अपनी Speed, Skill, Efficiency कई गुना बढ़ा सकते हैं . गंभीर से गंभीर विषय और जटिल सूत्रों अपनी समझ और क्षमता के हिसाब से सीख सकता है..दुनिया में तेजी से होते बदलावों के हिसाब से नई - नई Skill सीख सकता है . पहले से सीखी Skill Update या Upgrade कर सकता है… इस साल तीसरी क्लास से स्कूलों में AI और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई शुरू कर दी गई है…जो पूरी तरह National Education Policy 2020 के सुधारों के हिसाब से है… NCERT ने क्लास 6 की Vocational Education में AI का चैप्टर जोड़ा है…जिसका मकसद है छात्रों को एआई की प्रैक्टिकल जानकारी देना .
---विज्ञापन---
स्कूली पढ़ाई में शुरुआती दौर से ही बच्चों को अगर एआई के बारे में बताया या सिखाया जाएगा … तो इससे उनके भीतर तकनीक के बारे में सोचने और काम करने की क्षमता विकसित होगी…शिक्षा में AI का मतलब है स्मार्ट टेक्नोलॉजी की मदद से सीखने और सिखाने की प्रक्रिया को पहले से बेहतर बनाना… AI और चैटबॉट की क्लासरूम में एंट्री का ये बिल्कुल मतलब नहीं है कि अब टीचरों की जरूरतों नहीं है. लेकिन, AI क्लास रूम में टीचरों की भूमिका और पढ़ाने के तौर-तरीकों को जरूर बदल रहा है . उनके दूसरे रूटीन काम हल्के हो रहे हैं - इससे शिक्षकों को पढ़ाने और बच्चों को सिखाने के लिए ज्यादा समय मिलेगा . ऐसे में स्टूडेंट और टीचर एक-दूसरे से बेहतर तरीके से जुड़ पाएंगे .
---विज्ञापन---
हर बच्चे के दिमाग की क्षमता एक जैसी नहीं होती…सभी बच्चे एक रफ्तार से मुश्किल सवालों को हल करना नहीं सीख पाते..
ऐसे में AI असिस्टेड पर्सनलाइज्ड लर्निंग के जरिए हर स्टूडेंट को उसकी जरूरत और क्षमता के हिसाब से पढ़ाया जा सकता है..उसका पढ़ाई-लिखाई में प्रदर्शन सुधारा जा सकता है…ऐसे में AI की मदद से एक औसत छात्र को बेहतरीन छात्र में बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है .
---विज्ञापन---
हर सेक्टर में AI बदलाव की तेज घंटी बजा रहा है. ऐसे में AI साक्षरता एक बेसिक Skill बनता जा रहा है-जिसके बिना कुछ सोचा ही नहीं जा सकता है. ऐसे में छात्रों को शुरू से AI के बारे में जानकारी देना समय की मांग है … स्कूल-कॉलेज में सिलेबस को इतना डायनेमिक बनाने की जरूरत है- जिससे बदलावों को तेजी से कोर्स का हिस्सा बनाया जा सके . छात्रों में ऐसी खास Skill विकसित करने की जरूरत है - जिससे वो हमेशा प्रयोग और बदलाव के लिए तैयार रहे .
स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई में AI से डरने की जगह AI को अपनाने पर जोर होना चाहिए…हमारे देश में भी अब तीसरी क्लास से बच्चों को AI के बारे में बताया जाने लगा है . केंद्र सरकार एआई शिक्षा को आधुनिक और उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक बनाने के लिए बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर चुकी है . एक दौर ऐसा भी था – जब 20 या 25 साल तक शिक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं होता था . लेकिन, जिस रफ्तार से तकनीक में बदलाव आ रहा है … उसमें शिक्षा नीति और सिलेबस दोनों को बहुत डायनेमिक बनाना बहुत जरूरी है . ये भी संभव है कि सिलेबस 4-5 साल में ही आउटडेटेड हो जाए … ऐसे में हायर एजुकेशन में हर साल इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से सिलेबस में बदलना पड़ सकता है . दो तरह के बदलावों की जरूरत होगी . पहली, सिलेबस में किस तरह के टॉपिक होने चाहिए और दूसरा छात्रों को Experimental Knowledge किस तरह मिले ? स्कूल से कॉलेज तक ऐसे शिक्षकों की जरूरत है – जो छात्रों को AI का बेहतर ढंग से इस्तेमाल करना सीखा सकें…जो छात्रों को मशीन से आगे सोचने का रास्ता दिखा सकें ?
