ट्रैफिक चालान कटने के बाद कई लोग इस उम्मीद में रहते हैं कि अगली लोक अदालत में जाकर उनका जुर्मान कम हो जाएगा या चालान का निपटारा हो जाएगा. इसी वजह से लोग अपने पुराने पेंडिंग चालान लेकर लोक अदालत पहुंचते हैं. लेकिन हर चालान में राहत मिलना तय नहीं है. कुछ मामलों में कानून के तहत समझौते की अनुमति नहीं होती, इसलिए उनका निपटारा लोक अदालत में नहीं किया जा सकता. अगर आपके वाहन का भी चालान पेंडिंग है तो पहले जान लीजिए कि किन मामलों में राहत मिल सकती हौ और किन में नियमित कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है.
क्या ड्रिंक एंड ड्राइव का चालान लोक अदालत में माफ हो सकता है?
शराब पीकर गाड़ी चलाना सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध है. ऐसे मामले में यह मान लेना सही नहीं होगा कि लोक अदालत में पहुंचने स चालान अपने आप माफ हो जाएगा. लोक अदालत में केवल उन्हीं मामलों का निपटारा किया जा सकता है, जिनमें कानून समझौते की अनुमति देता है.
अगर मामला ऐसा की जिसमें समझौता नहीं हो सकता वो अपराध की श्रेणी में आता है, तो उसे लोक अदालत में नहीं निपटाया जा सकता. इसलिए ड्रिंक एंड ड्राइव के मामले में चालान की श्रेणी और लागू कानूनी प्रावधानों की जांच करना जरूरी है.
क्या गंभीर सड़क हादसे से जुड़े चालान भी लोक अदालत में निपटते हैं?
अगर किसी गाड़ी से गंभीर सड़क हादसा हुआ है और मामला आपराधिक कार्रवाई तक पहुंच गया है. तो उसे सामान्य ट्रैफिक चालान की तरह नहीं देखना चाहिए. ऐसे मामलों में दुर्घटना की परिस्थितियों, चोट या मौत से जुड़े फैक्ट और लागू कानून के आधार पर कार्रवाई होती है. समझौता नहीं हो सकने वाले अपराधों का निपटारा लोक अदालत में नहीं किया जा सकता. हालांकि दुर्घटना से जुड़े हर मामले पर एक जैसा नियम लागू नहीं होता. यह देखना जरूरी है कि मामला किस कानूनी श्रेणी में आता है.
क्या खतरनाक ड्राइविंग और ओवर स्पीडिंग के चालान माफ होते हैं?
सड़क पर खतरनाक तरीक से गाड़ी चलाना, तेज रफ्तार में गाड़ी भगाना या स्टंट करके दूसरों की जान जोखिम में डालान गंभीर सुरक्षा पर सवाल उठाता है. ऐसे मामलों में राहत मिलेगी या नहीं, ये संबंदित अपराध, चालान की प्रकृति और लागू नियमों पर निर्भर करता है. अगर चालान समझौते योग्य है और उसे लोक अदालत में सुनवाई के लिए स्वीकार किया गया है, तो उसका निपटारा संभव हो सकता है. लेकिन हर खतरनाक ड्राइविंग या ओवरस्पीडिंग चालान को अपने आप माफ होने वाला मानना गलत होगा.
क्या आपराधिक मामले में इस्तेमाल वाहन का चालान लोक अदालत में निपट सकता है?
अगर किसी वाहन का इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि में हुआ है या उससे जुड़ी FIR दर्ज है, तो केवल लोक अदालत में जाने से उस मामले का निपटारा नहीं हो जाता. यह समझना जरूरी है कि वाहन का ट्रैफिक चालान और उससे जुड़ा आपराधिक मामला अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के तहत चल सकते हैं. लोक अदालत में केवल उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले और कानून के तहत समझौते योग्य मामलों का ही निपटारा किया जा सकता है. इसलिए ऐसे मामलों में संबंधित अदालत या कानूनी विशेषज्ञ से जानकारी लेना बेहतर है.
किन मामलों ट्रैफिक चालानों का निपटारा लोक अदालत में हो सकता है?
- कैमरों द्वारा ऑटोमैटिक काटे गए ओवरस्पीडिंग या रेड लाइट जंप के चालान
- बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाना या बिना सीट बेल्ट के कार चलाना
- PUC, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस (DL) या गाड़ी की आरसी (RC) मौके पर न होना
- रॉन्ग साइड (Wrong Way) गाड़ी चलाना या तय लेन का पालन न करना
- नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी करने के चालान
- ऐसे पुराने चालान जिनकी समय-सीमा खत्म होने के बाद उन्हें वर्चुअल या नियमित ट्रैफिक कोर्ट भेज दिया गया हो.
- ऑटो, टैक्सी या कमर्शियल गाड़ियों के परमिट या फिटनेस से जुड़े छोटे विवाद
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी चालानों को माफ कर दिया जाएगा या जुर्माना हर हाल में कम होगा. चालान की श्रेणी, संबंधित राज्य के नियम और लोक अदालत में उपलब्ध व्यवस्था के आधार पर फैसला होता है. इसलिए जाने से पहले अपने चालान की पात्रता जरूर जांच लें.
लोक अदालत में चालान ले जाने से पहले क्या जांचना चाहिए?
सबसे पहले अपने चालान का नंबर और उसकी मौजूदा स्थिति ऑनलाइन चेक करें. इसके बाद पता करें कि आपका चालान लोक अदालत में निपटारे के लिए पात्र है या नहीं. अगर मामला अदालत में लंबित है, तो संबंधित कोर्ट से उसकी स्थिति की जानकारी लें. लोक अदालत का उद्देश्य कानून के तहत समझौते योग्य मामलों को आपसी सहमति से जल्दी निपटाना है. यह हर तरह के जुर्माने को माफ करने की व्यवस्था नहीं है.
ध्यान दें, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के मुताबिक, लोक अदालत में कानून के तहत समझौते योग्य आपराधिक मामलों का निपटारा किया जा सकता है, लेकिन गैर-समझौतायोग्य अपराध इसके दायरे में नहीं आते. इसलिए चालान माफ होने की उम्मीद में जाने से पहले अपने मामले की कानूनी श्रेणी की पुष्टि जरूर करें.