सेकंड हैंड कार खरीदते समय इन 4 तरह की गाड़ियों से बचें, छोटी सी लापरवाही पड़ेगी भारी, बढ़ेगा खर्च

सेकंड हैंड कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो सिर्फ उसकी चमक-दमक देखकर फैसला न करें. कुछ गलतियां आपको बाद में हजारों रुपये का नुकसान करा सकती हैं. जानिए, पुरानी कार खरीदने से पहले किन बातों की जांच करना जरूरी है.

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सेकंड हैंड कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

आज के समय में कार सिर्फ स्टेटस सिंबल नहीं, बल्कि जरूरत भी बन गई है. ऑफिस जाने से लेकर परिवार के साथ घूमने तक, कार कई काम आसान कर देती है. लेकिन नई कार की कीमत ज्यादा होने के कारण हर कोई इसे नहीं खरीद पाता. ऐसे में लोग सेकंड हैंड कार खरीदना पसंद करते हैं. कम कीमत में अच्छी कार मिल जाए तो यह फायदे का सौदा हो सकता है. हालांकि, पुरानी कार खरीदते समय सिर्फ उसकी चमक-दमक और कम कीमत देखकर फैसला करना भारी पड़ सकता है. कई बार गाड़ी बाहर से बिल्कुल ठीक दिखती है, लेकिन उसके इंजन, गियरबॉक्स या दूसरे जरूरी पार्ट्स में खराबी होती है. ऐसे में बाद में मरम्मत पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. इसलिए पुरानी कार खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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पानी में डूबी या बड़े एक्सीडेंट वाली कार न खरीदें

अगर आप सेकंड हैंड कार खरीदने जा रहे हैं, तो सबसे पहले पता करें कि गाड़ी कभी बाढ़ या भारी बारिश के पानी में तो नहीं डूबी थी. पानी कार के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, वायरिंग और सेंसर को नुकसान पहुंचा सकता है. कई बार ये खराबियां तुरंत सामने नहीं आतीं, लेकिन कुछ समय बाद गाड़ी में परेशानी शुरू हो जाती है. 

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साथ ही पुरानी कार खरीदते समय यह भी पता करना जरूरी है कि गाड़ी पहले किसी बड़े हादसे का शिकार तो नहीं हुई थी. खासकर अगर कार के चेसिस या फ्रेम को नुकसान पहुंचा है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार मरम्मत के बाद कार बाहर से बिल्कुल ठीक दिखती है, लेकिन अंदर से उसकी मजबूती प्रभावित हो सकती है. ऐसे में सौदा करने से पहले किसी भरोसेमंद मैकेनिक से कार की अच्छी तरह जांच कराएं.

बिना कागजात और सर्विस रिकॉर्ड वाली कार से रहें दूर

कार खरीदने से पहले उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), वैध इंश्योरेंस और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की जांच करें. अगर बेचने वाला कागजात दिखाने में आनाकानी करता है, तो जल्दबाजी में सौदा न करें. दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर बाद में कार अपने नाम करवाने में परेशानी हो सकती है.

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वहीं कार की सर्विस हिस्ट्री भी देखें. इससे पता चलता है कि पहले उसकी देखभाल समय पर हुई है या नहीं. अगर मीटर पर कम किलोमीटर दिख रहे हैं, लेकिन सर्विस रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, तो सावधान हो जाएं. कई बार पुरानी कार की मीटर रीडिंग के साथ छेड़छाड़ की जाती है, ताकि गाड़ी कम चली हुई लगे. इसलिए सिर्फ मीटर देखकर कार की हालत का अंदाजा न लगाएं.

बंद हो चुके मॉडल खरीदने से पहले सोचें 

कुछ कार मॉडल अब बाजार में नहीं बिकते. इसी तरह, कुछ कंपनियां भारत में अपना कारोबार बंद कर चुकी हैं. ऐसी कार खरीदने से पहले उसके स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता जरूर जांच लें. अगर जरूरी पार्ट्स आसानी से नहीं मिलते, तो छोटी-मोटी खराबी ठीक कराने में भी ज्यादा समय और पैसा लग सकता है.

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पहले टैक्सी पर इस्तेमाल हुई कार की जांच करें

सेकंड हैंड कार खरीदते समय यह पता करना भी जरूरी है कि उसका इस्तेमाल निजी तौर पर हुआ था या टैक्सी के रूप में. टैक्सी के तौर पर इस्तेमाल होने वाली कारें अक्सर लंबे समय तक और ज्यादा चलती हैं. इससे इंजन, क्लच, ब्रेक और सस्पेंशन जैसे पार्ट्स पर ज्यादा असर पड़ सकता है. ऐसी कार खरीदने से पहले उसकी मौजूदा हालत की अच्छी तरह जांच कराना जरूरी है.

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

पुरानी कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव जरूर लें. इस दौरान देखें कि गाड़ी चलाते समय कोई असामान्य आवाज तो नहीं आ रही. अगर साइलेंसर से नीला धुआं निकलता है, गियर बदलते समय झटके लगते हैं या कार एक तरफ खिंचती है, तो ये किसी तकनीकी खराबी के संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में कार की जांच किसी भरोसेमंद मैकेनिक से कराएं. कई बार शुरुआती जांच में सामने आई खराबी को नजरअंदाज करने पर बाद में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. इसलिए कार पसंद आने के बाद भी उसकी तकनीकी जांच और जरूरी दस्तावेजों की पुष्टि किए बिना सौदा फाइनल न करें.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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