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falseसेकेंड हैंड कार खरीदने जा रहे हैं? इन तरीकों से पता करें गाड़ी की सही कीमत, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान

सेकेंड हैंड कार खरीदते समय सिर्फ कम कीमत देखकर डील फाइनल करना भारी पड़ सकता है. (Image Credit-AI)
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नई कार खरीदने के मुकाबले सेकेंड हैंड कार खरीदना काफी सस्ता पड़ सकता है. कम बजट में अपनी पसंद की कार और ज्यादा फीचर्स वाला मॉडल भी मिल जाता है. लेकिन पुरानी कार खरीदते समय सबसे जरूरी है कि आप उसकी सही कीमत जानते हों. कई बार लोग कार की हालत और मार्केट वैल्यू जाने बिना ज्यादा पैसे दे देते हैं. ऐसे में डील फाइनल करने से पहले कुछ आसान चीजों को जांच करके आप पता लगा सकते हैं कि कार की कीम वाकई कितनी होनी चाहिए.

Second-hand Car की सही कीमत कैसे पता करें?

सबसे पहले कार की बॉडी और इंटीरियर देखें

पुरानी कार की कीमत तय करने से पहल उसकी बाहरी हालत जरूर देखें. बॉडी पर डेंट, खरोंच और जंग के निशान चेक करें. इसके अलावा चारों टायर की हालात हेडलाइट और टेललाइट भी देखें. अगर कार पर ज्यादा डेंट या जंग है, तो इसका असर उसकी कीमत पर पड़ सकता है. कार की बाहरी हालत अच्छी होने का मतलब यह नहीं है कि अंदर से भी गाड़ी अच्छी होगी. सीटों, अपहोल्स्ट्री और डैशबोर्ड की कंडीशन देखें. इसके साथ ही AC, ऑडियो सिस्टम और बाकी इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स को चलाकर जरूर देखें.

इंजन की हालत को नजरअंदाज न करें

कार का इंजन सबसे जरूरी हिस्सों में से एक है. इंजन के आसपास तेल लीक, जंग या किसी वायरिंग कनेक्शन में खराबी तो नहीं है, यह देखें. इंजन ऑयल का लेवल और उसका रंग भी चेक करना चाहिए. अगर इंजन से कोई असामान्य आवाज आ रही है या तेल लीक हो रहा है, तो खरीदने से पहले मैकेनिक से जांच कराना बेहतर रहेगा.

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टेस्ट ड्राइव जरूर लें

सेकेंड हैंड कार खरीदते समय टेस्ट ड्राइव छोड़ना बड़ी गलती हो सकती है. गाड़ी चलाकर इंजन की आवाज, ब्रेक, स्टीयरिंग और गियर शिफ्टिंग को चेक करें. टेस्ट ड्राइव से कार की वास्तविक कंडीशन का काफी अंदाजा मिल सकता है.

मॉडल और वेरिएंट की जानकारी लें

कार की सही कीमत पता करने के लिए सबसे पहले उसका मॉडल, मैन्युफैक्चरिंग ईयर और वेरिएंट पता करें. एक ही कार के अलग-अलग वेरिएंट की कीमत में काफी अंतर हो सकता है. इसके बाद कार का माइलेज देखें. आमतौर पर कार कितनी चली है, इससे भी उसकी कीमत पर सीधा असर पड़ता है.

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सर्विस रिकॉर्ड चेक करें

कार का सर्विस रिकॉर्ड पुरानी गाड़ी की हालत समझने में काफी मदद करता है. अगर कार की नियमित सर्विस होती रही है और ऑथराइज्ड डीलर के पास इसका रिकॉर्ड मौजूद है, तो यह अच्छी बात है. सर्विस हिस्ट्री से यह भी पता चल सकता है कि कार में पहले कोई बड़ी मरम्मत या पार्ट रिप्लेसमेंट हुआ है या नहीं.

ऑनलाइन टूल से भी पता कर सकते हैं कीमत

आजकल इंटरनेट पर कई ऑनलाइन कार वैल्यूएशन टूल मौजूद हैं. इनमें कार का मॉडल, साल, माइलेज और दूसी जानकारी डालकर उसकी अनुमानित कीमत पता की जा सकत है. इससे आपको एक बेरिस आइडिया मिल जाता है कि बाजार में कार की कीमत लगभग कितनी चल रही है.सिर्फ एक वेबसाइट पर दिखाई गई कीमत देखकर डील फाइनल न करें. अपने शहर या आसपास के बाजार में उसी मॉडल और लगभग उसी साल की दूसरी कारों की कीमत भी देखें.

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कार की उम्र के साथ घटती है कीमत

पुरानी कार की कीमत तय करने में डेप्रिसिएशन यानी कीमत में होने वाली गिरावट का भी बड़ा रोल होता है. IRDAI के मुताबिक आमतौर पर 1 साल पुरानी कार नई ऑन-रोड कीमत से करीब 15 से 20 प्रतिशत तक सस्ती हो जाती है. वहीं 3 साल पुरानी कार की कीमत में करीब 40 से 45 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है.

5 साल पुरानी कार की कीमत कितनी घटती है?

लगभग 5 साल पुरानी कार अपनी मूल कीमत का करीब 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा खो सकती है. हालांकि यह हर कार के लिए एक जैसा नहीं होता. मॉडल, कंडीशन, माइलेज, ब्रांड और बाजार की मांग के हिसाब से कीमत अलग हो सकती है.

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दस्तावेज पूरे हैं या नहीं, जरूर देखें

सेकेंड हैंड कार खरीदते समय सिर्फ गाड़ी की हालत देखना काफी नहीं है. RC, इंश्योरेंस और PUC जैसे जरूरी दस्तावेज चेक करें. अगर कार पर लोन था तो बैंक की NOC भी जरूर देखें. दस्तावेज अधूरे होने पर कार की कीमत कम हो सकती है और आगे चलकर परेशानी भी हो सकती है.

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