केंद्र सरकार अच्छी तरह समझ रही है कि पुराने ढर्रे की पढ़ाई नौकरी दिलाने में बहुत हद तक मददगार नहीं रहनेवाली…ऐसे में सरकार चाहती है कि एआई की पढाई सिर्फ किताबों तक न सीमित न रहे..छात्रों को उद्योग की जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग मिले . ऐसे में मंथन चल रहा है कि किस तरह अपने-अपने क्षेत्र के एक्सपर्ट यानी इंडस्ट्री से जुड़े अनुभवी लोग कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाने या ट्रेनिंग देने पहुंचें..जिससे छात्रों को थ्योरी के साथ इंडस्ट्री का अनुभव भी मिले … जिससे पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट रियल टाइम चुनौतियों से निपटने का तौर-तरीका सीख सकें .
इस बात को बहुत गंभीरता से महसूस किया जा रहा है कि AI के दौर में बदलाव इतना तेज है कि पुराने कोर्स और पुराने ढर्रे की पढाई से छात्रों का भविष्य नहीं बनने वाला है. ऐसे में कोर्स, सिलेबस और पढ़ाई के तौर-तरीकों में समय-समय पर बदलाव की जरूरत है…स्टूडेंट्स को वो Skills सिखाई जाएं - जिसकी जरूरत आज के उद्योग और टेक कंपनियों को है . जेनटेरिव एआई से लैस टूल्स एक कमांड पर लोगों के हर तरह के सवालों के जवाब बहुत प्रोफेशनल अंदाज में देते हैं. छात्रों के डाउट्स क्लियर करने में भी एआई 24X7 टीचर की भूमिका में तैयार है … ऐसे में सवाल उठता है कि जब इंसानी दिमाग वाले ज्यादातर काम AI करेगा तो भविष्य में किस तरह के छात्र और किस तरह के टीचर्स की जरूरत होगी .
AI एक बहुत विशाल, कभी न थकने वाला,सर्वज्ञाता कृत्रिम दिमाग की तरह है - जिसके पास दुनिया के हर तरह के सवालों का हर भाषा में जवाब है…जो सवालों का यूजर की समझ और सुविधानुसार टेक्सट, इमेज, ऑडियो, वीडियो या फिर सभी में एक साथ जवाब दे सकता है . लेकिन, एआई से क्या पूछना है…किन सीमाओं के भीतर पूछना है… जवाब में क्या देखना है? ये सिर्फ और सिर्फ इंसान ही तय करेगा . ऐसे में एआई के दौर में ऐसे टीचर की ज्यादा जरूरत होगी - जो छात्रों को AI से बेहतर तरीके से सवाल पूछना सिखाएं? तकनीक के इस्तेमाल का तौर-तरीका सिखाएं? क्योंकि, अच्छा जवाब हमेशा अच्छे सवाल पर निर्भर करता है .
AI क्लासरूम टीचरों को खत्म नहीं करेगा . लेकिन, ऐसे टीचरों को अधिक प्रासंगिक बना देगा-जो अपने छात्रों को सोचना और बेहतर सवाल करना सिखाएंगे…वो टीचर सफल होंगे- जो छात्रों को मशीन से बेहतर तरीके से काम लेने का हुनर सिखाएंगे …बदलते बाजार और तकनीक के हिसाब से जिंदगी भर सीखने के लिए दिमागी रूप से ट्रेंड करेंगे . आज की तारीख में किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए सोच और काम करने का तरीका बहुत मायने रखता है . इसलिए, AI के दौर में ऐसे टीचर्स की मांग बढ़ने वाली है- जो अपने छात्रों में थ्योरी सिखाने के साथ समस्याओं को सुलझाने की क्षमता विकसित करेंगे .
एआई युग में होते बदलावों के हिसाब से हमारे देश के स्कूल और कॉलेजों के क्लासरूम में बहुत कुछ किया जाना बाकी है. हर कोर्स को Multidisciplinary बनाना जरूरी है - जिसमें AI Literacy अनिवार्य किया जाना चाहिए…हालांकि, एक सच ये भी है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में दशकों से पढ़ाए जा रहे-कोई भी कोर्स पूरी तरह खत्म नहीं होंगे . लेकिन, बिना बदलाव के मौजूदा रूप में वैसे कोर्सेज की अहमियत जरूर दिनों-दिन कम होती जाएगी. क्योंकि, भविष्य एक Skill का नहीं है .
