कितने साल चलती है कार की बैटरी? ये 4 गलतियां कर रहीं इसकी उम्र कम, जानें कैसे बढ़ाएं लाइफ

कार की बैटरी अचानक जवाब दे दे तो बीच रास्ते परेशानी बढ़ सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कार की बैटरी आमतौर पर कितने साल चलती है और किन गलतियों से इसकी उम्र जल्दी कम हो जाती है? चलिए यहां समझते हैं.

Car Battery Tips

कार की बैटरी अगर खराब हो जाए तो कार को स्टार्ट करने में दिक्कत आ सकती है. (Image Credit-AI)

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कार की बैटरी छोटी सी दिखती है, लेकिन गाड़ी स्टार्ट करने से लेकर कई जरूरी इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स चलाने तक इसका बड़ा रोल होता है. बैटरी कमजोर पड़त ही कार स्टार्ट होने मे परेशानी आने लगती है और कई इलेक्ट्रॉनिक फंक्शन भी ठीक से काम नहीं करते. ऐसे में सवाल उठाता है कि आखिर कार की बैटरी कितने साल चलती है? इसका कोई एक तय जवाब नहीं है. बैटरी की उम्र काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आप कार को किस तरह इस्तेमाल करते हैं.

कितने साल चलती है कार की बैटरी?

ऑटोमोटिव सर्विस एसोसिएशन के मैकेनिकल डिवीजन डायरेक्टर थॉमस पिप्पो के मुताबिक, कुछ लोगों की कार बैटरी बिना किसी बड़ी परेशानी के 10 साल तक चल जाती है. वहीं कुछ मामलों में बैटरी 3 से 5 साल में ही खराब हो जाती है. यानी बैटरी की लाइफ तय करने में कार का इस्तेमाल, मौसम और ड्राइविंग पैटर्न जैसी चीजों की बड़ी भूमिका होती है.

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बैटरी जल्दी खत्म या खराब होने वजह

ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स

नई कारों में कई ऐसे फीचर्स होते हैं जो इंजन बंद होने के बाद भी कुछ समय तक काम करते रहते हैं. ऑटोमैटिक हेडलाइट्स इसका एक उदाहरण हैं. अगर इंजन बंद करने के बाद लाइट या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स लंबे समय तक चलते रहें, तो बैटरी पर ज्यादा लोड पड़ता है और वह जल्दी डाउन हो सकती है.

बार-बार स्टार्ट करने से भी पड़ता है असर

कार को जितनी बार स्टार्ट किया जाता है, बैटरी पर उतना ही लोड पड़ता है. गाड़ी चलने के बाद अल्टरनेटर बैटरी दोबारा चार्ज करता है, लेकिन बार-बार इंजन स्टार्ट करने की आदल लंबे समय में बैटरी की लाइफ पर असर डाल सकती है.

मौसम भी बैटरी पर डालता है असर

मौसम का असर भी कार की बैटरी पर पड़ता है. बहुत ज्यादा गर्मी या बहुत ज्यादा ठंड में इंजन को स्टार्ट करने के लिए बैटरी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लगातार ऐसे मौसम में कार चलाने से बैटरी की उम्र कम हो सकती है.

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छोटी ड्राइव भी पड़ सकती है भारी

अगर आप रोजाना कार से सिर्फ 10-15 मिनट का छोटा सफर करते हैं, तो इसका असर भी बैटरी पर पड़ सकता है. इतनी छोटी ड्राइव में अल्टरनेटर को बैटरी को दोबारा पूरी तरह चार्ज करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता. इससे धीरे-धीरे बैटरी की क्षमता कम हो सकती है.

बैटरी खराब होने के संकेत

  • अगर कार स्टार्ट करते समय इंजन पहले के मुकाबले ज्यादा समय लेने लगा है, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह कमजोर बैटरी का संकेत हो सकता है. 
  • ट्रैफिक सिग्नल या रेड लाइट पर कार रुकने के दौरान अगर हेडलाइट या केबिन लाइट सामान्य से ज्यादा डिम होने लगे, तो यह भी बैटरी की परेशानी का संकेत हो सकता है. 

5 मिनट का टेस्ट भी दे सकता है संकेत

रीडर्स डाइजेस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इंजन बंद करके कार की चाबी ऑन रखने पर अगर 5 मिनट के अंदर कार की स्क्रीन या लाइट्स बंद होने लगें, तो बैटरी बदलने का समय आ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार अच्छी बैटरी इंजन बंद होने के बाद भी करीब 20 से 30 मिनट तक लोड झेल सकती है.

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ऐस बढ़ाएं कार बैटरी की उम्र

साल में एक बार चेकअप जरूरी

बैटरी को लंबे समय तक चलाने के लिए साल में कम से कम एक बार किसी मैकेनिक से इसकी जांच करवाएं. इसके साथ ही बैटरी के टर्मिनल्स की सफाई भी करवाते रहें. समय पर चेकअप कराने से छोटी समस्या का पता बैटरी पूरी तरह खराब होने से पहले लगाया जा सकता है.

सस्ती बैटरी खरीदने से बचें

नई बैटरी खरीदते समय केवल कीमत देखकर फैसला न करें. अच्छी क्वालिटी की बैटरी थोड़ी महंगी हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है. बहुत सस्ती बैटरी जल्दी खराब हो जाए तो बार-बार बदलने का खर्च बढ़ सकता है.

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बैटरी खरीदते समय वारंटी जरूर देखें

नई बैटरी लेते समय उसकी वारंटी पर भी ध्यान दें. ज्यादा वारंटी वाली बैटरी की कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन खराब होने की स्थिति में इसका फायदा मिलता है. वहीं कुछ सस्ती बैटरियों के साथ वारंटी कम मिलती है या वारंटी होती ही नहीं है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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