अनजान एक्सप्रेसवे पर अचानक कार या बाइक खराब हो जाए और आसपास कोई पहचान वाली जगह भी नजर न आए, तो मदद बुलाना काफी मुश्किल हो जाता है. रात, बारिश या घने कोहरे में परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि हादसे या खराब वाहन की सही लोकेशन बताना आसान नहीं होता. अब NHAI इस समस्या को दूर करने की तैयारी कर रहा है. राष्ट्रीय राजमार्गों पर मदद के लिए इस्तेमाल होने वाली 1033 हेल्पलाइन को AI तकनीक से जोड़ने की योजना है. इसके बाद लोगों को फोन पर अपनी लोकेशन समझाने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है.
फोन आते ही पता लगाने में मिलेगी मदद
NHAI अधिकारियों के मुताबिक, नई तकनीक का इस्तेमाल 1033 हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल के दौरान किया जाएगा. सिस्टम कॉल करने वाले व्यक्ति क लोकेशन पहचानने में मदद करेगा. इसके बाद स्तिथि को देखते हुए एंबुलेंस, वाहन ठीक करने वाला मिस्त्री या टोइंग टीम को मौके पर भेजा जा सकेगा. यानी अगर किसी व्यक्ति को यह भी नहीं पता कि वह एक्सप्रेसवे के किस हिस्से में है, तब भी वह आसानी से सहायता मांग सकेगा.
मिलेगी 5 किमी तक की सटीक लोकेशन
नया सिस्टम में सिर्फ लोकेशन पता करने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इसमें कॉल करने वाला व्यक्ति मौके की फोटो और वीडियो भी शेयर कर सकेगा. NHAI के मुताबिक कि सिस्टम करीब 5 मीटर तक की सटीकता से लोकेशन पता लगाने में सक्षम हो सकता है. इससे सहायता भेजने वाली टीम को घटनास्थल के बारे में पहले से बेहतर जानकारी मिल सकेगी.
एंबुलेंस और टोइंग टीम को भी मिलेगी सीधी लोकेशन
हाईवे पर हादसा होने के बाद कई बार मदद पहुंचने में देरी इसलिए भी होती है क्योंकि टीम को घटनास्थल ढूंढना पड़ता है. नई व्यवस्था में एंबुलेंस, मिस्त्री या टोइंग वाहन के चालक को घटनास्थल की लोकेशन सीधे मिल सकेगी. इससे रास्ता तलाशने में लगने वाला समय बच सकता है और जरूरतमंद व्यक्ति तक राहत जल्दी पहुंचने की उम्मीद है.
हादसे वाली जगहों पर पहले ही मिलेगा अलर्ट
NHAI की योजना के जरिए उन हिस्सों की भी पहचान की जा रही है, जहां एक्सीडेंट का खतरा ज्यादा रहता है. ऐसी जगह पर पहुंचने से पहले वाहन मालिको को अलर्ट देने की सुविधा भी तैयार की जा रही है. इससे ड्राइवर पहले से सतर्क हो सकेंगे और जोखिम से बचने में मदद मिलेगी.
कई भाषाओं में काम करेगा सिस्टम
देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग हाईवे पर सफर करते हैं. ऐसे में भाषा भी कई बार मदद मांगने में परेशानी बन जाती है. NHAI की योजना इस सिस्टम को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई भाषाओं में इस्तेमाल करने जैसा बनाने की है. इसका मकसद 1033 हेल्पलाइन हो अलग-अलग राज्यों के यात्रियों के लिए ज्यादा आसान बनाना है. इस तरह आपात स्थिति में लोकेशन बताने और भाषा से जुड़ी परेशानी को तकनीक की मदद से कम किया जा सकेगा.
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