अगले कुछ वर्षों में AI Tools इस्तेमाल करना…Data समझना, Prompting, Automation और Digital Workflow हर Stream के छात्रों के लिए बहुत जरूरी होगा . ऐसे कोर्सेज की पहचान करते हुए सिलेबस नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है – जिनसे छात्रों को डिग्री तो मिलती है . लेकिन, कोई खास Skill या Knowledge नहीं … AI के दौर में रटकर परीक्षा पास करने वाले कोर्स की अहमियत दिनों-दिन घटती जा रही है . क्योंकि, AI तुरंत बता देगा कि मुगल शासक बाबर का बेटा कौन था…पानीपत की लड़ाई कब हुई…प्लासी की लड़ाई में किसने- किसको हराया? भारत में राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है ? सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है? केंद्र और राज्यों के बीच रिश्तों को लेकर संविधान क्या कहता है? संविधान से राज्यपाल को किस तरह की शक्तियां मिली हुई हैं? ऐसे अनगिनत सवालों के परीक्षा में जवाब लिखकर पिछले कई दशकों से डिग्रियां हासिल की जाती रही हैं . इस तरह के सवालों के जवाब जानने वालों को ज्ञानी की कैटेगरी में गिना जाता रहा है . लेकिन, इस तरह के बुनियादी सवालों के जवाब एक क्लिक पर AI से हासिल किया जा सकता है…ऐसे में सवाल उठता है कि फिर इस तरह की पढ़ाई का मतलब क्या है? अब ऐसे कोर्सेज की दरकार महसूस की जा रही है – जो छात्रों को AI की मदद से जानकारी हासिल करने और उस जानकारी के बेहतर इस्तेमाल की तरकीब सिखाते हों … Colleges को हर कोर्स में Internship, Live Projects, Startup exposure और Portfolio Building पर खासतौर से ध्यान देना होगा, जिससे छात्रों की व्यवहारिक यानी Practical समझ बेहतर हो सके…आज की तारीख में ज्यादातर बच्चे अपना करियर इंजीनियरिंग में बनाना चाहते हैं . लेकिन, बड़ा सवाल ये है कि AI के दौर में किस तरह के इंजीनियरों की जरूरत होगी? क्या इंजीनियरिंग की पारंपरिक ब्रांच में डिग्री के बाद नौकरी मिलना मुश्किल होगा … क्या हमारे देश के ज्यादातर इंजीनियरिंग कॉलेज भी बेरोजगार पैदा करनेवाले फैक्ट्री बन चुके हैं?
भारत में करीब 9 हजार इंजीनियरिंग कॉलेज हैं . जिसमें बड़ी संख्या प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की है … इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले ज्यादातर स्टूडेंट IIT में दाखिला चाहते हैं.लेकिन, वहां सीटें हैं करीब 18 हजार…जिसमें इंजीनियरिंग की हर ब्रांच शामिल है…IITs की साख और पढ़ाई को वर्ल्ड क्लास माना जाता है. लेकिन, भारत के नक्शे में दिख रहे ज्यादातर इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर संभवत: वैसा नहीं है- जो बीटेक डिग्री धारकों को उनकी Skill के हिसाब से नौकरी दिला सके. ऐसे में तकनीक में बहुत तेजी से आते बदलावों ने इंजीनियरिंग की कई ब्रांचों के सिलेबस और ट्रेनिंग मॉड्यूल में बदलाव की घंटी बजा दी है .
एआई ने रूटीन कोडिंग और डिजाइनिंग के काम को बहुत आसान बना दिया है . ऐसे में AI का इस्तेमाल कर इंजीनियर अपनी उत्पादकता कई गुना बढ़ा सकते हैं . कल तक जो काम इंजीनियर हफ्तों या महीनों में करते थे - वो अब बेसिक ट्रेनिंग के साथ एक सामान्य समझ वाला कर्मचारी मिनटों में कर लेता है . ऐसे में इंजीनियरिंग कॉलेजों के सामने अपने कोर्स को इस तरह डिजाइन करने की जरूरत है - जिससे पास आउट होने के बाद छात्र इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से फिट बैठें . इंजीनियरिंग कॉलेजों को थ्यौरी से अधिक प्रैक्टिकल अनुभव पर अधिक फोकस करना होगा..भविष्य के इंजीनियरों को इस तरह तैयार करना होगा - जिससे रूटीन काम तकनीक की मदद से करें और खुद मुश्किल समस्याओं के समाधान और इनोवेशन पर फोकस करें.
