FASTag Annual Pass में बच गईं ट्रिप्स तो क्या होगा? रिफंड मिलेगा या आगे एड होंगी Trips, जानें NHAI का नियम

FASTag एनुअल पास में 1 साल या 200 ट्रिप तक टोल का खर्च बचाने में मदद करता है, लेकिन अगर वैलिडिटी खत्म होने तक आपकी ट्रिप्स बच जाती हैं तो क्या उनका रिफंड मिलेगा या क्यो वो ट्रिप अगले साल कैरी फॉरवर्ड हो सकती हैं.

FASTag Annual Pass

FASTag Annual Pass से जुड़े से बातें हर यूजर को जनाना जरूरी हैं. (Image Credit-AI)

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अगर आप अक्सर नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे पर कार सफर करते हैं, तो फास्टैग एनुअल पास आपके लिए काफी काम का हो सकता है. देश में हाईवें और एक्सप्रेसव के कई रास्तों पर सफर के दौरान टोल टैक्स देना पड़ता है. ऐसे में सरकार ने FASTag Annual Pass बार-बार टोल देने की परेशानी कम करता है. महज 3075 रुपये में मिलने वाला यह पास 1 साल तक या 200 ट्रिप तक इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन यहां सलाव आता है कि अगर साल में हमारी ट्रिप पूरी नहीं होती और बची रह जाती हैं तो क्या इसका हमें रिफंड मिलता है या ये ट्रिप्स आगे जुड़ दी जाती हैं. तो इसका जवाब है-ना. इसे विस्तार से समझते हैं.

बची हुई ट्रिप्स का क्या मिलेगा रिफंड?

FASTag Annual Pass खरीदते समय मिलने वाला फायदा आपको उसी समय एकुश्त मिल जाता है. अगर पास की वैलिडिटी खत्म होने के बाद इसमें कुछ ट्रिप्स बच जाती हैं तो NHAI की पॉलिसी के मुताबिक उन बची हुई ट्रिप्स के बदले कोई डिस्काउंट या रिफंड नहीं दिया जाता. यानी पास खत्म होते ही बची हुई ट्रिप्स भी खत्म हो जाती हैं. इन्हें अगले साल के पास में कैरी फॉरवर्ड करने का भी कोई प्रावधान नहीं है.

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एक साल में मिलती हैं 200 ट्रिप्स

FASTag Annual Pass की वैलिडिटी दो चीजों पर निर्भर करती है. यह पास जारी होने की तारीख से 12 महीने तक या अधिकतम 200 ट्रिप्स तक वैध रहता है. इनमें से जो सीमा पहले पूरी होती है, उसी समय पास की वैलिडिटी खत्म हो जाती है. इसलिए सिर्फ यह मानकर न चलें कि पास पूरे 12 महीने चलेगा.

200 ट्रिप पहले पूरी हुईं तो पास तुरंत खत्म हो जाता है?

इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं. मान लीजिए आपने FASTag Annual Pass लिया और सिर्फ 6 महीने में ही 200 ट्रिप पूरी कर लीं. ऐसे में आपका पास 6 महीने में ही खत्म हो जाएगा. इसके बाद बची हुई अवधि के लिए आपको कोई अतिरिक्त ट्रिप नहीं मिलेगी. यानी 12 महीने पूरे होने का इंतजार नहीं किया जाएगा.

दूसरी कंडीशन में अगर आपने पूरे साल में सिर्फ 100 या 120 ट्रिप्स का इस्तेमाल किया, तो भी पास 12 महीने पूरे होते ही एक्सपायर हो जाएगा. इस स्थिति में आपके खाते में बची 80-100 ट्रिप्स का इस्तेमाल आगे नहीं किया जा सकेगा. इन ट्रिप्स को अगले साल के पास में जोड़ने या इनके बदले पैसे लेने का विकल्प नहीं मिलता है.

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क्या पास खत्म होने के बाद FASTag भी खत्म हो जाता है?

FASTag Annual Pass का 12 महीने का टाइम या 200 ट्रिप्स की लिमिट पूरी होती ही आपका FASTag अपे आप सामान्य FASTag में बदल जाता है. इसके बाद जब आप किसी टोल प्लाजा से गुजरेंगे तो पहले की तरह सामान्य टोल दर के हिसाब से पैसे कटेंगे. यह रकम आपके लिंक बैंक अकाउंट या FASTag वॉलेट से काटी जाएगी.

दोबारा लेना है तो फिर देने होंगे 3,075 रुपये

अगर आप Annual Pass की सुविधा आगे भी जारी रखना चाहते हैं, तो पास को दोबारा एक्टिवेट कराना होगा. इसके लिए फिर से 3,075 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा. पुराने पास की बची हुई ट्रिप्स को नए पास में जोड़कर इस्तेमाल करने का विकल्प नहीं है.

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ज्यादा हाईवे चलने वालों के लिए ज्यादा काम का

FASTag Annual Pass का फायदा उन लोगों को ज्यादा मिल सकता है जो लगातार नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे पर सफर करते हैं. इस स्कीम का मकसद ऐसे चालकों को टोल खर्च में 70 से 80 फीसदी तक की बचत देना है. अगर कोई व्यक्ति महीने में करीब 10 से 15 बार नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा से गुजरता है, तो उसके लिए यह पास काफी उपयोगी हो सकता है.

कम सफर करते हैं तो पहले हिसाब लगा लें

अगर आप साल में सिर्फ 2 या 3 बार ही लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, तो Annual Pass लेने से पहले अपने सफर का हिसाब लगा लेना बेहतर है. इसकी वजह यह है कि पास में मिलने वाली ट्रिप्स इस्तेमाल न होने पर वापस नहीं मिलतीं. ऐसे में कम यात्रा करने वाले लोगों के लिए 3,075 रुपये का Annual Pass उतना उपयोगी नहीं हो सकता. वहीं, जो लोग लगातार हाईवे पर सफर करते हैं, उनके लिए इसकी ट्रिप लिमिट का इस्तेमाल करना आसान हो सकता है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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