Bharat Ek Soch: नीतीश कुमार बिहार के नौवीं बार मुख्यमंत्री बने हैं। रविवार को उन्होंने एक बार फिर सीएम पद की शपथ ली। वह एक बार फिर एनडीए के खेमे में हैं। अब सवाल ये कि नीतीश कुमार के पास ऐसी कौन सी जादुई छड़ी, जादुई मंत्र है, जिसमें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वही बने रहते हैं? नीतीश कुमार के सीएम बनने के बाद कई सवाल हैं। जैसे- बिहार पॉलिटिक्स में अब जेडीयू का क्या होगा? ऐसे सभी सुलगते सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे- अपने स्पेशल शो 'नीतीश को समझना नामुमकिन है' में...

सितारे हमेशा मजबूत

इसे नीतीश कुमार की सत्ता में बने रहने की बाजीगरी का नाम दिया जाए या जरूरत के मुताबिक नए सहयोगियों को जोड़ने का हुनर...उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बनाए रखने वाले सितारे हमेशा मजबूत रहे हैं। नौंवी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर बख्तियारपुर के मुन्ना ने एक नया रिकॉर्ड बना दिया। नौ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड अबतक भारत में किसी भी राजनेता के नाम नहीं है। नीतीश की राजनीति का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि वो बड़ी सफाई से पुराने दोस्तों से हाथ झटक कर नए दोस्त बना लेते हैं। जिसमें मुख्यमंत्री की कुर्सी उनके पास ही रहती है। सिर्फ उप-मुख्यमंत्री बदल जाते हैं। अब JDU के साथ आरजेडी की जगह बीजेपी है, उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी पर तेजस्वी यादव की जगह बीजेपी के सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा हैं। https://youtube.com/live/QBc6HHmkYfw?feature=share माना जा रहा है कि नीतीश बहुत पहले भांप गए थे कि विपक्षी महागठबंधन में उन्हें कुछ खास नहीं मिलने वाला है। ऐसे में G-20 के डिनर में दिल्ली पहुंच कर नीतीश कुमार ने एनडीए को लेकर सॉफ्ट होने का पहला संकेत दिया। माना ये भी जा रहा है कि इसके बाद नीतीश का बीजेपी का साथ भीतरखाने संवाद की कड़िया जुड़ने लगीं। शायद, नीतीश के दिमाग में चल रहे नए समीकरण को उनके करीबी माने जानेवाले ललन सिंह भी नहीं समझ पाए। ये भी पढ़ें: अयोध्या विवाद में कैसे दर्ज हुआ पहला मुकदमा, आधी रात को मूर्तियों के प्रकट होने की क्या है कहानी?  ये भी पढ़ें: मुगलों के आने के बाद कितनी बदली श्रीराम की नगरी, अकबर ने क्यों चलवाईं राम-सीता की तस्वीर वाली मुहरें?  ये भी पढ़ें: अयोध्या कैसे बनी दुनिया के लोकतंत्र की जननी, किसने रखी सरयू किनारे इसकी बुनियाद?  ये भी पढ़ें: क्या एटम बम से ज्यादा खतरनाक बन चुका है AI? ये भी पढ़ें: पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने कैसे किया ‘भारतीय कूटनीति’ को मजबूत? ये भी पढ़ें: पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक जीत की राह किसने आसान बनाई? ये भी पढ़ें: 1971 में प्रधानमंत्री को आर्मी चीफ ने क्यों कहा- अभी नहीं! ये भी पढ़ें: भारत को एकजुट रखने का संविधान सभा ने कैसे निकाला रास्ता?