ऐसे में भविष्य में मशीन लर्निंग और एआई इंजीनियर, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन इंजीनियर, डेटा इंजीनियर, साइबर सुरक्षा इंजीनियर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर जो पारंपरिक कोडिंग के साथ एआई कोडिंग के अत्याधुनिक टूल्स का बेहतरीन इस्तेमाल जानते हों, एथिकल एआई एक्सपर्ट की मांग बढ़नी तय मानी जा रही है. भविष्य में ऐसे इंजीनियरों की ज्यादा डिमांड के चांस हैं- जो AI System बनाने … Maintain करने और Secure करने में माहिर होंगे…जो Industry Demand + AI Compatibility + Human Skills का कॉम्बो होंगे…जो इंडस्ट्री की रियल टाइम समस्याओं को सुलझाने में अहम भूमिका में रहेंगे .
भारत में कोर इंजीनियरिंग की मांग कभी खत्म नहीं होगी…लेकिन, इंजीनियरिंग के हर क्षेत्र में थोड़ा कम या बहुत ज्यादा बदलाव तो तय है…बेसिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, मैन्युअल टेस्टिंग, पुरानी तकनीक वाले इलेक्ट्रिकल- मैकेनिकल कोर्स, मैन्युअल ड्राफ्टसमैन, पारंपरिक नेटवर्क इंजीनियरिंग का महत्व कम हो सकता है . ऐसे में जहां High Skill Engineers का भारी-भरकम पैकेज के साथ बड़ी कंपनियां दोनों हाथ फैलाकर स्वागत करती दिख सकती हैं-वहीं भारी तादाद में इंजीनियरिंग डिग्री के साथ बाजार में घूमने वाले Low Skill Engineers के लिए साधारण नौकरी पाना भी पहाड़ चढ़ने जैसा हो सकता है .
हमारे देश में हर साल करीब 15 लाख इंजीनियर तैयार होते हैं . इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रोजगार दर 72 फीसदी है . लेकिन, इसमें से कुछ को ही उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के हिसाब से नौकरी मिल पाती है . इंजीनियरिंग के क्षेत्र में AI बहुत तेजी से बदलाव ला रहा है . ऐसे में पारंपरिक और बेसिक स्किल्स वाले इंजीनियरों के लिए भविष्य में नौकरी मिलना आसान नहीं होगा… बेसिक कोडिंग के लिए भी अब इंजीनियरों की जरूरत नहीं होगी . दोहराव यानी Repetitive काम AI कुछ सेकेंड में कर देगा – जिसे करने में सामान्य इंजीनियर कई दिन लगाते थे . ऐसे में इंजीनियरिंग की सभी Stream में AI के बेहतर इस्तेमाल के साथ-साथ व्यवहारिक कौशल को जोड़ना बहुत जरूरी है . इसी तरह मेडिकल यानी इलाज की दुनिया में भी AI का तेजी से इस्तेमाल बढ़ रहा है . भविष्य में वहीं डॉक्टर कामयाब होंगे – जो अत्याधुनिक तकनीक और मेडिकल साइंस दोनों को साथ-साथ लेकर आगे बढ़ेंगे . क्योंकि, वैसे डॉक्टर मरीजों का बेहतर इलाज कर सकेंगे – जो AI Integrated Specialist होंगे…जो AI की मदद से कम से कम चीड़-फाड़ में बीमारियों का सटीक इलाज कर सकें… जो AI की मदद से Personalised Treatment में माहिर होंगे…जो वर्चुअली अपने मरीजों की सेहत की निगरानी कर सकेंगे . मतलब, AI ऑपरेटेड डायग्नोस्टिक्स, जीनोमिक्स और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म पर काम करनेवाले डॉक्टरों की मांग बढ़ेगी . ऐसे में मेडिकल कॉलेजों के लिए पढ़ाई में AI के बेहतर इस्तेमाल का हुनर सीखना बहुत जरूरी हो गया है .
किसी इंसानी दिमाग की तुलना में AI लंबे-चौड़े, भारी-भरकम मेडिकल डाटा को सेकेंडों में समझ लेता है. एक्स-रे,CT स्कैन, और MRI जैसी रिपोर्ट को सेकेंडों में डिकोड करता है…जिससे डॉक्टर बीमारी के संकेतों को सेकेंडों में पकड़ लेते हैं . ऐसे में डॉक्टरी की पढ़ाई सिर्फ भारी-भरकम किताबों तक सीमित नहीं रहने वाली…बल्कि इसमें तेजी से AI पावर्ड वर्चुअल रियलिटी
और सिम्युलेटर अपनी जगह बना रहे हैं .
AI मेडिकल छात्रों के लिए पर्सनल ट्यूटर की तरह काम करने में सक्षम है … एआई पावर्ड प्लेटफॉर्म MBBS छात्रों को शरीर की
मुश्किल रचना को 3D और वर्चुअल रिटलिटी के जरिए समझा रहे हैं . एआई ऐसे मरीज बनाने में सक्षम हैं - जिसमें बीमारियों के अलग-अलग लक्षण दिखते हों…ऐसे में Medical छात्र बिना रिस्क प्रैक्टिस कर सकते हैं . इंसान का शरीर 30 लाख करोड़ से अधिक कोशिकाओं से बना है…जो एक खास पैटर्न से नियंत्रित होकर आगे बढ़ती हैं. इसमें हेरफेर होने पर इंसान के शरीर में कैंसर जैसी बीमारी घर बनाने लगती है..कोशिकाओं के व्यवहार में बदलाव की पहचान में AI से आसानी हो रही है..कैंसर की पहचान से लेकर उपचार तक में AI बहुत मददगार साबित हो रहा है .
AI की मदद से कैंसर ट्यूमर की पहचान के बाद अत्याधुनिक तकनीक से बहुत कम समय में इलाज हो रहा है. हमारे देश में डायबिटीज मरीजों की संख्या करीब 10 करोड़ से अधिक है.. AI की मदद से आसानी से पता लगाया जा रहा है कि किसी खास मरीज में शुगर लेवल बढ़ने की असली वजह क्या है? ऐसे में हर मरीज के हिसाब से सटीक इलाज तय करने में सहूलियत हो रही है . ऐसे में बीमारी की पहचान से लेकर मुश्किल ऑपरेशन करने तक में AI का तेजी से इस्तेमाल बढ़ रहा है. ऐसे में भविष्य के डॉक्टरों को इस तरह तैयार करना होगा- जिससे इलाज में AI तकनीक के बेहतर इस्तेमाल में भी एक्सपर्ट बन सकें .
मेडिकल इंजीनियरिंग से लेकर दवा विकसित करने तक में एआई का दखल तेजी से बढ़ रहा है . ऐसे में AI Integrated Specialists, Genomics & Precision Medicine Specialist, Virtual Health Coach के साथ Human Centric Soft Skills वाले डॉक्टर्स मरीजों के इलाज को आसान और सस्ता बनाते दिख सकते हैं . AI का बढ़ता इस्तेमाल अस्पतालों के अंदरुनी सिस्टम को भी आसान बना रहा है और डॉक्टरों के कागजी काम को हल्का करता जा रहा है… ऐसे में मेडिकल की पढ़ाई में AI का बेहतर इस्तेमाल का हुनर बुनियादी Skills में गिना जाने लगा है .
AI ने दुनिया के सामने नई तरह की चुनौतियां रखी हैं . आम से खास बनने की… Repetitive काम करने की जगह Creative काम करने की . आज की तारीख में इंसान बनाम एआई नहीं…बल्कि एआई को जानने वाला इंसान बनाम एआई को नहीं जानने वाला इंसान के बीच प्रतिस्पर्धा है . एआई किसी को बेरोजगार नहीं करेगा…किसी की नौकरी भी नहीं छिनेगा…नौकरियों से वो लोग बाहर होंगे, जो AI का इस्तेमाल करना नहीं सिखेंगे. कारोबार और कृषि में भी वो लोग पिछड़ जाएंगे – जो AI को शत्रु की तरह देखेंगे . आज की तारीख में स्कूल से कॉलेज तक छात्रों को इस तरह तैयार करना होगा – जिससे हर सेक्टर में युवा AI को एक मजबूत सहयोगी के रूप में देखे… इस तकनीक के इस्तेमाल से बेहतर नतीजे कैसे हासिल किए जा सकते हैं- इसका हुनर सीखें ? समय-समय पर तकनीक में आते बदलावों के हिसाब से खुद को अपडेट और अपग्रेड करे…ये सच है कि AI इंसानी सवालों का जवाब दे सकता है…लेकिन, इंसानी दिमाग जैसा संवेदनशील नहीं हो सकता . इंसान की तरह नैतिक और अनैतिक में फर्क नहीं कर सकता… AI को कमांड तो इंसानी दिमाग ही देगा…ऐसे में स्कूल से कॉलेज तक पढ़ाई में एआई को अपनाने, कमांड देने और तकनीक से काम लेने का हुनर सिखाने की जरूरत है .